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चुनाव आयोग का बड़ा फैसला: ममता बनर्जी गुट को मिला ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ निशान, बागी गुट को क्या मिला? जानिए पूरी खबर

New Delhi : पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के दोनों गुटों को लेकर निर्वाचन आयोग ने एक बड़ा और अहम फैसला सुना दिया है। आगामी उपचुनावों से ठीक पहले आयोग ने टीएमसी के ममता बनर्जी और बागी गुटों को नए नाम और अलग-अलग चुनाव निशान आवंटित कर दिए हैं। इस फैसले के बाद राज्य का सियासी पारा एक बार फिर चढ़ गया है।ममता बनर्जी गुट को मिला नया नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ निशाननिर्वाचन आयोग के आदेश के मुताबिक, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस गुट को शुक्रवार को नया नाम ‘ममता अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस’ मिला है। इसके साथ ही आयोग ने इस मुख्य गुट को चुनाव चिह्न के रूप में ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ आवंटित किया है। बता दें कि ममता गुट की ओर से चुनाव आयोग के सामने कुछ नए नाम और प्रतीक चिन्ह सुझाए गए थे, जिनमें क्रिकेट बैट और बिना गेंद वाले फुटबॉलर का निशान भी शामिल था।बागी गुट को मिला ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ और लिफाफादूसरी ओर, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले धड़े के प्रतिद्वंद्वी गुट (जिसे अरूप रॉय और ऋतब्रत बनर्जी संभाल रहे हैं) को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नया नाम दिया गया है। निर्वाचन आयोग के आदेशानुसार इस बागी गुट को चुनाव चिह्न के रूप में ‘लिफाफा’ दिया गया है। आयोग का यह फैसला पश्चिम बंगाल की दो महत्वपूर्ण विधानसभा सीटों और असम की एक संसदीय सीट पर होने वाले उपचुनावों से ठीक पहले आया है।उपचुनावों से पहले निर्वाचन आयोग की कड़ी कार्रवाईयह पूरा घटनाक्रम तब सामने आया जब निर्वाचन आयोग ने ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के दोनों ही गुटों पर पुरानी पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न इस्तेमाल करने पर रोक लगा दी थी। यह रोक आगामी छह अक्तूबर को होने वाले उपचुनावों को ध्यान में रखते हुए लगाई गई थी। पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों के साथ-साथ असम की नगांव संसदीय सीट पर उपचुनाव होने हैं, जिसके चलते दोनों पक्षों के बीच सिंबल को लेकर खींचतान चल रही थी।राहुल गांधी ने उठाए निर्वाचन आयोग के फैसले पर सवालचुनाव आयोग के इस आदेश के सामने आने के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर भी शुरू हो गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने निर्वाचन आयोग के इस फैसले की तीखी आलोचना की है। उन्होंने सोशल मीडिया और विभिन्न मंचों के जरिए आरोप लगाया है कि भारतीय जनता पार्टी और निर्वाचन आयोग मिलकर काम कर रहे हैं। राहुल गांधी ने दावा किया कि यह सब विपक्षी दलों को कमजोर करने की एक सोची-समझी रणनीति है और उन्होंने इसे देश के लोकतंत्र के पतन का एक नया प्रतीक करार दिया है।