पाकिस्तान को सीमा पार आतंकवाद के विरुद्ध करनी होगी कठोरतम कार्रवाई: भारतीय विदेश मंत्रालय का सख्त और अंतिम संदेश

विश्व का विश्वास अर्जित करने से पूर्व इस्लामाबाद को आतंकवाद का मार्ग छोड़ना होगा; पहलगाम हमले के पश्चात भारत का अत्यंत दृढ़ और अडिग रुख
विवेक ओझा/नई दिल्ली:
भारत और पाकिस्तान के मध्य कूटनीतिक और सामरिक संबंधों में आतंकवाद हमेशा से सबसे बड़ा और सबसे जटिल अवरोध रहा है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर और सभी द्विपक्षीय वार्ताओं में यह निरंतर स्पष्ट किया है कि आतंकवाद और शांतिपूर्ण बातचीत एक साथ किसी भी परिस्थिति में नहीं चल सकते। इसी दिशा में अपना अत्यंत कड़ा और स्पष्ट रुख दोहराते हुए, भारत के विदेश मंत्रालय ने एक बार फिर से पड़ोसी राष्ट्र को कड़ी चेतावनी जारी की है। आधिकारिक वक्तव्य के अनुसार, विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट रूप से कहा है कि पाकिस्तान को सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए, इससे पहले कि दुनिया यह विश्वास करे कि वह जो कहता है वह करेगा। यह कूटनीतिक संदेश इस बात का प्रबल संकेत है कि भारत अब केवल खोखले वादों या कागजी आश्वासनों से संतुष्ट होने वाला नहीं है।
विगत वर्ष कश्मीर घाटी में हुए एक अत्यंत हृदयविदारक आतंकवादी हमले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था, जिसके बाद से भारत की आतंकवाद के प्रति ‘शून्य सहिष्णुता’ (जीरो टॉलरेंस) की नीति और अधिक कठोर हो गई है। आधिकारिक प्रतिवेदन के अनुसार, पिछले वर्ष हुए पहलगाम हमले के बाद, भारत ने दृढ़ता से यह रुख बनाए रखा है कि इस्लामाबाद को सीमा पार आतंकवाद के लिए अपने समर्थन को विश्वसनीय और अपरिवर्तनीय रूप से त्याग देना चाहिए। ‘विश्वसनीय और अपरिवर्तनीय’ शब्दों का प्रयोग यहां अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसका सीधा और स्पष्ट अर्थ यह है कि पाकिस्तान को आतंकवादी ढांचों को केवल दिखावे के लिए बंद करने के बजाय, उन्हें समूल नष्ट करना होगा ताकि वे भविष्य में पुनः पनप न सकें।
यह कड़ा कूटनीतिक संदेश देश की राजधानी में आयोजित एक महत्वपूर्ण और नियमित प्रेस वार्ता के दौरान दिया गया। प्राप्त जानकारी और संलग्न चित्र के अनुसार, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नई दिल्ली में एक द्विसाप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग (प्रेस वार्ता) को संबोधित किया। इस प्रेस वार्ता के दौरान, प्रवक्ता ने देश की विदेश नीति और पड़ोसी देशों के साथ संबंधों पर व्यापक और गहन चर्चा की। यह महत्वपूर्ण कूटनीतिक वार्ता और उस पर आधारित यह समाचार रिपोर्ट तेईस सितंबर, दो हज़ार छब्बीस को प्रकाशित की गई है। इस दौरान उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि पाकिस्तान का दोहरा रवैया अब विश्व समुदाय के सामने पूरी तरह से उजागर हो चुका है।
इस कूटनीतिक संदेश का समय भी अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर आतंकवाद के वित्तपोषण और उसे पनाह देने वाले राष्ट्रों के विरुद्ध कड़ी निगरानी रखी जा रही है। भारत ने यह भली-भांति स्पष्ट कर दिया है कि जब तक पाकिस्तान अपने क्षेत्र में सक्रिय आतंकी समूहों (जिन्हें वह अक्सर राज्य की नीति के एक साधन के रूप में उपयोग करता है) के विरुद्ध पारदर्शी और सत्यापन योग्य कार्रवाई नहीं करता, तब तक उसके साथ किसी भी प्रकार की सार्थक और शांतिपूर्ण वार्ता संभव नहीं है।
पाकिस्तान द्वारा अंतरराष्ट्रीय समुदाय के समक्ष आतंकवाद से लड़ने के जो भी बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, वे तब तक पूर्णतः महत्वहीन हैं जब तक कि ज़मीनी स्तर पर सीमा पार घुसपैठ और हिंसक घटनाओं पर पूर्ण विराम न लग जाए। विदेश मंत्रालय का यह ताज़ा बयान देश की राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताओं को सर्वोच्च प्राथमिकता देने और आतंकवाद के प्रायोजकों को विश्व पटल पर बेनकाब करने की भारत की निरंतर और अडिग कूटनीतिक प्रतिबद्धता को ही दर्शाता है। यह भारत की उस स्पष्ट नीति का हिस्सा है जिसके तहत राष्ट्रीय सुरक्षा से किसी भी प्रकार का कोई समझौता नहीं किया जा सकता।