‘इस महा-बकवास और बेकार सॉफ्टवेयर को तुरंत हटाएं’! चुनाव आयोग के ‘ईसीआईनेट’ ऐप पर शशि थरूर का सबसे तीखा प्रहार, मची भारी खलबली

राघवेन्द्र प्रताप सिंह/नई दिल्ली:
भारत के चुनाव आयोग के नए डिजिटल सिस्टम को लेकर अब देश की राजनीति में एक बहुत बड़ा भूचाल आ गया है। कांग्रेस के दिग्गज नेता और सांसद शशि थरूर ने चुनाव आयोग के सबसे अहम सॉफ्टवेयर ‘ईसीआईनेट’ के खिलाफ अब तक का सबसे आक्रामक और कड़ा मोर्चा खोल दिया है। थरूर ने चुनाव आयोग से दो टूक मांग की है कि इस ‘विनाशकारी और बेकार सॉफ्टवेयर’ को बिना किसी देरी के तुरंत रद्द कर दिया जाए। थरूर के इस महा-हमले ने चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और डिजिटल सिस्टम की उस गंभीर तानाशाही की पोल खोलकर रख दी है, जिसने जिला स्तर के अधिकारियों को भी पूरी तरह से बेबस कर दिया है।
सियासी एक्स-रे 1: क्या है ‘ईसीआईनेट’ का पूरा बवाल और तानाशाही?
चुनाव आयोग ने अपनी सारी डिजिटल प्रक्रियाओं को एक मंच पर लाने के लिए इस केंद्रीकृत सॉफ्टवेयर को लागू किया था। लेकिन अब यही सॉफ्टवेयर लोकतंत्र के लिए एक बड़ा खतरा बताया जा रहा है। विपक्ष का सीधा आरोप है कि दिल्ली में बैठकर संचालित हो रहे इस सॉफ्टवेयर ने जिला और जमीनी स्तर के चुनाव अधिकारियों की सारी वैधानिक शक्तियों को हाईजैक कर लिया है। मशीन की मनमानी इतनी बढ़ गई है कि तकनीकी खामियों के कारण कई राज्यों में स्थानीय अधिकारियों के चाहने और आदेश पारित होने के बावजूद सही मतदाताओं के नाम डिजिटल सूची में जुड़ ही नहीं पा रहे हैं।
सियासी एक्स-रे 2: 97 मतदाताओं का गायब होना और सिस्टम की मनमानी
इस भारी बवाल के पीछे सबसे बड़ा सबूत हाल ही की वह चौंकाने वाली घटना बनी है, जहां इस बेकाबू सॉफ्टवेयर की तानाशाही के कारण 97 पात्र मतदाताओं को उनके वोटिंग अधिकार से वंचित कर दिया गया। राज्य और स्थानीय अधिकारियों के बार-बार गुहार लगाने के बावजूद, दिल्ली में बैठे सिस्टम ने तकनीकी पहुंच (एक्सेस) नहीं दी, जिससे वे नाम मतदाता सूची में जुड़ ही नहीं सके और आम नागरिकों को उनके मूल अधिकार से हाथ धोना पड़ा। थरूर ने इसी तकनीकी तानाशाही की ओर सीधा इशारा करते हुए चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर सबसे गंभीर सवाल दाग दिए हैं।
सियासी एक्स-रे 3: नए नियम और युवा मतदाताओं को रोकने की साजिश?
विपक्ष का एक और सबसे बड़ा और गंभीर आरोप यह है कि ‘ईसीआईनेट’ ऐप कानूनी नियमों से ऊपर जाकर अपनी मनमानी कर रहा है। मतदाता पंजीकरण के लिए जो जानकारी कानूनन वैकल्पिक होनी चाहिए, उसे इस सॉफ्टवेयर ने ऑनलाइन पोर्टल पर अनिवार्य बना दिया है। विपक्षी नेताओं का स्पष्ट मानना है कि बिना सरकार की औपचारिक मंजूरी के सॉफ्टवेयर के जरिए ऐसे मनमाने नियम थोपना, युवा और नए मतदाताओं को प्रताड़ित करने और उनके लिए जानबूझकर बाधाएं खड़ी करने की एक बहुत बड़ी साजिश है।
चुनाव आयोग हमेशा से अपनी बेदाग निष्पक्षता के लिए जाना जाता है, लेकिन ‘ईसीआईनेट’ ऐप पर शशि थरूर का यह तीखा ‘डिजिटल प्रहार’ कोई साधारण राजनीतिक बयान नहीं है। यह भारत की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में तकनीक के मनमाने और गलत इस्तेमाल को लेकर बजने वाली खतरे की सबसे बड़ी घंटी है। अगर चुनाव आयोग ने जल्द ही इस सिस्टम की खामियों को दूर नहीं किया या इसे नहीं हटाया, तो आगामी चुनावों में यह मुद्दा एक बहुत बड़े और हिंसक सियासी महा-संग्राम में तब्दील हो जाएगा।