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ट्रंप की तमाम कोशिशें नाकाम, अब यूक्रेन जंग रोकने के लिए पीएम मोदी और शी जिनपिंग ने आगे बढ़ाया शांति का हाथ

New Delhi : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के तमाम प्रयासों के बावजूद रूस और यूक्रेन के बीच चल रहा भीषण संघर्ष थमने का नाम नहीं ले रहा है. अमेरिकी कूटनीति के विफल होने के बाद अब वैश्विक मंच पर भारत और चीन की भूमिका बेहद अहम हो गई है. ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने रूस के सामने शांति वार्ता में मदद करने की बड़ी पेशकश की है. रूस ने आधिकारिक तौर पर इस बात की पुष्टि की है कि भारत और यूक्रेन विवाद के स्थायी समाधान के लिए कूटनीतिक स्तर पर सहयोग करना चाहते हैं.पुतिन ने किया पीएम मोदी और जिनपिंग के प्रस्ताव का स्वागतरूसी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने बताया कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत और चीन के नेताओं द्वारा दिए गए शांति प्रस्ताव का खुले तौर पर स्वागत किया है. यह कूटनीतिक घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब व्हाइट हाउस के विशेष दूतों स्टीव विटकॉफ़ और जेरेड कुशनर की मास्को और कीव यात्रा के बावजूद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप कोई ठोस नतीजा निकालने में असफल रहे हैं. ब्रिक्स समिट के दौरान वैश्विक राजनीति के जानकारों ने पीएम मोदी, शी जिनपिंग और व्लादिमीर पुतिन की इस तिकड़ी को मौजूदा भू-राजनीति का सबसे शक्तिशाली केंद्र करार दिया है. सम्मेलन के पहले दिन तीनों नेताओं की मुस्कुराते हुए हाथ थामे तस्वीर ने पूरी दुनिया में एक नया संदेश दिया है.रूस और यूक्रेन दोनों से मजबूत कूटनीतिक संबंध वाला देश बना भारतप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शंघाई सहयोग संगठन यानी एससीओ सम्मेलन के दौरान भी इस बात पर जोर दिया था कि अब समय अंतहीन युद्ध से आगे बढ़कर जंग के खात्मे की तरफ बढ़ने का है. भारत की सबसे बड़ी कूटनीतिक ताकत यह है कि उसके संबंध एक तरफ जहां रूस के साथ बेहद प्रगाढ़ हैं, वहीं पश्चिमी देशों और यूक्रेन के साथ भी संवाद के रास्ते खुले हुए हैं. थिंक टैंक से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के पास मास्को, तेहरान और पश्चिमी देशों के बीच एक साथ संवाद स्थापित करने की अनूठी क्षमता है जो शांति स्थापना में गेमचेंजर साबित हो सकती है. इसी बीच आगामी दिसंबर में होने वाले जी-20 शिखर सम्मेलन में रूसी राष्ट्रपति पुतिन और यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की के बीच आमने-सामने की ऐतिहासिक बैठक होने की भी संभावना जताई जा रही है.