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उत्तर प्रदेश की 450 साल पुरानी ऐतिहासिक रामलीला में दिखेगा एआई का इस्तेमाल, 70 फुट के रावण का होगा दहन

राघवेंद्र प्रताप सिंह

लखनऊ के ऐशबाग की सदियों पुरानी पारंपरिक रामलीला इस बार आधुनिक तकनीक से लैस होने जा रही है। मंचन को और अधिक जीवंत बनाने के लिए पहली बार कृत्रिम बुद्धिमत्ता का सहारा लिया जा रहा है।

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के ऐशबाग में आयोजित होने वाली ऐतिहासिक रामलीला इस वर्ष अपनी समृद्ध परंपरा और आधुनिक तकनीक के अनूठे संगम के लिए चर्चा के केंद्र में आ गई है। लगभग साढ़े चार सौ साल पुरानी इस रामलीला के मंचन को और अधिक सजीव तथा दर्शकों के लिए आकर्षक बनाने के उद्देश्य से इस बार कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और नवीनतम डिजिटल तकनीक का व्यापक स्तर पर उपयोग किया जा रहा है। आयोजन समिति ने यह महसूस किया है कि आज की युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत और भगवान राम के जीवन आदर्शों से गहराई से जोड़ने के लिए तकनीक का प्रभावी इस्तेमाल बेहद जरूरी है। इस नई व्यवस्था के तहत मंच की डिजिटल पृष्ठभूमि, प्रकाश संयोजन, ध्वनि प्रभाव और दृश्यों के बदलाव में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मदद ली जाएगी, जिससे दर्शकों को रामायण काल का एक वास्तविक अनुभव प्राप्त हो सके। यह एक बड़ा कदम है जहां एक पारंपरिक धार्मिक मंचन में इतने बड़े पैमाने पर आधुनिक वैज्ञानिक माध्यमों को शामिल किया गया है, ताकि दृश्य प्रभाव को नई ऊंचाइयों तक ले जाया जा सके।

इन तकनीकी नवाचारों के साथ-साथ इस रामलीला में विजयदशमी के दिन होने वाले रावण दहन को लेकर भी विशेष तैयारियां की गई हैं। इस बार बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक स्वरूप सत्तर फुट ऊंचे रावण के भव्य पुतले का निर्माण किया गया है, जिसे तैयार करने में कुशल कारीगरों की टीम पिछले कई हफ्तों से लगातार काम कर रही है। ऐशबाग की इस रामलीला का इतिहास न केवल बहुत पुराना है, बल्कि इसे शहर की सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक विरासत का एक महत्वपूर्ण प्रतीक भी माना जाता है। आयोजन समिति ने इस बार सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को लेकर स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर व्यापक बंदोबस्त किए हैं। एक ओर जहां कृत्रिम बुद्धिमत्ता के जरिए मंचन के दृश्यों में एक नया आयाम जोड़ने की कोशिश की गई है, वहीं दूसरी ओर रामलीला के मूल स्वरूप, संवादों की गरिमा और पारंपरिक चौपाइयों के गायन में कोई भी बदलाव नहीं किया गया है, जिससे इसकी ऐतिहासिक और धार्मिक पवित्रता पूरी तरह से अक्षुण्ण बनी रहे।