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‘हताश नेता की झूठी गूंज’! भाजपा ने राहुल गांधी के ‘ट्रिपल अटैक’ को किया चकनाचूर, चुनाव आयोग विवाद पर विपक्ष के राजनीतिक ज्ञान की उड़ाई धज्जियां

सरिता त्रिपाठी/नई दिल्ली

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) पर लगाए गए ‘वोट चोरी’ के गंभीर आरोपों पर सत्ताधारी दल भाजपा ने बेहद तीखा और आक्रामक पलटवार किया है। चुनाव आयोग की विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) प्रक्रिया और ‘ईसीआईनेट’ सॉफ्टवेयर को लेकर राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस के तुरंत बाद भाजपा के शीर्ष नेताओं ने मैदान में उतरकर कांग्रेस के सारे दावों को सिरे से खारिज कर दिया। भाजपा ने राहुल गांधी के इस ‘ट्रिपल अटैक’ को एक ‘हताश और लगातार हार रहे नेता की झूठी गूंज’ करार देते हुए उनके राजनीतिक ज्ञान और लोकतांत्रिक समझ पर सबसे तीखे सवाल दाग दिए हैं।

‘अपनी हार का ठीकरा हमेशा सिस्टम पर फोड़ने की आदत’
भाजपा प्रवक्ताओं ने कांग्रेस और राहुल गांधी की कार्यप्रणाली का चीरहरण करते हुए कहा कि विपक्ष अपनी लगातार हो रही राजनीतिक हार को पंचाने में पूरी तरह से नाकाम रहा है। भाजपा का सीधा आरोप है कि जब भी कांग्रेस चुनाव जीतती है, तो चुनाव आयोग और ईवीएम (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) बिल्कुल सही काम करते हैं, लेकिन जैसे ही उन्हें जनता नकार देती है, वे पूरी संवैधानिक संस्थाओं, चुनाव आयोग और पूरी लोकतांत्रिक प्रक्रिया को ही ‘चोर’ घोषित कर देते हैं। भाजपा ने इसे देश के लोकतंत्र और चुनाव आयोग जैसी स्वतंत्र संस्था का सबसे बड़ा और शर्मनाक अपमान बताया है।

सीईसी की नियुक्ति और ‘तानाशाही’ के दावों का किया खंडन
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और उनके तथाकथित ‘मनमाने फैसलों’ को लेकर राहुल गांधी के आरोपों पर भाजपा ने जोरदार पलटवार किया है। सत्ता पक्ष ने स्पष्ट किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य आयुक्तों की नियुक्ति पूरी तरह से संवैधानिक प्रक्रिया और संसद द्वारा पारित कानून के तहत ही हुई है। भाजपा ने राहुल गांधी को याद दिलाया कि देश की चुनावी प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी है और एसआईआर प्रक्रिया (मतदाता सूची का डिजिटल संशोधन) का उद्देश्य चुनावों को धांधली से बचाना है, न कि धांधली करना, जैसा कि विपक्ष आरोप लगा रहा है।

‘एंटी-इंकंबेंसी’ पर राहुल की थ्योरी को बताया ‘बचकाना’
सत्ता विरोधी लहर (एंटी-इंकंबेंसी) के भाजपा पर लागू न होने वाले राहुल गांधी के विश्लेषणात्मक दावे को भाजपा ने ‘बचकाना और राजनीतिक अज्ञानता’ का सबसे बड़ा उदाहरण बताया। भाजपा ने पलटवार करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह के नेतृत्व में पार्टी इसलिए जीतती है क्योंकि वे ‘प्रो-इंकंबेंसी’ (सत्ता के पक्ष में लहर) यानी सुशासन और जनता के विश्वास पर चुनाव लड़ते हैं, जबकि कांग्रेस अभी भी पुरानी और नकारात्मक राजनीति के सहारे सत्ता में आने का मुंगेरीलाल वाला सपना देख रही है।

भाजपा का यह आक्रामक पलटवार स्पष्ट करता है कि वह चुनाव आयोग और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर विपक्ष के किसी भी हमले को हल्के में लेने वाली नहीं है। भाजपा ने राहुल गांधी की इस प्रेस कॉन्फ्रेंस को सिर्फ मीडिया में बने रहने का एक ‘पॉलिटिकल स्टंट’ (सियासी पैंतरा) करार दिया है। इस तीखे वाकयुद्ध ने यह तय कर दिया है कि चुनाव आयोग, उसकी डिजिटल प्रणाली और पूरी चुनाव प्रक्रिया को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच छिड़ी यह राजनीतिक महा-जंग आने वाले दिनों में और भी ज्यादा खौफनाक और आक्रामक होने वाली है।