‘पड़ोसी प्रथम’ नीति के अंतर्गत भारत ने प्राकृतिक आपदा से जूझ रहे नेपाल को भेजी राहत सामग्री की एक और बड़ी खेप
भारतीय वायुसेना के सी-एक सौ तीस (C-130) विमान से काठमांडू भेजे गए ग्यारह टन चिकित्सा और आवश्यक उपकरण; मानवीय सहायता अभियान निरंतर जारी
विवेक ओझा
नई दिल्ली
भारत ने हमेशा से अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में मानवीय मूल्यों और अपनी अत्यंत प्रसिद्ध ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। जब भी दक्षिण एशिया या विश्व के किसी भी अन्य हिस्से में कोई प्राकृतिक आपदा या मानवीय संकट उत्पन्न होता है, तो भारत सबसे पहले एक संकटमोचक और ‘प्रथम उत्तरदाता’ के रूप में मदद का हाथ बढ़ाता है। हमारे सबसे घनिष्ठ और ऐतिहासिक पड़ोसी राष्ट्र नेपाल में हाल ही में आई भयंकर प्राकृतिक आपदा के पश्चात, भारत ने एक बार फिर अपनी प्रतिबद्धता और अटूट मित्रता को सिद्ध किया है। प्राप्त आधिकारिक कूटनीतिक सूचनाओं के अनुसार, भारत ने नेपाल को राहत सामग्री की एक नई खेप भेजी है। यह कदम दोनों देशों के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक और कूटनीतिक संबंधों को और अधिक प्रगाढ़ बनाने की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रयास है।
इस बड़े और जटिल राहत अभियान का संचालन भारत की रक्षा सेनाओं और कूटनीतिक तंत्र द्वारा संयुक्त रूप से अत्यंत कुशलतापूर्वक किया जा रहा है। इस संबंध में जानकारी देते हुए एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि राहत सामग्री की यह नई खेप, जिसे भारत के मानवीय सहायता और आपदा राहत (एचएडीआर) उपायों के एक हिस्से के रूप में भेजा गया है, भारतीय वायुसेना के सी-एक सौ तीस (C-130) विमान से रवाना की गई है। भारतीय वायुसेना का यह शक्तिशाली परिवहन विमान कठिन से कठिन परिस्थितियों और दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में भी बड़ी मात्रा में रसद और राहत सामग्री पहुंचाने के लिए पूरे विश्व में विख्यात है।
इस निरंतर जारी राहत अभियान की विशालता और गंभीरता का अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि यह कोई पहली खेप नहीं है, बल्कि इससे पूर्व भी कई उड़ानें संचालित की जा चुकी हैं। रिपोर्ट के अनुसार, शनिवार (उन्नीस सितंबर, दो हज़ार छब्बीस) को नई दिल्ली से भारतीय नौवां विमान, सी-एक सौ तीस (C-130), नेपाल के लिए अन्य ग्यारह टन राहत सामग्री लेकर रवाना हुआ। नौवें विमान का नेपाल की राजधानी काठमांडू जाना यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि वहां आपदा का स्तर कितना विनाशकारी रहा होगा और भारत अपनी ओर से सहायता प्रदान करने में किसी भी प्रकार की कोई कमी नहीं छोड़ रहा है। अधिकारियों ने भी इस बात की पुष्टि की है कि यह विमान काठमांडू के लिए भेजा गया है।
इस ग्यारह टन के भारी-भरकम और जीवन-रक्षक कार्गो (माल) में उन सभी अत्यंत आवश्यक वस्तुओं को शामिल किया गया है, जिनकी आपदा प्रभावित क्षेत्रों में सबसे अधिक और तत्काल आवश्यकता होती है। इस राहत सामग्री में जीवन रक्षक दवाएं (चिकित्सा सामग्री), फोरेंसिक (न्यायालिक) सामग्रियां, आश्रय के लिए तंबू, स्वच्छता किट (हाइजीन किट), सोने के लिए शयन-थैलियां (स्लीपिंग बैग) और कई अन्य आवश्यक सामग्रियां शामिल हैं। विशेष रूप से फोरेंसिक सामग्री और स्वच्छता किट का भेजा जाना यह इंगित करता है कि आपदा के बाद महामारी फैलने से रोकने और मृतकों की शिनाख्त जैसी जटिल प्रक्रियाओं में भी भारत नेपाल की प्रशासन व्यवस्था की पूर्ण तकनीकी सहायता कर रहा है।
उन्नीस सितंबर, दो हज़ार छब्बीस को पीटीआई द्वारा प्रकाशित एक दृश्य में, एक विशाल सैन्य परिवहन विमान को हवाई अड्डे के रनवे पर खड़ा देखा जा सकता है, जिसके ठीक सामने राहत सामग्री से लदे हुए बड़े-बड़े पैलेट (प्लेटफॉर्म) विमान में लोड होने के लिए पूरी तरह से तैयार रखे गए हैं। यह तस्वीर संकट के समय में भारतीय कूटनीति की शक्ति और उसके मानवीय दृष्टिकोण का एक अत्यंत जीवंत और गौरवान्वित करने वाला प्रमाण है। भूकंप, बाढ़ या भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं में भारत द्वारा दी जाने वाली यह त्वरित और बिना किसी शर्त के सहायता, ‘वसुधैव कुटुंबकम’ (संपूर्ण विश्व एक परिवार है) के हमारे महान और प्राचीन दर्शन को वास्तविक रूप में चरितार्थ करती है।