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दक्षिण दिल्ली में सड़क चौड़ीकरण अभियान के अंतर्गत बीस ‘अवैध’ मकानों और कृषि गृहों को किया गया ध्वस्त

जिलाधिकारी (दक्षिण) के आदेश पर हुई यह बड़ी दंडात्मक कार्रवाई; छतरपुर क्षेत्र में भारी पुलिस बल की उपस्थिति में चले बुलडोज़र

अभिषेक सिंह/नई दिल्ली:

भारत की राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में बढ़ती जनसंख्या, भारी यातायात और अनियोजित शहरीकरण के कारण नागरिक बुनियादी ढांचे पर अत्यधिक दबाव पड़ रहा है। शहर को यातायात जाम से मुक्त करने और सड़कों के विस्तार के लिए प्रशासन द्वारा समय-समय पर अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाए जाते हैं। इसी कड़ी में, दक्षिण दिल्ली के एक प्रमुख और अत्यंत व्यस्त इलाके में एक बहुत बड़ा और सख्त अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाया गया है, जिसने स्थानीय निवासियों के बीच भारी हलचल पैदा कर दी है। आधिकारिक सूचनाओं और समाचार प्रतिवेदनों के अनुसार, दक्षिण दिल्ली में सड़क-चौड़ीकरण अभियान के हिस्से के रूप में लगभग बीस ‘अनधिकृत’ घरों और फार्महाउसों (कृषि गृहों) को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया गया है।

यह भारी दंडात्मक कार्रवाई पूरी तरह से नियोजित और प्रशासनिक आदेशों के तहत की गई है। राजधानी में अवैध निर्माण एक अत्यंत पुरानी और जटिल समस्या रही है, जहां नियमों की अनदेखी करके सरकारी और सार्वजनिक भूमि पर बड़े-बड़े निर्माण कर लिए जाते हैं। अधिकारियों के अनुसार, यह बड़ी कार्रवाई जिलाधिकारी (दक्षिण) के आदेश पर की गई थी। जिलाधिकारी के आदेश के पश्चात, क्षेत्र में कई “अनधिकृत” संरचनाओं को ध्वस्त करने के लिए भारी-भरकम बुलडोज़र तैनात किए गए थे, जिनमें लगभग बीस घर और कुछ फार्महाउस भी शामिल थे। दिल्ली के इस क्षेत्र में फार्महाउसों का निर्माण अक्सर धनाढ्य वर्ग द्वारा किया जाता है, अतः प्रशासन की इस कार्रवाई को बिना किसी भेदभाव के कानून लागू करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

इस अतिक्रमण विरोधी अभियान की कुछ तस्वीरें भी सामने आई हैं जो इस कार्रवाई की विशालता को दर्शाती हैं। इक्कीस सितंबर, दो हज़ार छब्बीस को एएनआई द्वारा प्रकाशित एक तस्वीर में, स्थानीय अधिकारियों को नई दिल्ली के छतरपुर में अवैध रूप से निर्मित दुकानों, घरों और फार्महाउसों के खिलाफ विध्वंस कार्य करते हुए स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। चित्र में बुलडोज़रों द्वारा मलबे को हटाते हुए और भारी पुलिस बल तथा सुरक्षा कर्मियों को कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैनात देखा जा सकता है। किसी भी प्रकार के विरोध प्रदर्शन या संभावित हिंसा से निपटने के लिए भारी संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती की गई थी।

सड़क चौड़ीकरण की यह परियोजना स्थानीय निवासियों के लिए यातायात की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। छतरपुर का क्षेत्र अपने संकरे मार्गों और भारी यातायात जाम के लिए कुख्यात रहा है। हालांकि, जिन लोगों के घर इस अभियान में टूटे हैं, उनके लिए यह एक बहुत बड़ा मानवीय और आर्थिक संकट है। कई बार लोगों का आरोप होता है कि उन्हें उचित पूर्व सूचना नहीं दी गई या उनके पुनर्वास की कोई व्यवस्था नहीं की गई।

प्रशासन का यह स्पष्ट तर्क है कि यह सभी निर्माण पूरी तरह से अवैध थे और सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण करके बनाए गए थे, जिसके कारण आम जनता को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा था। यह अभियान इस बात का भी कड़ा संदेश है कि शहर में अनियोजित और अवैध निर्माण को अब किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हालांकि, सरकार को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि इस प्रकार की कार्रवाइयों से पूर्व एक पारदर्शी वैधानिक प्रक्रिया का पालन हो और गरीबों के पुनर्वास के लिए उचित नीतियां भी लागू की जाएं।