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जम्मू-कश्मीर विधानसभा में राज्य का दर्जा बहाल करने का प्रस्ताव पारित, बीजेपी का भारी हंगामा और वॉकआउट

राघवेन्द्र प्रताप सिंह

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला द्वारा पेश किए गए पूर्ण राज्य के दर्जे की बहाली के प्रस्ताव को विधानसभा ने ध्वनि मत से पारित कर दिया है। इस दौरान विपक्षी दल बीजेपी के विधायकों ने जोरदार हंगामा किया और सदन से बहिर्गमन किया।

जम्मू-कश्मीर विधानसभा ने केंद्र शासित प्रदेश को तत्काल प्रभाव से पूर्ण राज्य का दर्जा वापस दिलाने की मांग करने वाला एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव सोमवार को पारित कर दिया है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला द्वारा सदन में पेश किए गए इस प्रस्ताव का मुख्य विपक्षी दल बीजेपी ने कड़ा विरोध किया। प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सदन में भारी हंगामा देखने को मिला और जब इसे मतदान के लिए रखा गया, तो बीजेपी के सभी सदस्य विरोध जताते हुए सदन से बाहर चले गए। इसके बाद बिना किसी विरोध के इस ऐतिहासिक प्रस्ताव को ध्वनि मत से पारित कर दिया गया। यह प्रस्ताव ऐसे समय में पारित हुआ है जब जम्मू-कश्मीर के लोग अगस्त दो हजार उन्नीस के बाद से अपनी राजनीतिक और संवैधानिक पहचान की पूर्ण बहाली का इंतजार कर रहे हैं।

चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा और पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने में हो रही देरी पर कड़े सवाल उठाए। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के उस फैसले का भी हवाला दिया जिसमें चुनाव के बाद जल्द से जल्द राज्य का दर्जा बहाल करने का निर्देश दिया गया था। मुख्यमंत्री ने पूछा कि आखिर केंद्र सरकार के लिए ‘उचित समय’ का क्या पैमाना है और क्या यह बहाली केवल आतंकवाद के पूरी तरह खत्म होने की शर्त पर ही निर्भर करती है। उन्होंने कहा कि यह दर्जा यहां के विधायकों या सरकार के लिए नहीं, बल्कि जम्मू-कश्मीर की आम जनता का अधिकार है, जिसे जल्द से जल्द लौटाया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार तब तक चैन से नहीं बैठेगी जब तक केंद्र सरकार अपना वादा पूरा नहीं करती।

इस दौरान मुख्यमंत्री ने एक केंद्र शासित प्रदेश होने के नाते निर्वाचित सरकार के कामकाज में आ रही प्रशासनिक बाधाओं का भी खुलकर जिक्र किया। उन्होंने हैरानी जताते हुए कहा कि मुख्य सचिव और कानून सचिव ने मुख्यमंत्री द्वारा लाए गए प्रस्ताव के खिलाफ विधानसभा अध्यक्ष को अपनी राय भेज दी, जबकि मुख्यमंत्री खुद राज्य के कानून मंत्री भी हैं और उन्हें इस पत्र की कोई जानकारी तक नहीं दी गई। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या देश के किसी अन्य राज्य में ऐसी कल्पना की जा सकती है जहां नौकरशाह चुनी हुई सरकार के प्रस्ताव का इस तरह विरोध करें। दूसरी ओर, बीजेपी ने इस पूरे प्रस्ताव को सिरे से खारिज करते हुए इसे एक राजनीतिक नाटक करार दिया है। बीजेपी विधायकों का तर्क है कि विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर ने सदन के नियमों में अनुचित ढील देकर इस प्रस्ताव को गलत तरीके से पेश करने की अनुमति दी। इसके विरोध में बीजेपी ने विधानसभा अध्यक्ष को उनके पद से हटाने के लिए एक नोटिस भी सौंप दिया है। इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम ने जम्मू-कश्मीर के भविष्य और केंद्र सरकार के अगले कदम को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर एक नई और गंभीर बहस छेड़ दी है।