Trending

नीलगिरी में सड़क निर्माण की चालीस साल पुरानी मांग ने लिया गंभीर रूप, अनुसूचित जाति के गांव में बढ़ा सांप्रदायिक तनाव

अभिषेक सिंह

तमिलनाडु के नीलगिरी जिले में एक अनुसूचित जाति के गांव को मुख्य मार्ग से जोड़ने वाली पक्की सड़क का विवाद अब स्थानीय समुदायों के बीच गहरे तनाव का कारण बन गया है। प्रशासन इलाके में शांति बहाल करने और इस दशकों पुरानी समस्या का सर्वमान्य समाधान निकालने के प्रयास में जुटा है।

तमिलनाडु के नीलगिरी जिले में बुनियादी ढांचे के विकास से जुड़ा एक पुराना मामला अब एक बड़े सामाजिक और सांप्रदायिक तनाव में तब्दील हो गया है। एक अनुसूचित जाति के गांव तक सड़क बनाने की करीब चालीस वर्ष पुरानी मांग को लेकर स्थानीय समुदायों के बीच गहरा विवाद उत्पन्न हो गया है। हाशिए पर खड़े इस गांव के निवासियों का दर्द है कि इतने दशकों बाद भी उनके रिहायशी इलाके को मुख्य सड़क मार्ग से नहीं जोड़ा जा सका है। इस बुनियादी सुविधा के अभाव में उन्हें स्वास्थ्य, शिक्षा और दैनिक जीवन की जरूरतों के लिए भारी संघर्ष करना पड़ता है। हाल ही में जब प्रशासन द्वारा इस मार्ग के निर्माण या सीमांकन की कवायद दोबारा शुरू करने की बात सामने आई, तो दूसरे समुदाय के लोगों ने इसका विरोध किया, जिससे इलाके में स्थिति काफी तनावपूर्ण हो गई।

इस पूरे विवाद की मुख्य जड़ वह प्रस्तावित रास्ता है, जो कथित तौर पर अन्य समुदायों के रिहायशी इलाकों या उनकी पारंपरिक सीमाओं के करीब से होकर गुजरता है। सड़क निर्माण का विरोध कर रहे गुट का तर्क है कि इस मार्ग के बनने से उनके क्षेत्र में अतिक्रमण होगा और उनकी निजता या भूमि के अधिकार प्रभावित होंगे। वहीं, अनुसूचित जाति के ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि बरसात के मौसम और आपातकालीन चिकित्सा स्थितियों में पक्की सड़क न होने के कारण गांव के लोगों, विशेषकर बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को खटिया पर लादकर ले जाना पड़ता है। दशकों से चली आ रही इस अनदेखी और लगातार मिल रहे खोखले आश्वासनों ने ग्रामीणों के भीतर गहरी नाराजगी भर दी है, जो अब अधिकारों की मांग और सामुदायिक टकराव के रूप में सतह पर आ गई है।

इलाके में बढ़ते इस जातीय और सामाजिक तनाव को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और पुलिस महकमा पूरी तरह सतर्क हो गया है। किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोकने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए गांव तथा उसके आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षाकर्मियों की तैनाती बढ़ा दी गई है। जिला प्रशासन के आला अधिकारी दोनों पक्षों के प्रतिनिधियों के साथ लगातार संवाद स्थापित कर रहे हैं ताकि मामले का कोई शांतिपूर्ण और कानूनी हल निकाला जा सके। इसके साथ ही, राजस्व विभाग की टीम को भी भूमि रिकॉर्ड की जांच करने और सड़क निर्माण के लिए तकनीकी व वैकल्पिक रास्तों की संभावनाएं तलाशने का निर्देश दिया गया है। प्रशासन का स्पष्ट लक्ष्य इलाके में सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखना और साथ ही वंचित समुदाय को उनके बुनियादी संवैधानिक अधिकारों से जोड़ना है।