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किराये पर मकान और दुकान लेना-देना हुआ बेहद आसान: योगी सरकार का बड़ा फैसला, अब तय हुआ फिक्स स्टांप शुल्क

Lucknow : उत्तर प्रदेश में मकान, दुकान, या गोदाम किराए पर लेने और देने वाले आम नागरिकों के लिए योगी आदित्यनाथ सरकार ने एक राहत भरा और बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में प्रदेश की किरायेदारी व्यवस्था को पूरी तरह से सरल और पारदर्शी बनाने के लिए अहम फैसले पर मुहर लगाई गई। इस नए बदलाव के तहत सालाना 10 लाख रुपये तक के किराए के मामलों में स्टांप शुल्क और पंजीयन फीस को बेहद किफायती बना दिया गया है, जिससे लोगों को भारी-भरकम वित्तीय बोझ से मुक्ति मिलेगी।अब सालाना किराए के स्लैब के आधार पर लगेगा शुल्कअभी तक की पुरानी व्यवस्था के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति मकान, दुकान या गोदाम किराए पर देता या लेता था, तो स्टांप शुल्क की गणना प्रॉपर्टी के सर्किल रेट के आधार पर की जाती थी। सर्किल रेट के आधार पर गणना होने के कारण किरायानामा तैयार करवाकर उसका कानूनी पंजीयन कराने में लोगों को हजारों-लाखों रुपये का अतिरिक्त वित्तीय बोझ उठाना पड़ता था।आम जनता की इस परेशानी को समझते हुए योगी सरकार ने अब इस जटिल प्रक्रिया को पूरी तरह से खत्म कर दिया है और एक निश्चित शुल्क व्यवस्था लागू कर दी है। इसके तहत किरायेदारी या पट्टा विलेखों (Lease Deed) के लिए अब स्लैब तय कर दिए गए हैं:दो लाख रुपये तक का सालाना किराया: इस श्रेणी के लिए मात्र 1,000 रुपये वार्षिक शुल्क निर्धारित किया गया है।छह लाख रुपये तक का सालाना किराया: इस श्रेणी के अंतर्गत आने वाले समझौतों पर 3,000 रुपये शुल्क लगेगा।10 लाख रुपये तक का सालाना किराया: इस अधिकतम तय दायरे के लिए 4,500 रुपये वार्षिक शुल्क देना होगा।10 वर्ष तक की अवधि के पट्टा विलेखों पर मिलेगी विशेष छूटराज्य के स्टांप तथा न्यायालय शुल्क एवं पंजीयन मंत्री रवींद्र जायसवाल ने इस फैसले की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि 10 वर्ष तक की अवधि के किरायेदारी और पट्टा विलेखों पर प्रभावी स्टांप शुल्क एवं पंजीयन फीस में संशोधन किया गया है।सरकार के इस कदम से न केवल मकान और दुकान मालिकों को राहत मिलेगी, बल्कि किराए पर कारोबार शुरू करने वाले छोटे दुकानदारों और व्यापारियों को भी कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने में बहुत आसानी होगी। अब लोग बिना किसी आर्थिक तनाव के तयशुदा और कम शुल्क में अपने किराए के समझौतों का वैध पंजीकरण करा सकेंगे, जिससे भविष्य में होने वाले कानूनी विवादों से भी सुरक्षा मिलेगी।