विपक्ष के ‘विदेशी दबाव’ वाले दावों पर मोदी सरकार का जोरदार पलटवार! ‘96% UPI पेमेंट पूरी तरह FREE’, जानिए MDR विवाद के पीछे की असली सच्चाई

राघवेंद्र प्रताप सिंह
नई दिल्ली: यूपीआई (UPI) पेमेंट्स पर एमडीआर (MDR) चार्ज लगने को लेकर मचे सियासी घमासान और विपक्ष के तीखे हमलों के बीच अब केंद्र सरकार ने अपना सबसे कड़ा रुख साफ कर दिया है। विपक्ष द्वारा लगाए गए ‘अमेरिकी साम्राज्यवाद’ और ‘विदेशी कंपनियों के आगे घुटने टेकने’ के सनसनीखेज आरोपों को सरकार ने कोरी अफवाह और बेबुनियाद राजनीतिक प्रोपेगेंडा करार दिया है। आम जनता और छोटे व्यापारियों की चिंताओं को तुरंत दूर करते हुए सरकार ने सबसे बड़ा ऐलान किया है कि देश में होने वाले 96 प्रतिशत यूपीआई भुगतान (UPI Payments) आज भी एमडीआर के दायरे से पूरी तरह बाहर हैं और उन पर एक भी रुपया अतिरिक्त चार्ज नहीं लगेगा।
‘विदेशी कंपनियों को फायदा पहुंचाने का आरोप 100% झूठा’
सरकारी सूत्रों और वित्त मंत्रालय ने स्थिति को पूरी तरह से स्पष्ट करते हुए विपक्ष के उन दावों की हवा निकाल दी है, जिनमें कहा जा रहा था कि भारत ने विदेशी कार्ड कंपनियों (Visa/Mastercard) को फायदा पहुंचाने के लिए यह टैक्स थोपा है:
- पूरी तरह सुरक्षित है आम आदमी की जेब: सरकार ने कड़े शब्दों में कहा है कि पीयर-टू-पीयर (P2P) यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को भेजे जाने वाले पैसे और छोटे दुकानदारों (P2M) को किए जाने वाले 2000 रुपये तक के भुगतानों पर कोई शुल्क नहीं है। यह सेवा पहले की तरह मुफ्त रहेगी।
- 96% ट्रांजेक्शन बिल्कुल फ्री: आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया है कि भारत में होने वाले कुल डिजिटल लेन-देन का 96% हिस्सा इन मुफ्त श्रेणियों में ही आता है।
- बड़े कॉर्पोरेट्स के लिए है नियम: 0.4% का MDR चार्ज केवल उस 4% हिस्से पर लागू होगा, जो बड़े मर्चेंट्स या भारी-भरकम व्यावसायिक लेन-देन का हिस्सा हैं। इसका आम ग्राहक, किसान या रेहड़ी-पटरी वाले छोटे व्यापारियों से कोई लेना-देना नहीं है।
अफवाहों से बचें, नहीं रुकेगी ‘डिजिटल इंडिया’ की रफ्तार
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि भारत का यूपीआई सिस्टम आज भी दुनिया का सबसे सस्ता, तेज और सुरक्षित डिजिटल पेमेंट नेटवर्क है। एमडीआर को लेकर किए गए मामूली बदलाव केवल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने और सर्वर मेंटेनेस की लागत को संतुलित करने के लिए हैं, न कि किसी ‘अदृश्य ताकत’ या विदेशी कंपनियों को मुनाफा कमाने की छूट देने के लिए।
सरकार के इस कड़े और स्पष्ट जवाब ने उन तमाम अफवाहों पर सीधा ब्रेक लगा दिया है, जिन्होंने डिजिटल भुगतान करने वाले आम नागरिकों के मन में टैक्स कटने का डर पैदा कर दिया था। यह पूरी तरह साफ हो गया है कि यूपीआई से चाय-सब्जी खरीदने से लेकर रोजमर्रा के बिल भरने तक, 96% लेन-देन पर आम जनता के लिए ‘जीरो चार्ज’ की सुविधा बिना किसी रुकावट के जारी रहेगी।