संयुक्त राष्ट्र में भारत का महा-धमाका! चार बड़े यूरोपीय देशों ने किया स्थायी सीट का खुला समर्थन, विदेश मंत्री जयशंकर बोले- ‘यह एक ऐतिहासिक जीत’

विवेक ओझा
नई दिल्ली: वैश्विक कूटनीति के सबसे बड़े मंच यानी संयुक्त राष्ट्र से भारत के लिए एक बेहद शानदार और महा-विस्फोटक खबर सामने आई है। विश्व पटल पर भारत की बढ़ती धाक और सशक्त विदेश नीति की आंधी के आगे अब यूरोप के बड़े-बड़े देश भी पूरी तरह से नतमस्तक हो गए हैं। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता और ‘वीटो पावर’ (निषेधाधिकार) की बरसों पुरानी मजबूत दावेदारी को अब चार प्रमुख यूरोपीय देशों ने अपना खुला और बेहद अटूट समर्थन दे दिया है। भारत के विदेश मंत्री सुब्रह्मण्यम जयशंकर ने यूरोपीय देशों के इस साहसिक कदम का जोरदार स्वागत करते हुए इसे भारत की एक ‘ऐतिहासिक कूटनीतिक जीत’ करार दिया है। इस महा-समर्थन ने भारत के विरोधियों, खासकर चीन और पाकिस्तान के खेमे में भारी खलबली मचा दी है।
पश्चिमी देशों पर भारी पड़ा भारत का कूटनीतिक दबाव
पूरी दुनिया जानती है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का मौजूदा ढांचा पूरी तरह से पुराना, जर्जर और भेदभावपूर्ण हो चुका है। आज की दुनिया वह नहीं है जो दूसरे विश्व युद्ध के बाद हुआ करती थी। भारत लंबे समय से इस वैश्विक संस्था में व्यापक सुधार और अपनी स्थायी सीट की जोरदार वकालत करता आ रहा है। भारत न केवल दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, बल्कि संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों में सबसे ज्यादा सैन्य योगदान देने वाले राष्ट्रों में भी हमेशा से अग्रणी रहा है। विदेश मंत्री जयशंकर ने अपने बेहद सख्त, तार्किक और बेबाक अंदाज में कई अंतरराष्ट्रीय मंचों से पश्चिमी देशों को उनकी दोहरी नीतियों का आईना दिखाया है। उसी भारी कूटनीतिक दबाव, भारत के मजबूत नेतृत्व और असीम आर्थिक व सैन्य ताकत का ही यह सीधा नतीजा है कि अब यूरोप के चार शक्तिशाली और अहम राष्ट्र भी भारत के पक्ष में खुलकर मैदान में उतर आए हैं। इन यूरोपीय देशों ने एक सुर में यह साफ कर दिया है कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र, विश्व की शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं में शुमार और विशाल आबादी वाले महान देश यानी भारत को अब सुरक्षा परिषद की स्थायी सीट के जायज हक से ज्यादा दिन तक दूर नहीं रखा जा सकता।
जयशंकर की दो टूक: ‘दुनिया का भरोसा जीत रहा नया भारत’
इस महा-समर्थन पर अपनी मजबूत प्रतिक्रिया देते हुए विदेश मंत्री ने इसे एक बेहद ऐतिहासिक, गौरवशाली और निर्णायक क्षण बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन चार यूरोपीय देशों का यह समर्थन सिर्फ एक औपचारिक कूटनीतिक बयान नहीं है, बल्कि यह पूरी दुनिया का भारत के मजबूत नेतृत्व के प्रति बढ़ते अटूट भरोसे का सबसे बड़ा और जीता-जागता प्रमाण है। जैसे-जैसे भारत वैश्विक महाशक्ति बनने की राह पर प्रचंड गति से आगे बढ़ रहा है, दुनिया के तमाम विकसित देश भी यह भली-भांति समझ चुके हैं कि वैश्विक शांति, आतंकवाद के पूर्ण खात्मे, जलवायु परिवर्तन जैसी भयंकर चुनौतियों से निपटने और वैश्विक अर्थव्यवस्था के समग्र विकास में भारत की नेतृत्व क्षमता का आज कोई सानी नहीं है। आज पूरी दुनिया हर बड़े संकट के समय भारत की तरफ भारी उम्मीद भरी नजरों से देखती है।
चीन और पाकिस्तान के उड़े होश
दूसरी तरफ, भारत को मिल रहे इस अभूतपूर्व और शक्तिशाली वैश्विक समर्थन ने पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान और उसके आका चीन की रातों की नींद पूरी तरह से उड़ा दी है। चीन हमेशा से अपनी शक्ति का घमंड दिखाते हुए संयुक्त राष्ट्र में भारत की राह में रोड़े अटकाने की नापाक कोशिश करता रहा है। लेकिन यूरोप के इस कड़े और एकजुट रुख ने चीन के तमाम षड्यंत्रों और मंसूबों पर सीधा पानी फेर दिया है। अब चीन भी यह गहराई से महसूस कर रहा है कि अंतरराष्ट्रीय पटल पर भारत को अलग-थलग करना अब किसी के भी बस की बात नहीं रह गई है।
संयुक्त राष्ट्र में स्थायी सीट का मतलब सिर्फ एक कूटनीतिक कुर्सी हासिल करना नहीं है, बल्कि यह दुनिया के उन चुनिंदा शक्तिशाली और वर्चस्व वाले देशों की कतार में शामिल होना है, जिनके पास दुनिया का हर बड़ा और अहम फैसला पलटने की असीमित शक्ति होती है। चार यूरोपीय देशों का यह खुला और ऐतिहासिक समर्थन इस बात का सबसे बड़ा शंखनाद है कि अब वह दिन बिल्कुल भी दूर नहीं जब संयुक्त राष्ट्र की सबसे शक्तिशाली मेज पर भारत का तिरंगा अपनी स्थायी सदस्यता के साथ पूरे गर्व और शान से लहराएगा। यह नए और आत्मनिर्भर भारत की ऐसी कूटनीतिक आंधी है, जिसे अब दुनिया की कोई भी विरोधी ताकत रोक नहीं पाएगी।