‘अमेरिका के आगे मोदी सरकार ने टेक दिए घुटने!’ 2000 से ऊपर के UPI पेमेंट पर चार्ज लगने से भड़का विपक्ष, राहुल गांधी ने बोला सबसे तीखा हमला

अभिषेक सिंह
नई दिल्ली: डिजिटल इंडिया (Digital India) की शान माने जाने वाले यूपीआई (UPI) पेमेंट्स पर नया चार्ज लगने की घोषणा के बाद देश की सियासत में भूचाल आ गया है। 15 अक्टूबर से 2000 रुपये से अधिक के यूपीआई ट्रांजेक्शन (मर्चेंट पेमेंट) पर 0.4% MDR (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) लगाने के फैसले पर विपक्ष ने मोदी सरकार पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है। कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दलों ने सीधा आरोप लगाया है कि सरकार ने यह फैसला ‘अमेरिकी साम्राज्यवाद’ (American Imperialism) और विदेशी कंपनियों के दबाव में आकर लिया है, जिसका सीधा बोझ अब आम जनता और छोटे व्यापारियों की जेब पर पड़ेगा।
‘Narendra’s Ongoing Trump Appeasement’: कांग्रेस का तीखा प्रहार
विपक्ष ने इस फैसले को सीधे तौर पर अमेरिका और वहां की बड़ी कार्ड कंपनियों (Visa/Mastercard) को फायदा पहुंचाने की साजिश करार दिया है:
- राहुल गांधी का वार: कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इसे ‘मोदी टैक्स’ (Modi Tax) करार देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी पूरी तरह से ‘कंप्रोमाइज्ड’ हैं और उन्होंने एक बार फिर अमेरिकी दबाव के आगे सरेंडर कर दिया है।
- NOTA की नई परिभाषा: कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने तंज कसते हुए कहा कि पीएम मोदी ने ‘नोटा’ (NOTA) को फिर से परिभाषित किया है, जिसका नया मतलब ‘Narendra’s Ongoing Trump Appeasement’ (नरेंद्र का ट्रंप तुष्टिकरण) हो गया है। उन्होंने सवाल पूछा कि क्या यह चार्ज अमेरिकी कार्ड कंपनियों को यूपीआई से मुकाबला करने का मौका देने के लिए लगाया गया है?
विपक्ष एकजुट: ‘पब्लिक के पैसे पर विदेशी कंपनियों का डाका’
कांग्रेस के अलावा टीएमसी (TMC), आरजेडी (RJD) और एनसीपी-एसपी (NCP-SP) ने भी सरकार को आड़े हाथों लिया है:
- आरजेडी नेता मनोज झा ने इस कदम को किसी ‘अदृश्य ताकत’ के दबाव में लिया गया फैसला बताया और कहा कि यह सीधे तौर पर अमेरिकी साम्राज्यवाद के आगे झुकने जैसा है।
- टीएमसी सांसद सौगत राय ने चेतावनी दी है कि भले ही यह चार्ज ग्राहकों पर सीधे न लगे, लेकिन दुकानदार यह टैक्स अपनी जेब से नहीं देगा। अंततः हर सामान की कीमत बढ़ेगी और महंगाई की मार आम आदमी ही झेलेगा।
- कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने 14 सितंबर को ‘विश्वासघात का दिन’ (Day of Betrayal) बताते हुए कहा कि सरकार ने डिजिटल इंडिया को आम आदमी की जेब काटने वाली मशीन बना दिया है।
सरकार की सफाई: ग्राहकों पर नहीं पड़ेगा कोई सीधा बोझ
लगातार हो रहे हमलों के बीच वित्त मंत्रालय ने सफाई पेश करते हुए स्पष्ट किया है कि 0.4% का यह MDR चार्ज केवल मर्चेंट (दुकानदार) इकोसिस्टम के लिए है। आम ग्राहकों (Customers) या पीयर-टू-पीयर (व्यक्ति से व्यक्ति) ट्रांजेक्शन पर कोई भी शुल्क नहीं लगेगा। सरकार का तर्क है कि 2000 रुपये से कम के भुगतान पूरी तरह से फ्री रहेंगे और आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी इससे प्रभावित नहीं होगी।
यूपीआई (UPI) को भारत की डिजिटल क्रांति का सबसे बड़ा हथियार माना जाता था। लेकिन अब MDR लागू होने के बाद राजनीतिक दलों के साथ-साथ व्यापारियों और आम जनता के मन में भी यह डर बैठ गया है कि कहीं यह ‘मुफ्त सेवा’ का अंत तो नहीं? अमेरिकी दबाव के विपक्ष के आरोपों ने इस मामले को अब एक बड़ा राजनीतिक तूल दे दिया है।