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कूटनीति का बड़ा गठबंधन! भारत-जर्मनी के बीच होने जा रही ‘डिफेंस और ट्रेड डील’, एफटीए पर मुहर लगने की आहट से दुनिया भर के बाजारों में मची खलबली

विवेक ओझा

नई दिल्ली/बर्लिन: वैश्विक कूटनीति और अर्थव्यवस्था के मोर्चे से एक बेहद शक्तिशाली और ऐतिहासिक खबर सामने आ रही है। दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती महाशक्ति भारत और यूरोप के सबसे बड़े आर्थिक इंजन जर्मनी ने अब एक ऐसा फौलादी गठजोड़ तैयार कर लिया है, जो एशिया से लेकर यूरोप तक के वैश्विक समीकरणों को पूरी तरह से पलट कर रख देगा। दोनों देशों के बीच व्यापार और रक्षा सहयोग को ऐसी आसमानी ऊंचाइयों पर ले जाने की तैयारी चल रही है, जिसकी गूंज आने वाले दशकों तक पूरी दुनिया में सुनाई देगी। सबसे बड़ा कूटनीतिक धमाका यह होने वाला है कि दोनों देश जल्द ही ऐतिहासिक ‘मुक्त व्यापार समझौते’ (एफटीए) पर अपने अंतिम हस्ताक्षर कर सकते हैं।

रक्षा मोर्चे पर खतरनाक और अभेद्य तैयारी
भारत और जर्मनी अब सिर्फ व्यापारिक लेनदेन तक सीमित नहीं रहने वाले हैं। दोनों महाशक्तियों का मुख्य फोकस अब हथियारों के संयुक्त निर्माण और रक्षा तकनीक के महा-आदान-प्रदान पर टिक गया है। जर्मनी की अत्याधुनिक तकनीक और भारत की असीम निर्माण क्षमता मिलकर रक्षा क्षेत्र में ऐसा अचूक तंत्र तैयार करने जा रहे हैं, जो सीधे तौर पर चीन जैसे विस्तारवादी देशों के लिए एक खौफनाक और खुली चेतावनी है। भारतीय सेना के आधुनिकीकरण और हथियारों के स्वदेशी निर्माण में जर्मनी अब भारत का सबसे बड़ा और भरोसेमंद रणनीतिक साझीदार बनने की राह पर सरपट दौड़ पड़ा है।

एफटीए का महा-धमाका और यूरोपीय बाजार पर कब्जा
यह सिर्फ एक कागज का समझौता नहीं, बल्कि दोनों देशों के व्यापारियों और युवाओं के लिए कुबेर का खजाना खुलने जैसा है। लंबे समय से बहुप्रतीक्षित ‘मुक्त व्यापार समझौते’ (एफटीए) पर जल्द मुहर लगने की भनक मात्र से वैश्विक बाजारों में भारी हलचल मच गई है। इस ऐतिहासिक समझौते के लागू होते ही दोनों देशों के बीच कर (टैक्स) और निर्यात की बाधाएं पूरी तरह से चकनाचूर हो जाएंगी। इसके लागू होते ही भारत के कपड़े, चमड़े के उत्पाद, आईटी सेवाओं और कृषि वस्तुओं की सीधे तौर पर यूरोप के सबसे अमीर बाजारों में बंपर एंट्री होगी, वहीं जर्मनी की भारी मशीनरी और उच्च तकनीक भारतीय उद्योगों को कई गुना नई रफ्तार देगी।

क्या है इस गठजोड़ का सबसे मारक वैश्विक संदेश?
जर्मनी ने यह बहुत अच्छी तरह से समझ लिया है कि एशिया में अगर किसी देश पर आंख मूंदकर भरोसा किया जा सकता है, तो वह केवल भारत है। चीन की धोखेबाजी से मोहभंग होने के बाद जर्मनी ने अपनी पूरी ताकत भारत के पक्ष में झोंक दी है। रक्षा और व्यापार का यह नया ‘सुपर-हाइवे’ इस बात का सबसे बड़ा और कड़ा सबूत है कि नया भारत अब दुनिया के नियमों के पीछे नहीं चलता, बल्कि दुनिया के ताकतवर देशों को अपने नियमों और शर्तों पर चलने के लिए पूरी तरह से मजबूर कर रहा है।