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गोवा नाइटक्लब अग्निकांड: सुप्रीम कोर्ट के आदेश के दो सप्ताह बाद मुख्य आरोपियों ने किया आत्मसमर्पण

‘बिर्च बाय रोमियो लेन’ नाइटक्लब में लगी आग में गई थी 25 लोगों की जान, जमानत रद्द होने के बाद कसा शिकंजा

द इंडियन व्यू टीम
मापुसा (गोवा)

गोवा के एक नाइटक्लब में हुई भीषण और हृदयविदारक आग की घटना के मामले में न्याय की दिशा में एक बड़ा और निर्णायक कदम उठाया गया है। लगभग दस महीने पहले हुए इस भयानक अग्निकांड ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था, जिसमें कई निर्दोष लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। लंबे कानूनी संघर्ष और सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद, आखिरकार गोवा नाइटक्लब में लगी आग के तीन मुख्य आरोपियों ने मापुसा की एक अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया है।

यह आत्मसमर्पण सुप्रीम कोर्ट के एक कड़े आदेश के ठीक दो सप्ताह बाद हुआ है, जिसमें अदालत ने उनकी ज़मानत रद्द कर दी थी। यह दर्दनाक और घातक आग उत्तरी गोवा के अरपोरा में स्थित ‘बिर्च बाय रोमियो लेन’ नाइटक्लब में लगी थी। 6 दिसंबर, 2025 (December 6, 2025) की उस मनहूस रात को हुए इस अग्निकांड ने 25 लोगों की जान ले ली थी (claimed 25 lives) और कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। नाइटक्लब में सुरक्षा मानकों की घोर अनदेखी और आपातकालीन निकास द्वारों के अभाव के कारण यह आग एक बहुत बड़ी मानवीय त्रासदी में बदल गई थी।

इस मामले में सबसे अधिक चौंकाने वाला पहलू आरोपियों का कृत्य था। घटना के तुरंत बाद, मुख्य आरोपी गौरव लूथरा और सौरभ लूथरा गिरफ्तारी से बचने के लिए भारत से भाग गए थे । विदेश भागने के उनके इस कदम ने पुलिस प्रशासन और राज्य की कानून व्यवस्था पर भारी दबाव ला दिया था। हालांकि, बाद में उन्हें कानूनी प्रक्रियाओं के तहत वापस लाया गया और कुछ समय के लिए उन्हें ज़मानत भी मिल गई थी।

लेकिन पीड़ितों के परिवारों और नागरिक समाज के भारी विरोध के बाद, ज़मानत रद्द करने को चुनौती देने वाली कई याचिकाएं शीर्ष अदालत में दायर की गई थीं। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता और 25 मौतों के तथ्य को ध्यान में रखते हुए उनकी ज़मानत को खारिज कर दिया और उन्हें आत्मसमर्पण करने का कड़ा निर्देश दिया।

14 सितंबर, 2026 को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार (Published – September 14, 2026), आखिरकार न्यायपालिका के दबाव में आरोपियों को अदालत के सामने झुकना ही पड़ा। अब इस मामले की न्यायिक प्रक्रिया में तेज़ी आने की उम्मीद है। यह आत्मसमर्पण उन 25 पीड़ित परिवारों के लिए न्याय की पहली किरण है जो पिछले कई महीनों से अपने प्रियजनों को खोने के बाद दर-दर भटक रहे थे। यह घटना गोवा प्रशासन के लिए भी एक कड़ा सबक है कि पर्यटन स्थलों और नाइटक्लबों में अग्नि सुरक्षा नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए ताकि भविष्य में ऐसी किसी भी दर्दनाक घटना को दोहराने से रोका जा सके।