रामलला के खजाने पर डाका डालने वाला मास्टरमाइंड अनुकल्प मिश्र गिरफ्तार, 3300 गुप्त संदेशों में रची गई थी चोरी की पूरी ‘पटकथा’
अभिषेक सिंह
अयोध्या: करोड़ों राम भक्तों की आस्था के सबसे बड़े केंद्र, अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावे (दान) की चोरी को लेकर एक ऐसा खौफनाक और चौंकाने वाला पर्दाफाश हुआ है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों के भी होश उड़ा दिए हैं। त्रिस्तरीय और अभेद्य सुरक्षा घेरे को धता बताते हुए रामलला के खजाने में सेंधमारी करने वाले गिरोह का असली सरगना बेनकाब हो गया है। पुलिस की सघन जांच में यह साफ हो गया है कि इस पूरी महा-चोरी का मास्टरमाइंड अनुकल्प मिश्र है, जिसने एक बेहद शातिर और फिल्मी अंदाज में इस घिनौनी साजिश को अंजाम दिया।
क्राइम डायरी: 3300 संदेशों का वो ‘डिजिटल जाल’
यह कोई अचानक की गई चोरी नहीं थी, बल्कि महीनों की गहरी साजिश का नतीजा थी। जांच एजेंसियों ने जब अनुकल्प और उसके गुर्गों के डिजिटल रिकॉर्ड खंगाले, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई।
पुलिस के हाथ वो सबसे बड़ा सबूत लग गया है, जिसमें इस पूरी साजिश के राज दफन थे। अनुकल्प और उसके साथियों के बीच कुल 3300 टेक्स्ट संदेशों का आदान-प्रदान हुआ था। इन्हीं संदेशों में मंदिर की सुरक्षा खामियों की रेकी करने, ड्यूटी पर तैनात कर्मियों की आवाजाही का समय नोट करने और दानपात्रों तक पहुंचने का पूरा ‘ब्लूप्रिंट’ तैयार किया गया था। हर एक संदेश कोड वर्ड और भारी गोपनीयता के साथ भेजा गया था, ताकि किसी को जरा भी शक न हो।
कैसे रची गई मंदिर के भीतर सेंधमारी?
मास्टरमाइंड अनुकल्प मिश्र यह भली-भांति जानता था कि राम मंदिर में सीधे तौर पर चोरी करना नामुमकिन है। इसलिए उसने सिस्टम के भीतर मौजूद कुछ कमजोर कड़ियों को अपना हथियार बनाया। साजिशकर्ताओं ने उन खास रास्तों और समय का चुनाव किया, जब दानपात्रों के आसपास सुरक्षा की नजर सबसे कम होती थी। 3300 संदेशों की वह कड़ियां चीख-चीख कर गवाही दे रही हैं कि इस गैंग ने किस तरह पल-पल की जानकारी साझा की और आस्था के पवित्र खजाने पर अपना नापाक हाथ साफ किया।
आगे क्या: पुलिस के रडार पर अब कौन?
राम भक्तों की भावनाओं से खिलवाड़ करने वाले इस सरगना की गिरफ्तारी के बाद अब यूपी पुलिस अपने सबसे कड़े एक्शन मोड में आ गई है। अनुकल्प मिश्र से हो रही कड़ाई से पूछताछ में कई और बड़े सफेदपोश चेहरों से नकाब उठने की पूरी संभावना है।
अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि यह मामला सिर्फ चंद रुपयों की चोरी का नहीं, बल्कि करोड़ों हिंदुओं की आस्था पर चोट करने का है। 3300 संदेशों की डिकोडिंग (गहरी पड़ताल) अभी भी जारी है। पुलिस अब उन सभी मददगारों की गिरेबान तक पहुंचने की तैयारी कर रही है, जिन्होंने पर्दे के पीछे छिपकर अनुकल्प मिश्र को रामलला के खजाने तक पहुंचने का रास्ता दिखाया था। इस पूरे गिरोह पर कानून का ऐसा हथौड़ा चलने वाला है, जो भविष्य के लिए एक कड़ी नजीर बनेगा।