लखनऊ में सरकारी जमीन पर चला बुलडोजर, आवास विकास परिषद ने मुक्त कराई 6 करोड़ की संपत्ति

सरिता त्रिपाठी
उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद ने राजधानी लखनऊ में अवैध कब्जों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए लगभग छह करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी भूमि को खाली कराया है। प्रशासन ने अवैध निर्माणकर्ताओं और भू-माफियाओं को सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है।
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सरकारी और सार्वजनिक संपत्तियों पर अवैध कब्जों के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई निरंतर जारी है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद के प्रवर्तन दस्ते ने भारी पुलिस बल की मौजूदगी में एक सुनियोजित अभियान चलाकर लगभग छह करोड़ रुपये की बेशकीमती सरकारी भूमि को अवैध कब्जे से मुक्त करा लिया है। यह कार्रवाई परिषद की आवासीय योजना क्षेत्र में की गई, जहां कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा सरकारी जमीन पर अनाधिकृत रूप से चहारदीवारी, अस्थायी ढांचे और दुकानें बनाकर कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा था। अधिकारियों के अनुसार, इस संबंध में अवैध निर्माणकर्ताओं को पहले विधिवत कानूनी नोटिस जारी कर कब्जा हटाने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन तय समय सीमा बीत जाने के बाद भी जब अतिक्रमण नहीं हटाया गया, तो परिषद को ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया अमल में लानी पड़ी।
कार्रवाई के दौरान परिषद के अधिकारियों, अभियंताओं और पुलिस बल ने मौके पर पहुंचकर भारी मशीनरी और बुलडोजर की मदद से सभी अवैध ढांचों को पूरी तरह से ढहा दिया। हालांकि मौके पर मौजूद कुछ लोगों ने शुरुआत में विरोध जताने की कोशिश की, लेकिन पुलिस की सख्त निगरानी और अधिकारियों की समझाइश के चलते स्थिति पूरी तरह शांत रही। जमीन को पूरी तरह खाली कराने के बाद अधिकारियों ने मौके पर परिषद के स्वामित्व का सूचना पट्ट स्थापित कर दिया है और क्षेत्र की निगरानी बढ़ा दी है ताकि भविष्य में दोबारा कोई इस भूमि पर अवैध निर्माण का प्रयास न कर सके।
आवास विकास परिषद के वरिष्ठ अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि सरकारी संपत्तियों पर किसी भी तरह का अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और आने वाले दिनों में भी अन्य क्षेत्रों में ऐसे अभियान जारी रहेंगे। विभाग ने उन सभी चिन्हित भूखंडों का सर्वेक्षण तेज कर दिया है जहां अवैध प्लाटिंग या कब्जे की शिकायतें मिली हैं। इसके साथ ही प्रशासन ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि वे किसी भी जमीन की खरीद-फरोख्त से पहले संबंधित प्राधिकरण से उसके स्वामित्व और दस्तावेजों की विधिवत जांच अवश्य करा लें, ताकि वे धोखेबाजी और भविष्य में होने वाली कानूनी कार्रवाई से सुरक्षित रह सकें।