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समान नागरिक संहिता पर एनडीए में खींचतान: अमित शाह के बयान के बाद टीडीपी-शिवसेना का समर्थन, जेडीयू ने जताई आपत्ति

New Delhi : केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले देश के एनडीए शासित राज्यों में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने के ऐलान के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। इस बड़े मुद्दे पर सत्तारूढ़ गठबंधन एनडीए के भीतर ही अलग-अलग और विरोधी सुर सामने आने लगे हैं। जहां एक तरफ तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) और एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने इस कदम का खुलकर समर्थन किया है, वहीं बिहार में बीजेपी की प्रमुख सहयोगी पार्टी जेडीयू ने इसका विरोध करते हुए अपने रुख को साफ कर दिया है।टीडीपी का बदला रुख और समर्थनआंध्र प्रदेश की सत्ता संभाल रही टीडीपी और महाराष्ट्र की शिवसेना ने गृह मंत्री अमित शाह के बयान का स्वागत किया है। लोकसभा में टीडीपी के नेता लावू कृष्ण देवरायालु ने स्पष्ट किया है कि उनकी पार्टी इस कानून का समर्थन करेगी, हालांकि इसे लागू करने से पहले सभी पक्षों से व्यापक चर्चा की जाएगी। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पहले मुस्लिम मतदाताओं के समर्थन को लेकर सतर्क रहने वाली टीडीपी का रुख अब इस मामले में काफी नरम पड़ चुका है, जो राष्ट्रीय राजनीति में एक बड़ा संकेत माना जा रहा है।जेडीयू की दो टूक: राष्ट्रीय स्तर पर समर्थन, पर बिहार में विरोधदूसरी ओर, बिहार में बीजेपी की सहयोगी पार्टी जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) ने यूसीसी को लेकर अपना अलग स्टैंड बरकरार रखा है। पार्टी नेता श्याम रजक और अन्य वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि भले ही पार्टी सैद्धांतिक रूप से राष्ट्रीय स्तर पर ऐसे मुद्दों का समर्थन करती हो, लेकिन वह इसे अपने राज्य यानी बिहार में लागू करने के पक्ष में नहीं है। जेडीयू का यह भी तर्क है कि देश जैसे विविधतापूर्ण राष्ट्र में ऐसा कोई भी बड़ा कदम उठाने से पहले व्यापक राष्ट्रीय सहमति बनना बेहद जरूरी है।शिवसेना और अन्य सहयोगियों का कड़ा रुखएनडीए के अन्य सहयोगी दलों में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने यूसीसी को समानता, न्याय और राष्ट्रीय एकता का आधार बताते हुए इसका जोरदार समर्थन किया है। शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे ने इसे अपने संस्थापक बालासाहेब ठाकरे के सपनों के अनुरूप बताया है। वहीं, हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (सेकुलर) ने भी गृह मंत्री के इस बयान का स्वागत किया है, जबकि लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) ने किसी भी फैसले से पहले आधिकारिक ड्राफ्ट या ब्लूप्रिंट सामने आने का इंतजार करने की बात कही है।