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‘रक्षक’ के भेष में छिपा था असली भक्षक! दिल्ली पुलिस का अपना मुखबिर ही निकला कालकाजी गैंगरेप का दरिंदा, कपड़ों के रंग ने खोल दिया सबसे बड़ा राज

अभिषेक सिंह

नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली के आस्था कुंज पार्क (कालकाजी इलाके) में हुए रूह कंपा देने वाले सामूहिक दुष्कर्म कांड में एक ऐसा खौफनाक और सनसनीखेज पर्दाफाश हुआ है, जिसने पुलिस महकमे के भीतर ही भारी भूचाल ला दिया है। जांच में यह खौफनाक सच सामने आया है कि इस पूरी दरिंदगी को अंजाम देने वाला मास्टरमाइंड कोई और नहीं, बल्कि खुद दिल्ली पुलिस का एक पुराना ‘मुखबिर’ था। दरिंदों ने पुलिसकर्मी बनकर ही इस वीभत्स वारदात को अंजाम दिया था। अब पुलिस ने आरोपियों के कपड़ों के रंग और हुलिए से उनकी असली पहचान कर ली है और उन्हें फांसी के फंदे तक पहुंचाने के लिए ‘डीएनए’ (वैज्ञानिक) जांच की पुख्ता तैयारी शुरू कर दी गई है।

केस डायरी के अहम पन्ने
इस खौफनाक वारदात ने सिस्टम की उस काली सच्चाई को उजागर किया है, जहां पुलिस की मदद करने वाले ही खूंखार भक्षक बन गए। पुलिस की तफ्तीश में सामने आए तीन सबसे बड़े राज:

‘जनाब’ बोलकर पुलिस वाला बनने का खौफनाक नाटक
मुख्य आरोपी आसिफ पुलिस के तौर-तरीकों और भाषा से भली-भांति वाकिफ था क्योंकि वह पुलिस के लिए मुखबिरी का काम कर चुका था। इसी जानकारी का फायदा उठाते हुए दरिंदों ने नाबालिग लड़की और उसके दोस्त को ‘जनाब’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर पुलिसकर्मी होने का रौब दिखाया। इसी धोखे और दहशत के साये में वे मासूम लड़की को पार्क के एक घने और सुनसान इलाके में ले गए, जहां उन्होंने इस घिनौने सामूहिक दुष्कर्म को अंजाम दिया।

कपड़ों का रंग और ‘सीसीटीवी’ ने खोला असली चेहरा
वारदात को अंजाम देने के बाद इन शातिर दरिंदों ने पुलिस की आंखों में धूल झोंकने के लिए अपने मोबाइल की इंटरनेट हिस्ट्री डिलीट कर दी और सबूत मिटाने के लिए कपड़े घर जाकर धो डाले। लेकिन पुलिस की जांच टीम ने जब इलाके के तमाम ‘सीसीटीवी’ कैमरों को खंगाला, तो अंधेरे में भी दरिंदों के कपड़ों के रंग और उनके शारीरिक हुलिए (बनावट) ने उन्हें बुरी तरह बेनकाब कर दिया। इसी हुलिए के आधार पर पुलिस का शक अपने ही मुखबिर पर गया और यह पूरा राज खुल गया।

पिस्तौल, चाकू और ‘डीएनए’ जांच का महा-फंदा
अपराधियों के बचने का हर रास्ता बंद करने के लिए पुलिस और फोरेंसिक टीम ने अपराध स्थल से कई बेहद अहम और आपत्तिजनक वैज्ञानिक सबूत जुटाए हैं। जांच के दौरान आरोपियों के पास से पिस्तौल और धारदार चाकू भी बरामद किया गया है। अब पुलिस इन सभी दरिंदों का अदालत की निगरानी में ‘डीएनए’ परीक्षण कराने जा रही है, जो इस केस का सबसे अचूक और अभेद्य सबूत बनेगा।

व्यवस्था के मुंह पर करारा तमाचा
आस्था कुंज पार्क का यह खौफनाक कांड पूरी सुरक्षा व्यवस्था के मुंह पर एक बहुत बड़ा और करारा तमाचा है। जब पुलिस के अपने मुखबिर ही खाकी का झूठा रौब दिखाकर समाज की बेटियों की इज्जत तार-तार करने लगें, तो आम जनता का डरना पूरी तरह लाजमी है। पुलिस ने मामले में आपराधिक साजिश की कड़ी धाराएं भी जोड़ दी हैं, लेकिन अब समय आ गया है कि इन दरिंदों पर कानून का सबसे कठोर हथौड़ा चले, ताकि कोई भी अपराधी खाकी की आड़ में इस तरह का जघन्य कृत्य करने की हिम्मत न जुटा सके।