दुनिया भर में आज मनाया जा रहा है अंतर्राष्ट्रीय अनुवाद दिवस :

नई दिल्ली ( सरिता त्रिपाठी ) :
अंतर्राष्ट्रीय अनुवाद दिवस (International Translation Day) हर वर्ष 30 सितंबर को इसी महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करता है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 24 मई 2017 को प्रस्ताव 71/288 के जरिए 30 सितंबर को अंतर्राष्ट्रीय अनुवाद दिवस घोषित किया था। संयुक्त राष्ट्र ने पेशेवर अनुवाद को देशों को जोड़ने, संवाद और समझ बढ़ाने तथा विकास और शांति को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण माध्यम माना है।
30 सितंबर को ही क्यों मनाया जाता है
अंतर्राष्ट्रीय अनुवाद दिवस के लिए 30 सितंबर की तारीख संत जेरोम की स्मृति से जुड़ी है। संत जेरोम को अनुवादकों का संरक्षक माना जाता है। उन्होंने बाइबल के महत्वपूर्ण हिस्सों का ग्रीक और हिब्रू स्रोतों से लैटिन में अनुवाद किया था। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, उनका निधन 30 सितंबर 420 को बेथलेहम के निकट हुआ था। अनुवाद के क्षेत्र से जुड़े लोग लंबे समय से इस दिन को भाषा पेशेवरों के योगदान को रेखांकित करने के अवसर के रूप में मनाते रहे हैं।
भारत में अनुवाद की जरूरत और व्यापकता
भारत की भाषाई विविधता अनुवाद को केवल साहित्यिक गतिविधि तक सीमित नहीं रहने देती, बल्कि इसे सामाजिक और संस्थागत जरूरत बनाती है। गृह मंत्रालय के राजभाषा विभाग के अनुसार, संविधान की आठवीं अनुसूची में असमिया, बांग्ला, बोड़ो, डोगरी, गुजराती, हिंदी, कन्नड़, कश्मीरी, कोंकणी, मलयालम, मणिपुरी, मराठी, मैथिली, नेपाली, उड़िया, पंजाबी, संस्कृत, संथाली, सिंधी, तमिल, तेलुगू और उर्दू समेत 22 भाषाएं शामिल हैं।
इतनी भाषाई विविधता में सरकारी सूचनाओं, शिक्षा सामग्री, साहित्य, समाचार और तकनीकी ज्ञान को व्यापक समाज तक पहुंचाने में अनुवाद की महत्वपूर्ण भूमिका स्वाभाविक है। भारत में अलग-अलग भाषाओं के बीच संवाद केवल राज्यों की सीमाओं तक सीमित नहीं है। रोजगार, शिक्षा, कारोबार, प्रवासन, मनोरंजन और डिजिटल माध्यमों ने भाषाओं के बीच संपर्क को और बढ़ाया है। ऐसे में एक भाषा में तैयार सामग्री को दूसरी भाषा के पाठकों और दर्शकों तक पहुंचाने के लिए गुणवत्तापूर्ण अनुवाद की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है।