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डिजिटल भुगतान प्रणाली में नया बदलाव: दो हज़ार रुपये से अधिक के यूपीआई लेन-देन पर व्यापारियों से वसूला जाएगा शून्य दशमलव चार प्रतिशत शुल्क

सरिता त्रिपाठी
नई दिल्ली

भारत में डिजिटल लेन-देन और वित्तीय समावेशन की दिशा में एक अभूतपूर्व क्रांति लाने वाले ‘यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस’ (यूपीआई) प्रणाली को लेकर सरकार और नियामक संस्थाओं ने एक बड़ा नीतिगत निर्णय लिया है। लंबे समय से भुगतान सेवा प्रदाताओं और बैंकों द्वारा लागत वसूली की मांग को ध्यान में रखते हुए, अब बड़े लेन-देन पर एक निश्चित शुल्क आरोपित करने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। नई व्यवस्था के अंतर्गत, अब दो हज़ार रुपये से अधिक के यूपीआई लेन-देन के लिए व्यापारियों से शून्य दशमलव चार प्रतिशत (0.4%) का शुल्क लिया जाएगा। यह निर्णय देश के खुदरा व्यापार और बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के वित्तीय ढांचे पर एक महत्वपूर्ण और प्रत्यक्ष प्रभाव डालने वाला है।

हालांकि, सरकार ने यह भली-भांति सुनिश्चित किया है कि इस नए शुल्क का आर्थिक बोझ आम आदमी और गली-मोहल्ले के छोटे दुकानदारों पर बिल्कुल न पड़े। वित्त मंत्रालय और संबंधित भुगतान नियामक संस्थाओं ने स्पष्ट रूप से घोषणा की है कि छोटे विक्रेताओं को इस शुल्क से पूरी तरह से छूट दी गई है। इसका सीधा और स्पष्ट अर्थ यह है कि रेहड़ी-पटरी वालों, चाय की दुकानों, और छोटी परचून की दुकानों पर क्यूआर कोड के माध्यम से किए जाने वाले दैनिक भुगतान पहले की तरह ही पूरी तरह से निःशुल्क रहेंगे।

इस नए नियम को लेकर आम जनता और व्यापारियों के बीच उत्पन्न हुई शंकाओं का त्वरित निवारण करते हुए वित्त मंत्रालय ने एक बहुत ही विस्तृत और सांख्यिकीय स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया है। वित्त मंत्रालय का कहना है कि व्यक्ति-से-व्यक्ति (पर्सन-टू-पर्सन) के बीच होने वाले लेन-देन, जिन्हें भी इस शुल्क से पूर्ण रूप से छूट दी जाएगी, कुल यूपीआई लेन-देन के मूल्य का सत्तर प्रतिशत हिस्सा हैं। जब हम अपने परिवार के सदस्यों, दोस्तों या किसी भी अन्य व्यक्ति के बैंक खाते में सीधे यूपीआई के माध्यम से पैसे भेजते हैं, तो उस पर एक रुपये का भी अतिरिक्त शुल्क नहीं लगेगा।

मंत्रालय द्वारा जारी किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस नए शुल्क का दायरा बहुत ही सीमित रखा गया है। मंत्रालय के अनुसार, व्यापारियों के केवल चार प्रतिशत लेन-देन पर ही यह शुल्क लगेगा। यह शुल्क विशेष रूप से बड़े सुपरमार्केट, इलेक्ट्रॉनिक शोरूम, आभूषण की दुकानों और अन्य बड़े व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर लागू होगा, जहां एक बार में दो हज़ार रुपये से अधिक का बिल बनता है।

इसके अतिरिक्त, उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करते हुए यह भी स्पष्ट किया गया है कि यूपीआई या रुपे (RuPay) डेबिट कार्ड के माध्यम से किए गए दो हज़ार रुपये से कम मूल्य के व्यक्ति-से-व्यापारी (पर्सन-टू-मर्चेंट) लेन-देन भी इन शुल्कों से मुक्त रहेंगे[cite: 113]। इस नई नीति का मुख्य उद्देश्य भारत के विशाल डिजिटल भुगतान ढांचे को बनाए रखने वाली कंपनियों (जैसे बैंक और यूपीआई एप्लिकेशन) को एक स्थायी राजस्व मॉडल प्रदान करना है, ताकि वे अपने सर्वर, साइबर सुरक्षा और तकनीकी ढांचे को और अधिक सुदृढ़ बना सकें। हालांकि, व्यापारियों का एक वर्ग इस शून्य दशमलव चार प्रतिशत के शुल्क का विरोध कर रहा है, क्योंकि उनका मानना है कि इससे उनके लाभ के मार्जिन में कमी आएगी। कुल मिलाकर, यह कदम भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को परिपक्व और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक अहम प्रयोग है।