‘वोट चोरी, कानून चोरी और संस्था चोरी’! राहुल गांधी का पीएम मोदी, अमित शाह और सीईसी पर ‘ट्रिपल अटैक’, चुनाव आयोग के भीतर मची भारी खलबली

अभिषेक सिंह/नई दिल्ली
देश की राजनीति और लोकतंत्र की सबसे बड़ी संस्था ‘चुनाव आयोग’ के इर्द-गिर्द इस वक्त एक ऐसा भयंकर तूफान खड़ा हो गया है, जिसने पूरे देश में हलचल मचा दी है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को एक बेहद आक्रामक प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार पर अब तक का सबसे बड़ा और तीखा ‘ट्रिपल अटैक’ (तिहरा हमला) किया है। चुनाव आयोग के भीतर विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) प्रक्रिया को लेकर मचे अंदरूनी घमासान की रिपोर्ट सामने आने के बाद राहुल गांधी ने दो टूक आरोप लगाया है कि देश में ‘वोट चोरी, कानून चोरी और संस्थाओं की चोरी’ का एक बहुत बड़ा और खतरनाक खेल चल रहा है, जिसके तार सीधे सत्ता के शीर्ष से जुड़े हुए हैं।
‘वोट चोरी’ का मास्टर प्लान और 100 प्रतिशत धांधली का दावा
राहुल गांधी ने सिर्फ आरोप नहीं लगाए, बल्कि चुनाव आयोग की पूरी कार्यप्रणाली को ही कटघरे में खड़ा कर दिया है। उनका सबसे बड़ा और आक्रामक दावा यह है कि भारत के चुनाव, खासकर 2024 के लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव, पूरी तरह से ‘धांधली’ (हेराफेरी) का शिकार हुए हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस बात में अब 99 प्रतिशत नहीं, बल्कि 100 प्रतिशत पक्की सच्चाई है। राहुल ने इसे देश के खिलाफ ‘राजद्रोह’ करार देते हुए कहा कि जब वोट ही चुरा लिया जाए, तो पूरी संवैधानिक व्यवस्था, कानून और संस्थाएं अपने आप ही अवैध और खोखली हो जाती हैं।
एंटी-इंकंबेंसी का गायब होना: मोदी और शाह पर सीधा निशाना
इस प्रेस कॉन्फ्रेंस का सबसे तीखा और विश्लेषणात्मक हिस्सा वह था, जहां राहुल गांधी ने सत्ता विरोधी लहर (एंटी-इंकंबेंसी) के रहस्य पर सवाल उठाए। उन्होंने इंदिरा गांधी का उदाहरण देते हुए कहा कि बांग्लादेश युद्ध जीतने जैसी ऐतिहासिक कामयाबी के बावजूद उनके खिलाफ भी सत्ता विरोधी लहर उठी थी। राहुल ने तल्ख लहजे में पूछा कि आखिर ऐसा क्या जादू है कि यह सत्ता विरोधी लहर बाकी सभी दलों और नेताओं पर तो लागू होती है, लेकिन यह कभी प्रधानमंत्री मोदी, अमित शाह या भाजपा के सामने क्यों नहीं टिकती? उन्होंने हरियाणा, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र का हवाला देते हुए दावा किया कि इन राज्यों में जानबूझकर वोटों को काटकर इस लोकतांत्रिक लहर को कुचला जा रहा है।
सीईसी ज्ञानेश कुमार पर भारी बवाल और अंदरूनी बगावत
इस पूरे विवाद के केंद्र में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार आ गए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए राहुल ने कहा कि चुनाव आयोग के दो अन्य आयुक्तों ने ही ज्ञानेश कुमार के मनमाने फैसलों और ‘एसआईआर’ प्रक्रिया पर कम से कम 14 बार अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई थी। राहुल ने साफ आरोप लगाया कि सीईसी ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति सीधे प्रधानमंत्री और अमित शाह द्वारा की गई थी और अब वे बिना सर्वसम्मति के चुनाव आयोग को अपनी जागीर की तरह चला रहे हैं। विपक्षी दलों का सीधा कहना है कि चुनाव आयोग के भीतर का यह घमासान इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि पर्दे के पीछे से कोई ‘अदृश्य हाथ’ पूरी चुनाव प्रक्रिया को हाईजैक कर रहा है।
राहुल गांधी का यह ‘ट्रिपल अटैक’ सिर्फ एक राजनीतिक बयानबाजी नहीं है, बल्कि यह देश के सबसे पवित्र लोकतांत्रिक अधिकार (वोट) की विश्वसनीयता पर उठा अब तक का सबसे खौफनाक सवाल है। सीईसी के खिलाफ उठे इन गंभीर आरोपों और चुनाव आयोग के भीतर की तथाकथित बगावत ने विपक्ष को एक बड़ा हथियार दे दिया है। अगर चुनाव आयोग ने जल्द ही पूरी पारदर्शिता के साथ इस ‘वोट चोरी’ के आरोपों का ठोस जवाब नहीं दिया, तो यह मुद्दा देश की सड़कों से लेकर संसद तक एक बहुत बड़े राजनीतिक महा-संग्राम का रूप ले लेगा।