हरियाणा चुनाव: इनेलो नेता संपत सिंह का भाजपा के ‘सेवा संकल्प अभियान’ पर तीखा प्रहार, लगाया राज्य तंत्र के दुरुपयोग का गंभीर आरोप

सरिता त्रिपाठी
चंडीगढ़ (हरियाणा)
भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था में जब भी चुनाव निकट आते हैं, तो राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का एक अत्यंत तीव्र और आक्रामक दौर आरंभ हो जाता है। हरियाणा राज्य, जो कि अपनी मुखर और जमीनी राजनीति के लिए पूरे देश में विख्यात है, वहां आगामी विधानसभा चुनावों से पूर्व राजनीतिक पारा अपने चरम पर पहुंच गया है। सत्ताधारी दल और मुख्य विपक्षी दलों के बीच एक वैचारिक और प्रशासनिक युद्ध छिड़ गया है। इसी कड़ी में, राज्य के एक अत्यंत वरिष्ठ और अनुभवी राजनेता ने सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की नीतियों और कार्यप्रणाली पर एक बहुत बड़ा और गंभीर हमला बोला है। प्राप्त रिपोर्टों के अनुसार, इंडियन नेशनल लोक दल (इनेलो) के नेता संपत सिंह ने भाजपा के ‘सेवा संकल्प अभियान’ पर तीखा हमला करते हुए राज्य तंत्र के घोर दुरुपयोग का आरोप लगाया है।
यह राजनीतिक विवाद मुख्य रूप से सरकार द्वारा प्रायोजित और संचालित किए जा रहे एक बड़े अभियान को लेकर उत्पन्न हुआ है, जिसे भाजपा ने ‘सेवा संकल्प अभियान’ का नाम दिया है। इक्कीस सितंबर, दो हज़ार छब्बीस को प्रकाशित इस विस्तृत रिपोर्ट में इनेलो के इस कड़े रुख का विस्तार से वर्णन किया गया है। इस संपूर्ण विवाद के केंद्र में जो राजनेता हैं, वे राज्य की राजनीति का एक जाना-माना और प्रभावशाली चेहरा हैं। संलग्न तस्वीर में वरिष्ठ इंडियन नेशनल लोक दल के नेता और हरियाणा के पूर्व वित्त मंत्री संपत सिंह को गंभीरता से मीडिया या जनसभा को संबोधित करते हुए देखा जा सकता है। एक पूर्व वित्त मंत्री के रूप में उनके बयानों को राज्य की जनता और राजनीतिक विश्लेषक अत्यंत गंभीरता से लेते हैं, क्योंकि उन्हें सरकारी खजाने और प्रशासनिक मशीनरी के कामकाज का बहुत गहरा ज्ञान है।
संपत सिंह ने अपने अत्यंत तीखे और बेबाक वक्तव्य में सरकार के इस नए अभियान की मंशा और इसके क्रियान्वयन के तरीके पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनका सबसे बड़ा और चिंताजनक आरोप यह है कि इस अभियान में सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को अनिवार्य रूप से शामिल होने के लिए बाध्य किया जा रहा है, जो कि लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के बिल्कुल विपरीत है। संपत सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह मजबूरन भागीदारी केवल एक प्रशासनिक असुविधा मात्र नहीं थी; बल्कि यह एक गहरे नैतिक और वित्तीय भ्रष्टाचार को दर्शाती है।
उनका यह कथन अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि जब भी कोई सत्तारूढ़ दल अपनी राजनीतिक छवि चमकाने या चुनाव प्रचार के लिए सरकारी कर्मचारियों, सार्वजनिक धन और राज्य की प्रशासनिक मशीनरी (संसाधनों) का उपयोग करता है, तो यह सीधे तौर पर एक ‘वित्तीय और नैतिक भ्रष्टाचार’ की श्रेणी में आता है। एक निष्पक्ष लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रशासन को हमेशा राजनीतिक कार्यक्रमों से दूरी बनाए रखनी चाहिए। विपक्ष का यह दृढ़ मानना है कि इस प्रकार के अभियानों के नाम पर जनता के कर (टैक्स) के पैसों का दुरुपयोग किया जा रहा है और नौकरशाही पर अनुचित दबाव डालकर उन्हें एक विशेष राजनीतिक दल के एजेंडे (उद्देश्य) को पूरा करने के लिए विवश किया जा रहा है।
हरियाणा में जैसे-जैसे मतदान की तिथि निकट आ रही है, वैसे-वैसे इस प्रकार के राजनीतिक विवाद और भी अधिक तीव्र होते जा रहे हैं। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के माध्यम से जहां एक ओर सत्ताधारी दल मतदाताओं तक अपनी उपलब्धियां पहुंचाने और उन्हें लुभाने का सघन प्रयास कर रहा है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष इसे सत्ता का घोर दुरुपयोग साबित कर जनता के बीच सत्ता विरोधी लहर पैदा करने का पूरा प्रयास कर रहा है। इनेलो नेता संपत सिंह के इस कड़े प्रहार ने निर्वाचन आयोग के लिए भी यह एक विचारणीय प्रश्न छोड़ दिया है कि चुनाव से ठीक पूर्व सरकारी विज्ञापनों और राज्य-प्रायोजित अभियानों की सीमाएं किस प्रकार से तय की जानी चाहिए ताकि सभी राजनीतिक दलों को एक समान अवसर प्राप्त हो सके।