लाल गढ़ में एबीवीपी की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’! 40 साल बाद केरलम में ढहा लेफ्ट का सबसे मजबूत किला, छात्र संघ चुनाव में लहराया भगवा

राघवेंद्र प्रताप सिंह
तिरुवनंतपुरम/केरलम: देश की सियासत में ‘लाल सलाम’ और वामपंथी (लेफ्ट) विचारधारा के सबसे बड़े और अजेय गढ़ माने जाने वाले केरलम से एक बेहद चौंकाने वाली और ऐतिहासिक खबर सामने आई है। राष्ट्रवादी छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने लेफ्ट के सबसे मजबूत और अभेद्य किले में ऐसी भयंकर सेंध लगाई है, जिसकी गूंज आज पूरे देश की राजनीति में सुनाई दे रही है। पूरे 40 वर्षों के लंबे और कड़े वामपंथी वर्चस्व को जड़ से उखाड़ फेंकते हुए, एबीवीपी ने केरलम के एक प्रतिष्ठित कॉलेज के छात्र संघ चुनाव में लेफ्ट समर्थित संगठन को बुरी तरह धूल चटाकर एकतरफा और प्रचंड जीत दर्ज की है।
40 साल का वामपंथी तिलिस्म हुआ चकनाचूर: क्या है इस जीत के मायने?
केरलम के कॉलेज परिसरों में हमेशा से लेफ्ट संगठनों का एकछत्र राज और भारी खौफ माना जाता रहा है। इस ऐतिहासिक जीत की सबसे बड़ी बातें:
- ‘लाल’ आंधी के आगे ‘भगवा’ का शंखनाद: पिछले 4 दशकों (40 वर्षों) से जिस कॉलेज परिसर में वामपंथी विचारधारा के अलावा किसी और संगठन को पैर रखने तक की जगह नहीं मिलती थी, वहां आज एबीवीपी के कार्यकर्ताओं ने भारी बहुमत से अपना परचम लहरा दिया है।
- लेफ्ट के खौफ का अंत: यह प्रचंड जीत सिर्फ एक सामान्य चुनावी आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि अब केरलम का युवा लेफ्ट की पुरानी और हिंसक राजनीति से पूरी तरह से ऊब चुका है और बदलाव चाहता है।
- राष्ट्रवादी विचारधारा की अजेय छलांग: एबीवीपी की यह जीत इस बात पर पक्की मुहर लगाती है कि केरलम के युवाओं और छात्रों के बीच अब राष्ट्रवाद और विकास की राजनीति बहुत तेजी से अपनी गहरी जड़ें जमा रही है।
लेफ्ट खेमे में मची भारी खलबली, वामपंथी नेताओं की उड़ी नींद
छात्र संघ चुनाव को हमेशा से राज्य की मुख्यधारा की राजनीति का ‘सेमीफाइनल’ या दिशा-सूचक माना जाता है। अपने ही घर में एबीवीपी की इस सर्जिकल स्ट्राइक ने केरलम की सत्ताधारी वामपंथी सरकार और उनके बड़े नेताओं की रातों की नींद पूरी तरह से उड़ा दी है। लेफ्ट के रणनीतिकार अब इस बात को लेकर भारी दहशत में हैं कि अगर युवाओं का यह ‘भगवा झुकाव’ विधानसभा या लोकसभा स्तर पर इसी तरह बरकरार रहा, तो केरलम से वामपंथ का बचा-खुचा किला भी पूरी तरह से ढह जाएगा।
पूरे 40 साल बाद मिली यह ऐतिहासिक जीत सिर्फ एक कॉलेज परिसर तक सीमित रहने वाली नहीं है। यह केरलम की राजनीति में एक बहुत बड़ी ‘सियासी सुनामी’ आने का स्पष्ट संकेत है। एबीवीपी की इस बंपर और खौफनाक कामयाबी ने पूरे राज्य के राष्ट्रवादी कार्यकर्ताओं के भीतर एक नया जोश और खौलती हुई ऊर्जा भर दी है। वामपंथियों के लिए अब यह अस्तित्व बचाने की सबसे कठिन लड़ाई बन गई है।