श्रीनगर में बाहरी लोगों के जमीन खरीदने पर अल्ताफ बुखारी ने जताई चिंता, जनसांख्यिकीय बदलाव के लिए नेशनल कॉन्फ्रेंस को ठहराया जिम्मेदार

विवेक ओझा
अपनी पार्टी के प्रमुख ने दावा किया है कि राज्य के बाहर के लोग तेजी से श्रीनगर में संपत्ति खरीद रहे हैं और इस वर्तमान स्थिति के लिए नेशनल कॉन्फ्रेंस की नीतियां और उनकी कार्यप्रणाली पूरी तरह से जवाबदेह हैं।
जम्मू-कश्मीर की राजनीति में जमीन के मालिकाना हक और जनसांख्यिकीय (डेमोग्राफिक) बदलाव को लेकर एक नई और गंभीर बहस शुरू हो गई है। ‘अपनी पार्टी’ के अध्यक्ष सैयद अल्ताफ बुखारी ने दावा किया है कि बाहरी लोग अब तेजी से श्रीनगर और कश्मीर घाटी के अन्य महत्वपूर्ण हिस्सों में जमीन खरीद रहे हैं। उन्होंने इस संवेदनशील मुद्दे पर सीधा निशाना प्रमुख विपक्षी दल नेशनल कॉन्फ्रेंस पर साधा है। बुखारी का कहना है कि घाटी में हो रहे इस जनसांख्यिकीय बदलाव के लिए नेशनल कॉन्फ्रेंस की पुरानी नीतियां और उनका राजनीतिक दृष्टिकोण पूरी तरह से जिम्मेदार है। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब राज्य में स्थानीय अधिकारों, रोजगार और भूमि संरक्षण को लेकर पहले से ही जनता के बीच काफी चिंताएं बनी हुई हैं।
एक जनसभा को संबोधित करते हुए अल्ताफ बुखारी ने कहा कि जिन नेताओं ने दशकों तक राज्य की सत्ता संभाली और स्थानीय लोगों के अधिकारों की रक्षा का दावा किया, उनके ही फैसलों ने आज ऐसी स्थिति पैदा कर दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि नेशनल कॉन्फ्रेंस ने अपने लंबे शासनकाल के दौरान अपने राजनीतिक स्वार्थों के कारण ऐसे हालात निर्मित किए, जिससे आज बाहरी लोगों के लिए राज्य के मुख्य इलाकों में संपत्ति खरीदना आसान हो गया है। बुखारी के अनुसार, श्रीनगर जैसे ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण शहर में जमीन की बिक्री केवल एक आर्थिक गतिविधि नहीं है, बल्कि यह स्थानीय संस्कृति और जनसांख्यिकी के लिए एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है। उन्होंने स्थानीय जनता से अपील की कि वे उन राजनीतिक दलों से जवाब मांगें जिन्होंने सत्ता में रहते हुए उनके भविष्य को असुरक्षित कर दिया।
गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर में भूमि अधिकार और बाहरी लोगों का प्रवेश हमेशा से एक बेहद संवेदनशील सामाजिक और राजनीतिक मुद्दा रहा है। विशेष दर्जे के खत्म होने के बाद से ही स्थानीय निवासियों के बीच अपनी जमीन के संरक्षण को लेकर कई तरह की आशंकाएं रही हैं। अल्ताफ बुखारी के इन ताजा आरोपों ने एक बार फिर से इस बहस को राजनीतिक मंच पर ला खड़ा किया है। हालांकि, नेशनल कॉन्फ्रेंस की ओर से अभी तक इन विशिष्ट आरोपों पर कोई आधिकारिक और विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन यह स्पष्ट है कि आगामी राजनीतिक परिदृश्य में जमीन का मालिकाना हक एक प्रमुख चुनावी मुद्दा बना रहेगा। राज्य के विभिन्न राजनीतिक दल अब इस मुद्दे के जरिए जनता की चिंताओं को संबोधित करने और अपने प्रतिद्वंद्वियों को राजनीतिक रूप से घेरने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।