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मध्य प्रदेश नर्सिंग काउंसिल की भारी लापरवाही: बिना सत्यापन के गधे की तस्वीर पर जारी किया डिजिटल पंजीकरण प्रमाण पत्र

अभिषेक सिंह

राज्य की चिकित्सा शिक्षा और पंजीकरण प्रणाली में एक बड़ी चूक का मामला सामने आया है, जहां नर्सिंग स्नातक के डिजिटल प्रमाणपत्र पर एक गधे की तस्वीर को बिना किसी जांच के मंजूरी दे दी गई। इस घटना ने परिषद की कार्यप्रणाली और ऑनलाइन सत्यापन व्यवस्था की पोल खोल दी है।

मध्य प्रदेश नर्सिंग काउंसिल के कामकाज में एक ऐसी गंभीर लापरवाही सामने आई है, जिसने पूरी चिकित्सा शिक्षा प्रणाली और पंजीकरण प्रक्रिया पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। राज्य में एक नर्सिंग स्नातक के नाम पर जारी किए गए डिजिटल पंजीकरण प्रमाणपत्र पर एक गधे की तस्वीर छपी हुई मिली है। यह प्रमाणपत्र बाकायदा परिषद की आधिकारिक प्रणाली से उत्पन्न हुआ है और पूरी तरह से वैध प्रारूप में जारी किया गया है। यह घटना इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि ऑनलाइन प्रणाली के माध्यम से प्राप्त होने वाले आवेदनों और दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया में भारी अनदेखी की जा रही है। चिकित्सा और नर्सिंग जैसे बेहद संवेदनशील और सीधे तौर पर जनस्वास्थ्य से जुड़े क्षेत्र में इस तरह की चूक प्रशासन की कार्यप्रणाली और उसकी जवाबदेही पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाती है।

आमतौर पर किसी भी चिकित्सा या नर्सिंग छात्र को अंतिम पंजीकरण प्रमाणपत्र जारी करने से पहले उनके सभी दस्तावेजों, शैक्षणिक योग्यता और तस्वीर का संबंधित अधिकारियों द्वारा बारीकी से भौतिक और डिजिटल सत्यापन किया जाना अनिवार्य होता है। लेकिन इस मामले में यह साफ हो गया है कि आवेदनों को बिना जांचे-परखे ही या तो पूरी तरह स्वचालित तकनीकी प्रणाली के भरोसे छोड़ दिया गया है, या फिर संबंधित जांच अधिकारियों ने बिना देखे ही इस आवेदन को अपनी अंतिम मंजूरी दे दी। किसी इंसान की जगह एक जानवर की तस्वीर का सत्यापन के कई चरणों को आसानी से पार कर अंतिम डिजिटल प्रमाणपत्र तक पहुंच जाना तकनीकी और प्रशासनिक, दोनों स्तरों पर एक व्यवस्थागत विफलता को दर्शाता है।

इस गंभीर चूक के सार्वजनिक होने के बाद स्वास्थ्य विभाग और नर्सिंग काउंसिल के दावों की सच्चाई कटघरे में आ गई है। शिक्षाविदों और स्वास्थ्य क्षेत्र के जानकारों ने इस घटना पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि यदि पंजीकरण जैसी सबसे महत्वपूर्ण और बुनियादी प्रक्रिया इतनी दोषपूर्ण है, तो राज्य में पंजीकृत अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की डिग्रियों और उनके विवरण की प्रामाणिकता पर भी संदेह पैदा होना स्वाभाविक है। इस तरह के फर्जीवाड़े या लापरवाही से भविष्य में अयोग्य लोगों के चिकित्सा क्षेत्र में प्रवेश करने का सीधा खतरा बना रहता है, जो मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ साबित हो सकता है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य का स्वास्थ्य महकमा इस भारी प्रशासनिक लापरवाही की जिम्मेदारी तय करते हुए संबंधित कर्मचारियों और इस सत्यापन पोर्टल का प्रबंधन करने वाली तकनीकी टीम के खिलाफ क्या दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करता है।