गली-मोहल्लों से क्रिकेट के बड़े मंच तक पहुंचीं उत्तराखंड की बेटियां

देहरादून। कल तक जो बेटियां अपने-अपने कस्बों, गांवों और गली-मोहल्लों की तंग गलियों में प्लास्टिक या टेनिस बॉल से क्रिकेट खेला करती थीं, आज वही बेटियां राजीव गांधी अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम की दूधिया रोशनी के बीच रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन कर रही हैं।

उत्तराखंड प्रीमियर लीग केवल एक क्रिकेट टूर्नामेंट साबित नहीं हुआ है, बल्कि यह राज्य की उन अनगिनत बेटियों के लिए एक ऐसा जीवन-बदलने वाला मंच बन गया है, जहाँ से उनके सपने सीधे आसमान छू रहे हैं।

यूपीएल में दिखाया दम, अब डब्ल्यूपीएल पर नजर

लीग की आधिकारिक वेबसाइट (uplt20.com) पर दर्ज शानदार आंकड़े इस बात की पुख्ता गवाही दे रहे हैं कि उत्तराखंड प्रीमियर लीग की ये टॉप परफॉर्मर्स आने वाले समय में आपको वूमेंस प्रीमियर लीग, घरेलू प्रथम श्रेणी क्रिकेट और बहुत जल्द भारतीय राष्ट्रीय महिला टीम की नीली जर्सी में देश का प्रतिनिधित्व करती हुई नजर आएंगी।

उत्तराखंड के सुदूर पर्वतीय क्षेत्रों और छोटे-छोटे शहरों से आईं इन बेटियों के पास हुनर की कभी कोई कमी नहीं थी, लेकिन सही एक्सपोजर न मिल पाने के कारण उनकी प्रतिभा सीमित रह जाती थी। उत्तराखंड प्रीमियर लीग ने इन गुमनाम लड़कियों को सीधे नेशनल ब्रॉडकास्टिंग, लाइव कैमरों और हजारों दर्शकों के सामने लाकर खड़ा कर दिया है।

मैदान पर उनका बढ़ता आत्मविश्वास, दबाव में चौके-छक्के लगाना और मैच-विनिंग स्पेल फेंकना यह साबित करता है कि ये खिलाड़ी मानसिक रूप से अब अंतरराष्ट्रीय मानकों और डब्ल्यूपीएल जैसे बड़े आयोजनों के लिए पूरी तरह तैयार हो चुकी हैं।

टूर्नामेंट में बल्लेबाजों के शानदार आंकड़ों पर नजर डालें तो देहरादून वॉरियर्स वुमेन की नीलम भारद्वाज 136 रन बनाकर इस सीजन की सबसे सफल बल्लेबाज बनकर उभरी हैं। उनकी इस निरंतरता और आक्रामक तकनीक ने डब्ल्यूपीएल फ्रैंचाइजी स्काउट्स का ध्यान अपनी ओर खींचा है।

नीलम के साथ-साथ मसूरी क्वींस वुमेन की नंदिनी कश्यप ने भी 131 रनों की शानदार पारियां खेलकर खुद को एक मजबूत ओपनर के रूप में स्थापित किया है। वहीं, 105 रन बनाने वाली प्रीति भंडारी ने 134.6 के बेहतरीन स्ट्राइक रेट से आक्रामक बल्लेबाजी का प्रदर्शन किया। इसके अलावा बागेश्वर एरियल वुमेन की प्रेमा रावत का 143.3 का विस्फोटक स्ट्राइक रेट यह साफ दर्शाता है कि आधुनिक टी-20 क्रिकेट की पावर-हिटिंग में उत्तराखंड की बेटियां किसी से पीछे नहीं हैं।

केवल बल्ले से ही नहीं, बल्कि गेंदबाजी के मोर्चे पर भी इन बेटियों ने मैदान पर अपनी फिरकी और रफ्तार का खौफ कायम किया। मसूरी क्वींस वुमेन की पूजा राज ने टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा 10 विकेट झटककर पर्पल कैप पर अपना कब्जा जमाया और विपक्षी टीमों के मध्यक्रम की रीढ़ तोड़ दी।

उनके साथ निशा मिश्रा ने 8 विकेट चटकाने के साथ-साथ पूरे टूर्नामेंट में 2.9 का अविश्वसनीय और बेहद किफायती इकोनॉमी रेट बनाए रखा, जो टी-20 फॉर्मेट में विश्वस्तरीय गेंदबाजी की पहचान है। वहीं पिथौरागढ़ हरिकेन्स की मानशी पंवार ने भी 7 विकेट और 4.3 की कसी हुई इकोनॉमी के साथ अपनी धारदार गेंदबाजी का लोहा मनवाया।

स्नेह राणा ने जिस उम्मीद का दीया देवभूमि में जलाया था, उत्तराखंड प्रीमियर लीग ने उस दीये को अब एक व्यापक क्रांति का रूप दे दिया है। जिस तरह से नीलम भारद्वाज, पूजा राज, नंदिनी कश्यप, प्रीति भंडारी और निशा मिश्रा जैसी खिलाड़ियों ने डिजिटल लीडरबोर्ड पर अपना परचम लहराया है, खेल विशेषज्ञों का मानना है कि आगामी डब्ल्यूपीएल ऑक्शन और घरेलू बीसीसीआई सत्र में इनकी भारी मांग रहने वाली है।

गली-मोहल्लों से निकलकर उत्तराखंड प्रीमियर लीग के बड़े कैनवास पर अपनी चमक बिखेरने वाली ये बेटियां अब केवल उत्तराखंड का गर्व नहीं हैं, बल्कि ये भारतीय महिला क्रिकेट के उस स्वर्णिम भविष्य की मजबूत नींव हैं जो बहुत जल्द दुनिया भर के स्टेडियमों में तिरंगा लहराती नजर आएंगी।