‘सेमीकॉन इंडिया दो हज़ार छब्बीस’: आपूर्ति श्रृंखलाओं के ‘हथियारीकरण’ के बीच प्रधानमंत्री ने भारत को बताया ‘विश्वसनीय’ चिप निर्माण केंद्र

विवेक ओझा
नई दिल्ली
आधुनिक विश्व की संपूर्ण अर्थव्यवस्था, उन्नत संचार तंत्र, और राष्ट्रीय सुरक्षा अब पूरी तरह से ‘सेमीकंडक्टर’ (माइक्रोचिप) के निर्बाध उत्पादन पर निर्भर हो चुकी है। इन अति-सूक्ष्म चिप्स के बिना न तो स्मार्टफोन कार्य कर सकते हैं, न ही आधुनिक गाड़ियां और न ही रक्षा उपकरण। वैश्विक महाशक्तियों के बीच इसी सेमीकंडक्टर तकनीक पर अपना पूर्ण एकाधिकार स्थापित करने की एक भयंकर होड़ मची हुई है। इसी अत्यंत महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक और तकनीकी परिदृश्य के बीच, भारत ने ‘सेमीकॉन इंडिया दो हज़ार छब्बीस’ के माध्यम से वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग में एक प्रमुख खिलाड़ी बनने की अपनी प्रबल और ठोस दावेदारी पेश की है।
सत्रह सितंबर, दो हज़ार छब्बीस को नई दिल्ली स्थित अत्याधुनिक सम्मेलन केंद्र ‘यशोभूमि’ में एक अत्यंत भव्य अंतरराष्ट्रीय आयोजन किया गया। एक आधिकारिक तस्वीर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सत्रह सितंबर, दो हज़ार छब्बीस को नई दिल्ली के यशोभूमि में ‘सेमीकॉन इंडिया दो हज़ार छब्बीस’ के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए देखा जा सकता है। अपने इस ओजस्वी, मुखर और दूरदर्शी संबोधन में, प्रधानमंत्री ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं के भू-राजनीतिक खतरों पर कड़ा प्रहार किया और भारत को दुनिया के सामने एक सबसे सुरक्षित और स्थिर विकल्प के रूप में प्रस्तुत किया।
प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक मंच पर बहुत ही बेबाकी से अपनी बात रखते हुए कहा कि आपूर्ति श्रृंखलाओं के वर्तमान ‘हथियारीकरण’ के बीच भारत एक ‘विश्वसनीय’ चिप निर्माण गंतव्य के रूप में उभर रहा है। ‘हथियारीकरण’ शब्द का प्रयोग यहां उन देशों के संदर्भ में किया गया है जो महत्वपूर्ण खनिजों और चिप निर्माण तकनीक पर अपने एकाधिकार का उपयोग अन्य राष्ट्रों को कूटनीतिक और आर्थिक रूप से दबाने के लिए एक हथियार के रूप में कर रहे हैं। ताइवान जलडमरूमध्य में बढ़ते सैन्य तनाव और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं ने पूरी दुनिया को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि चिप आपूर्ति के लिए केवल एक क्षेत्र विशेष पर निर्भर रहना कितना खतरनाक हो सकता है।
इसी गंभीर चिंता को दूर करते हुए, प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया कि एक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण गंतव्य के रूप में भारत के आकर्षण को आपूर्ति श्रृंखलाओं के ‘हथियारीकरण’ के इसी व्यापक संदर्भ में देखा जाना चाहिए।भारत के पास एक विशाल और युवा तकनीकी कार्यबल, दुनिया का सबसे बड़ा और तीव्र गति से बढ़ता हुआ घरेलू बाजार, और एक स्थिर व लोकतांत्रिक नीतियां हैं। ये सभी अनुकूल कारक भारत को वैश्विक निवेशकों और विशाल चिप निर्माता कंपनियों के लिए एक अत्यंत सुरक्षित और आकर्षक विकल्प बनाते हैं।
अपने संबोधन का समापन करते हुए, प्रधानमंत्री ने भारत के प्राचीन ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के महान दर्शन को आधुनिक तकनीक से जोड़ते हुए दुनिया को एक बहुत बड़ा आश्वासन दिया। उन्होंने पूरे विश्वास के साथ कहा कि भारत की यह तकनीकी सफलता केवल उसके अपने लाभ के लिए नहीं है, बल्कि भारत की सफलता से पूरे विश्व को लाभ होगा। यदि भारत चिप निर्माण का एक प्रमुख वैश्विक केंद्र बन जाता है, तो यह वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में आवश्यक विविधता लाएगा, कीमतों को स्थिर करेगा, और किसी एक देश के खतरनाक एकाधिकार को समाप्त करेगा। ‘सेमीकॉन इंडिया दो हज़ार छब्बीस’ का यह आयोजन वास्तव में भारत को एक अग्रणी तकनीकी महाशक्ति बनाने की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक मील का पत्थर है।