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आंध्र प्रदेश में ‘तीन राजधानियों’ के विवाद का अंत: उच्च न्यायालय ने पुरानी याचिकाओं को किया निष्प्रभावी, अमरावती ही राज्य की एकमात्र राजधानी

सरिता त्रिपाठी

आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने राज्य की राजधानी को लेकर पिछले कई सालों से चल रहे राजनीतिक और कानूनी घमासान पर अपना सबसे बड़ा और अंतिम फैसला सुना दिया है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि कानूनी तौर पर अमरावती ही राज्य की एकमात्र राजधानी है, इसलिए अब तीन राजधानियों के विवाद से जुड़ी सभी याचिकाएं पूरी तरह से व्यर्थ और निष्प्रभावी हो चुकी हैं।

आंध्र प्रदेश की राजनीति और कानूनी गलियारों में भूचाल लाने वाले ‘तीन राजधानियों’ के विवादास्पद अध्याय को देश की न्यायपालिका ने हमेशा के लिए दफन कर दिया है। आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने एक बेहद अहम और ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए इस पूरे विवाद को जड़ से खत्म कर दिया है। अदालत ने साफ और कड़े शब्दों में कहा है कि राज्य विधानसभा द्वारा पारित कानूनों और वर्तमान सरकार के स्पष्ट रुख के बाद अब अमरावती ही राज्य की इकलौती और वैध राजधानी है। ऐसे में पिछली सरकार द्वारा लाए गए तीन राजधानियों के विचार को चुनौती देने वाली अनगिनत याचिकाओं पर सुनवाई करने का अब कोई कानूनी औचित्य नहीं बचा है। अदालत ने इन सभी याचिकाओं को निष्प्रभावी (इनफ्रक्चुअस) करार देते हुए इस विवाद की कानूनी फाइल को हमेशा के लिए बंद कर दिया है।

यह पूरा घमासान तब शुरू हुआ था जब राज्य की पिछली सरकार ने एक बेहद विवादास्पद और तुगलकी फरमान जारी करते हुए अमरावती के बजाय राज्य में तीन अलग-अलग राजधानियां (विशाखापत्तनम को कार्यकारी, कुरनूल को न्यायिक और अमरावती को विधायी राजधानी) बनाने का खौफनाक दांव चला था। इस राजनीतिक फैसले ने राज्य को भयंकर आग में झोंक दिया था, खासकर उन हजारों किसानों को जिन्होंने राजधानी के निर्माण के लिए अपनी बहुमूल्य जमीनें राज्य को सौंप दी थीं। किसानों और विपक्ष ने इस फैसले के खिलाफ सड़कों से लेकर सर्वोच्च न्यायालय तक आर-पार की जंग छेड़ दी थी। लेकिन राज्य में हुए हालिया सत्ता परिवर्तन के बाद, वर्तमान सरकार ने पुरानी सरकार के उस विनाशकारी फैसले को पूरी तरह से पलट दिया और ‘एपीसीआरडीए’ (आंध्र प्रदेश राजधानी क्षेत्र विकास प्राधिकरण) अधिनियम को उसकी पूरी ताकत के साथ दोबारा लागू कर दिया।

उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने याचिकाओं का निपटारा करते हुए इस बात पर सख्त मुहर लगा दी है कि जब कानून खुद ही अमरावती को एकमात्र राजधानी के रूप में मान्यता दे चुका है, तो अब पुरानी और मृत हो चुकी नीतियों पर अदालत का कीमती समय बर्बाद करने का कोई मतलब नहीं है। इस फैसले ने उन हजारों किसानों और आम निवासियों को एक बहुत बड़ी और ऐतिहासिक जीत दिलाई है, जो पिछले कई सालों से अपने हकों के लिए पुलिस की लाठियां और सरकारी प्रताड़ना झेल रहे थे। अदालत के इस कड़े और अंतिम फैसले के बाद अब यह पूरी तरह से तय हो गया है कि आंध्र प्रदेश की सियासत में ‘तीन राजधानियों’ का वह डरावना अध्याय हमेशा के लिए खत्म हो चुका है, और अमरावती के विकास का रुका हुआ पहिया अब बिना किसी कानूनी या राजनीतिक बाधा के पूरी रफ्तार से आगे बढ़ेगा।