यूपी के लाखों इंजीनियरिंग छात्रों को सबसे बड़ी राहत! अब बिना ‘अपार आईडी’ (APAAR ID) के भी भरे जाएंगे नामांकन फॉर्म, दूर हुई सबसे बड़ी टेंशन

राघवेंद्र प्रताप सिंह
लखनऊ/उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश के इंजीनियरिंग (Engineering) और टेक्निकल कोर्सेज में दाखिला लेने वाले लाखों छात्र-छात्राओं के लिए एक बेहद सुकून देने वाली खबर सामने आई है। नामांकन (Enrollment) फॉर्म भरने के लिए अनिवार्य की गई ‘अपार आईडी’ (APAAR ID – Automated Permanent Academic Account Registry) को लेकर मचे भारी असमंजस और सर्वर की दिक्कतों के बीच प्राविधिक शिक्षा विभाग ने एक बड़ा फैसला लिया है। अब छात्रों को भारी राहत देते हुए यह स्पष्ट कर दिया गया है कि बिना अपार आईडी के भी उनके नामांकन फॉर्म स्वीकार किए जाएंगे और किसी भी छात्र का भविष्य अधर में नहीं लटकेगा।
क्यों लिया गया यह बड़ा फैसला? जानिए इस छूट की असली इनसाइड स्टोरी
‘वन नेशन, वन स्टूडेंट आईडी’ (One Nation, One Student ID) के विजन के तहत सभी छात्रों के लिए अपार आईडी को अनिवार्य किया गया था। लेकिन इस प्रक्रिया में छात्रों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा था:
- तकनीकी दिक्कतों ने उड़ाई थी नींद: आधार कार्ड (Aadhaar Card) के डेटा में मामूली अंतर (जैसे नाम या जन्मतिथि की स्पेलिंग) होने या पोर्टल पर तकनीकी खामियों के कारण हजारों छात्र अपनी आईडी जनरेट ही नहीं कर पा रहे थे।
- छात्रों पर था फॉर्म रिजेक्ट होने का डर: आईडी न बन पाने के कारण अंतिम तारीख नजदीक आ रही थी और छात्रों को यह खौफ सता रहा था कि कहीं उनका एडमिशन या नामांकन फॉर्म ही रद्द न हो जाए।
- प्रशासन का ‘सुपर-राहत’ वाला कदम: खासकर 16 वर्ष से कम आयु वाले और डेटा मिसमैच का सामना कर रहे छात्रों की इस भारी परेशानी को देखते हुए अब प्रशासन ने स्पष्ट निर्देश दे दिए हैं कि नामांकन फॉर्म भरने के लिए फिलहाल ‘अपार आईडी’ की अनिवार्यता को रोक दिया गया है।
अभिभावकों और छात्रों ने ली राहत की सांस
इस फैसले के बाद पिछले कई दिनों से साइबर कैफे और कॉलेजों के चक्कर काट रहे छात्रों ने बड़ी राहत की सांस ली है। अब वे बिना किसी मानसिक दबाव के अपने फॉर्म भर सकेंगे।
इंजीनियरिंग छात्रों के लिए शासन का यह कदम एक बड़ी ‘संजीवनी’ की तरह है। डिजिटल इंडिया की पहल बेशक शानदार है, लेकिन सिस्टम की तकनीकी खामियों की सजा छात्रों को नहीं मिलनी चाहिए। इस फैसले से यह साफ हो गया है कि सरकार के लिए नियमों के पालन से ज्यादा छात्रों का भविष्य और उनका करियर सर्वोपरि है।