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पर्यावरण और जलवायु गतिकी का भविष्य” पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में प्रधानमंत्री के संबोधन मूल का पाठ

नई दिल्ली ( इंडियन व्यू टीम ) : पर्यावरण और जलवायु गतिकी का भविष्य” पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में महत्वपूर्ण बातें कहीं। उन्होंने कहा कि
प्रकृति और पर्यावरण के विषय पर सदियों तक भारत ने एक तरह से विश्व का मार्गदर्शन किया है। अपने उस वैचारिक कमिटमेंट को लेकर अपने सांस्कृतिक अनुभवों को आधार बनाकर भारत अब आधुनिक क्लाइमेट चैलेंजेज के समाधान भी दे रहा है, और साथ ही भारत मानवता के सामूहिक प्रयासों के लिए आवाहन भी कर रहा है। मुझे खुशी है NGT की ये कांफ्रेंस उसी मिशन को आगे बढ़ा रही है। इस आयोजन के लिए मैं NGT के सभी पदाधिकारियों को, इससे संबंधित सभी महानुभावों को, बहुत-बहुत बधाई देता हूं। अपनी शुभकामनाएं देता हूं।

हम सब जानते हैं अक्सर कार्बन emission की जिम्मेदारी गलत तरीके से विकासशील देशों पर डाली जाती रही है। यहां बहुत सारे ग्लोबल साउथ के मेरे साथी बैठे हैं। जबकि ऐतिहासिक सच्चाई यह है, आज भी प्रति व्यक्ति कार्बन emission में भारत का योगदान ग्लोबल एवरेज के आधे से भी कम है। विकसित देशों में भारत की तुलना में छह गुना ज्यादा प्रति व्यक्ति कार्बन emission हो रहा है। छह गुना ज्यादा। भारत यह तथ्य मजबूती के साथ वैश्विक मंचों पर रखता है। और मैं हर भारतवासी से कहूंगा, आप भी दम दिखाइए। हमने अपनी परंपराओं और उनकी ताकत को भी दुनिया के सामने रखा है। इन्हीं विषयों को लेकर पेरिस में COP-21 के दौरान हमने “Convenient Action – Continuity for Change” बुक को भी लॉन्च किया था। हम दुनिया को साथ लेकर पर्यावरण सुरक्षा के नए मापदंड स्थापित कर रहे हैं। One Sun, One World, One Grid की सोच हो या International Solar Alliance, CDRI, Global Biofuel Alliance, International Big Cat Alliance, मिशन लाइफ लाइफस्टाइल फॉर एनवायरमेंट, ऐसा हर एक मंच क्लाइमेट और एनवायरमेंट पर भारत के डेडिकेटेड कमिटमेंट्स का प्लेटफार्म बन रहा है।

आज का भारत पर्यावरण सुरक्षा के अपने प्राचीन विचारों को आधुनिक विजन में पिरोते हुए आगे बढ़ रहा है। बीते 12 वर्षों में पर्यावरण से जुड़े हर क्षेत्र में, हर सेक्टर में, भारत ने असाधारण प्रगति की है। हमारा बड़ा फोकस रिन्यूएबल एनर्जी पर रहा है और इसने पर्यावरण सुरक्षा में बड़ी भूमिका निभाई है। भारत जी20 में इकलौता ऐसा देश है। मैं जी20 के बड़े-बड़े लोग हैं ना, उनके सामने बता रहा हूं जी। इकलौता भारत ऐसा देश है, जिसने पेरिस में COP-21 समिट में जो भी कमिटमेंट्स किए थे, उन सारे कमिटमेंट्स को समय से पहले पूरा करके दिखाया है। यह हिंदुस्तान की ताकत की मैं बात कर रहा हूं। Non fossil fuel, सोलर एनर्जी कैपेसिटी, कार्बन एमिशन पर रोकथाम, हर पैरामीटर पर भारत की परफॉर्मेंस दुनिया में आज सकारात्मक रूप से चर्चा का विषय है। आप आंकड़ों को देखिए, 12 साल पहले भारत की सोलर एनर्जी कैपेसिटी करीब 2 गीगावाट थी। 12 साल पहले 2 गीगावाट। अगर यहां वकील बैठे हैं, तो जरा ध्यान रखें आंकड़े कभी काम आएंगे। आज यह 160 गीगावाट से ज्यादा हो चुकी है। 2 गीगावाट से 160 गीगावाट 12 साल में। हमने पीएम सूर्यघर मुक्त बिजली योजना के तहत घरों को ही सोलर पावर जनरेशन का केंद्र बनाने का मिशन शुरू किया। इस योजना के तहत अब तक 50 लाख से ज्यादा घरों में रूफ टॉप सोलर पैनल्स लग चुके हैं। यह दुनिया के कई देशों के टोटल घरों से ज्यादा है। इसके लिए सरकार ने हर घर को करीब 80,000 रूपये तक की आर्थिक मदद दी है। कुसुम योजना के तहत सरकार ने 30 लाख किसानों के खेतों में सोलर पंप्स लगाने का काम किया है। हमने वन नेशन वन ग्रिड का एंबिशियस प्रोजेक्ट भी पूरा कर लिया है। इतना ही नहीं घरों में एलईडी बल्ब जो बिजली की बचत करने में सफल पुरवार हुआ है। करोड़ों की तादाद में एलईडी बल्ब्स घरों में पहुंचाए हैं। और इन प्रयासों के परिणाम आज हमारे सामने है। अकेले सोलर एनर्जी से ही भारत में करीब, यह आंकड़ा भी वकीलों के लिए है, भारत में करीब 20 करोड़ टन कार्बन एमिशन रोकने में सफलता मिली है।

सोलर एनर्जी के साथ-साथ क्लीन एनर्जी के दूसरे सेक्टर में भी भारत ने बड़ी उपलब्धियां हासिल की है। बीते 12 साल में देश की विंड एनर्जी कैपेसिटी तीन गुना बढ़ी है। हाइड्रो एनर्जी कैपेसिटी में काफी बढ़ोतरी हुई है। और अब देश न्यूक्लियर एनर्जी जनरेशन पर तेजी से काम कर रहा है। और जो लोग एनवायरमेंट पर लंबे-लंबे भाषण झाड़ते रहते हैं। यह जब न्यूक्लियर एनर्जी का काम मैं आगे बढ़ाऊंगा, जब अदालत अदालतों में जाकर खड़े हो जाएंगे, रोकने के लिए। इस सेक्टर में प्राइवेट प्लेयर्स को भी लाने का रास्ता बनाया गया है। इन कोशिशों की वजह से आज भारत की नॉन फोसिल एनर्जी कैपेसिटी करीब-करीब चार गुना बढ़ गई है। भारत कोयले के और अधिक स्वच्छ उपयोग के लिए कोल गैसिफिकेशन जैसी टेक्नोलॉजी को भी बढ़ावा दे रहा है।

भारत आज क्लीन मोबिलिटी और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे क्षेत्रों में तेजी से काम कर रहा है। अभी कुछ दिन पहले भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन चली है, और यह दुनिया की सबसे लंबी हाइड्रोजन ट्रेन है। यह क्लीन मोबिलिटी के एक नए युग की शुरुआत है।

12 वर्षों में हमारे देश में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की संख्या में करीब 950 गुना का इजाफा हुआ है। 950 गुना। 2014 से पहले के साल में भारत में 3000 से भी कम ईवी की बिक्री थी, 3000। वही पिछले साल करीब 25 लाख ईवी भारत में बिकी हैं। यानी ईवी रिवॉल्यूशन के इस अवसर को भारत पूरी ताकत से अपना रहा है और इसे पर्यावरण की भी मदद हो रही है। हमारे हाईवेज और एक्सप्रेसवेज पर फास्ट ट्रैक की आधुनिक व्यवस्था से भी टोल बूथ पर वेटिंग कम हुआ है। इससे टोल बूथ पर जो फ्यूल वेस्ट होता है, वो बंद हुआ है।

2014 तक हमारे देश के पांच शहर में करीब 250 किलोमीटर का मेट्रो नेटवर्क था। यह भी मेरे वकील मित्र याद रखें। 2014 के पहले सिर्फ पांच शहरों में 250 किलोमीटर से कम, आज देश के 20 से ज्यादा शहरों में मेट्रो चल रही है और भारत दुनिया के उन देशों में शामिल हो गया है जिनके पास 1000 किलोमीटर से ज्यादा का मेट्रो नेटवर्क है।

रेलवेज का लगभग 100% शत प्रतिशत इलेक्ट्रिफिकेशन होने से भी करोड़ों करोड़ लीटर डीजल जलने से बचा है। पर्यावरण की रक्षा हुई है। इसी महीने कुछ दिन पहले करीब 3000 किलोमीटर लंबे डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का लोकार्पण किया गया है। इस पर चलने वाली हर ट्रेन एक बार में सैकड़ों ट्रक का लोड लेकर एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंच रही है। डबल स्टैक कंटेनर मालगाड़ी का संचालन अपने आप में ऐतिहासिक है। आप कल्पना कर सकते हैं कि इससे कितने बड़े लेवल पर पर्यावरण की भी मदद होती है।

आज करोड़ों लोगों की भागीदारी से भारत में जल संरक्षण पर भी अभूतपूर्व काम हो रहा है। मुझे खुशी है कि देश में 70,000 से ज्यादा अमृत सरोवर का निर्माण हुआ है। ‘कैच द रेन’ अभियान के तहत देश में करीब डेढ़ करोड़ वाटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर्स बने हैं। जिसमें बारिश का पानी संरक्षित हो रहा है। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के जरिए आज 2 करोड़ से ज्यादा किसान सिंचाई की आधुनिक सुविधाओं से जुड़े हैं। ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ जैसे इनिशिएटिव से भी पानी की बचत हो रही है। ‘श्री अन्न’ यानी मिलेट्स, यह भी एक बहुत बड़ा सफल उदाहरण है। भारत मिलेट्स श्री अन्न की पैदावार को बढ़ावा दे रहा है। जो पानी की खपत कम करते हैं। बीते वर्षों में देश में मिलेट्स का उत्पादन भी बढ़ा है और निर्यात भी बढ़कर करीब डेढ़ लाख टन हो गया है। इससे किसानों के लिए नए मौके तो बन ही रहे हैं, पानी की भी बचत हो रही है। और इसी मॉडल के कारण दुनिया भी हमारे साथ जुड़ रही है। भारत के प्रयासों के कारण 2023 को ‘इंटरनेशनल ईयर ऑफ मिलेट्स’ के रूप में सेलिब्रेट किया गया है।