ललितपुर समेत उत्तर प्रदेश के चार जिलों में बहुमूल्य खनिजों का भंडार, खनन से पहले चालीस गांवों का होगा कायाकल्प

सरिता त्रिपाठी
राज्य सरकार ने ललितपुर और आसपास के तीन अन्य जिलों में खनन गतिविधियां शुरू होने से पहले स्थानीय बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की योजना बनाई है। जिला खनिज निधि का उपयोग कर चालीस प्रभावित गांवों में सड़क, पानी और स्वास्थ्य जैसी आवश्यक सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
उत्तर प्रदेश के ललितपुर सहित चार जिलों में बहुमूल्य खनिजों का विशाल भंडार मिलने के बाद राज्य सरकार ने इन क्षेत्रों के संपूर्ण विकास के लिए एक व्यापक रणनीति तैयार की है। भूगर्भ सर्वेक्षण विभाग की हालिया खोज में ललितपुर, सोनभद्र, मिर्जापुर और बांदा जैसे बुंदेलखंड तथा विंध्य क्षेत्र के जिलों में सोने, लोहे, प्लैटिनम और अन्य बेशकीमती खनिजों के नए ब्लॉक चिह्नित किए गए हैं। इन क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर वाणिज्यिक खनन शुरू करने से पहले प्रशासन ने यह सुनिश्चित करने का निर्णय लिया है कि स्थानीय निवासियों को इसका सीधा लाभ मिले और उन्हें औद्योगिक गतिविधियों के कारण किसी भी तरह की असुविधा का सामना न करना पड़े। इसी दिशा में कदम उठाते हुए सरकार ने खनन प्रक्रिया से सीधे तौर पर प्रभावित होने वाले करीब चालीस गांवों की तस्वीर बदलने की विस्तृत कार्ययोजना को मंजूरी दे दी है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य यह है कि जब इन क्षेत्रों में भारी मशीनरी का आवागमन और औद्योगिक गतिविधियां शुरू हों, तो उससे पहले ही वहां का स्थानीय बुनियादी ढांचा पूरी तरह से मजबूत और आधुनिक बन चुका हो।
इन चालीस गांवों के विकास और कायाकल्प के लिए आवश्यक धनराशि की व्यवस्था ‘जिला खनिज फाउंडेशन’ कोष के माध्यम से की जाएगी। प्रशासन द्वारा तैयार की गई रूपरेखा के अनुसार, इस कोष का उपयोग मुख्य रूप से गांवों में पक्की सड़कों के निर्माण, शुद्ध पेयजल की निर्बाध आपूर्ति, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के आधुनिकीकरण और स्कूलों की स्थिति सुधारने में किया जाएगा। इसके अलावा, खनन के कारण पर्यावरण पर पड़ने वाले संभावित प्रतिकूल प्रभावों को कम करने के लिए बड़े पैमाने पर पौधारोपण और हरित पट्टी विकसित करने की भी योजना है। स्थानीय अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे ग्राम पंचायतों के साथ मिलकर विकास कार्यों की प्राथमिकता तय करें ताकि काम बिना किसी बाधा के समय पर पूरा हो सके। सरकार का यह कदम इस बात का स्पष्ट संकेत है कि वह औद्योगिक विकास और राजस्व प्राप्ति के साथ-साथ ग्रामीण आबादी के जीवन स्तर को सुधारने तथा उनके हितों के संरक्षण को भी समान रूप से प्राथमिकता दे रही है।