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अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस: संवाद और सहयोग से ही मजबूत होगी वैश्विक शांति

नई दिल्ली ( अभिषेक सिंह ) : दुनिया में शांति, अहिंसा और आपसी सहयोग के महत्व को रेखांकित करने के लिए हर साल 21 सितंबर को अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस (International Day of Peace) मनाया जाता है। इसे विश्व शांति दिवस के नाम से भी जाना जाता है। यह दिन वैश्विक स्तर पर संघर्षों के शांतिपूर्ण समाधान और शांति के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता को दोहराने का अवसर देता है। संयुक्त राष्ट्र ने 1981 में इस दिवस की स्थापना की थी और 2001 में 21 सितंबर को इसे स्थायी रूप से अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस के रूप में निर्धारित किया। आज जब दुनिया के कई हिस्से युद्ध, हिंसा, विस्थापन, मानवीय संकट और बढ़ते तनाव से जूझ रहे हैं, ऐसे समय में शांति का महत्व केवल युद्ध की अनुपस्थिति तक सीमित नहीं रह जाता, बल्कि न्याय, संवाद, मानवाधिकार, सामाजिक समावेशन और टिकाऊ विकास से भी गहराई से जुड़ जाता है।

अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस केवल एक प्रतीकात्मक अवसर नहीं है, बल्कि यह याद दिलाता है कि शांति की स्थापना लगातार चलने वाली प्रक्रिया है। सरकारों, अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं, नागरिक समाज, शिक्षण संस्थानों, मीडिया और आम नागरिकों की इसमें अपनी-अपनी भूमिका है। मतभेद लोकतांत्रिक और अंतर्राष्ट्रीय जीवन का हिस्सा हो सकते हैं, लेकिन उनका समाधान हिंसा के बजाय संवाद और संस्थागत प्रक्रियाओं के माध्यम से तलाशना स्थायी शांति की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। 21 सितंबर का दिन इसी विचार को मजबूत करता है कि शांति केवल हथियारों की खामोशी नहीं, बल्कि ऐसा वातावरण है जहां मानव गरिमा, न्याय, सहयोग और सह-अस्तित्व को प्राथमिकता मिलती है।

आज दुनिया एक-दूसरे से पहले की तुलना में कहीं अधिक जुड़ी हुई है। एक क्षेत्र में पैदा हुआ संघर्ष ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा, व्यापार, आपूर्ति श्रृंखला और वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है। जलवायु परिवर्तन, साइबर सुरक्षा, आतंकवाद, संगठित अपराध और संसाधनों की कमी जैसी चुनौतियां भी राष्ट्रीय सीमाओं से आगे जाती हैं। ऐसे में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और बहुपक्षीय संस्थाओं की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। किसी एक देश की सुरक्षा को बाकी दुनिया की सुरक्षा से अलग करके देखना लगातार कठिन होता जा रहा है।

स्थायी शांति के लिए आर्थिक और सामाजिक विकास भी जरूरी है। संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों में शांति, न्याय और मजबूत संस्थानों को विशेष स्थान दिया गया है। जब लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं तक समान अवसर मिलता है, तो सामाजिक स्थिरता को मजबूत आधार मिलता है। इसी तरह पारदर्शी और जवाबदेह संस्थाएं नागरिकों का भरोसा बढ़ाती हैं। शांति इसलिए केवल विदेश नीति या सुरक्षा से जुड़ा विषय नहीं है, बल्कि विकास नीति का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है।

भारत की सभ्यता और सार्वजनिक जीवन में शांति, सह-अस्तित्व और संवाद की अवधारणाओं की लंबी परंपरा रही है। महात्मा गांधी ने अहिंसा को सामाजिक और राजनीतिक परिवर्तन का महत्वपूर्ण माध्यम बनाया। भारत ने अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भी संवाद, शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व और बहुपक्षीय सहयोग के महत्व को रेखांकित किया है। बदलती वैश्विक परिस्थितियों में भारत की विदेश नीति में भी कूटनीतिक संवाद, विकास साझेदारी और वैश्विक दक्षिण के देशों के साथ सहयोग महत्वपूर्ण विषय रहे हैं।