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जम्मू-कश्मीर के मेडिकल कॉलेज में छात्राओं का प्रदर्शन, प्रसूति कक्ष में बुर्का पहनने पर प्रोफेसर ने जताई थी आपत्ति

सरिता त्रिपाठी

डोडा स्थित राजकीय मेडिकल कॉलेज में एक महिला प्रोफेसर द्वारा बुर्का पहने छात्राओं को कथित तौर पर प्रसूति कक्ष में प्रवेश से रोकने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। प्रशासन ने मामले की जांच के लिए एक समिति का गठन कर दिया है।

जम्मू-कश्मीर के डोडा स्थित राजकीय मेडिकल कॉलेज में उस समय भारी हंगामा और विरोध प्रदर्शन देखने को मिला, जब एक महिला प्रोफेसर ने बुर्का पहने हुई महिला प्रशिक्षुओं को कथित तौर पर अस्पताल के प्रसूति कक्ष में प्रवेश करने से रोक दिया। इस घटना के विरोध में बड़ी संख्या में छात्राओं ने अपने काम का बहिष्कार कर दिया और अस्पताल भवन के बाहर एकत्रित होकर प्रबंधन व प्रोफेसर के खिलाफ नारेबाजी की। छात्राओं का आरोप है कि स्त्री रोग विभाग की प्रोफेसर ने लगातार दो दिनों तक उन्हें प्रसूति कक्ष में जाने से रोका और कथित तौर पर यह टिप्पणी भी की कि बुर्का पहनना किसी गैरकानूनी गतिविधि का हिस्सा है। छात्राओं ने सवाल उठाया है कि यदि चिकित्सा नियमों के तहत प्रसूति कक्ष में बुर्के की मनाही है, तो लंबे नाखूनों और अन्य चीजों पर भी पाबंदी लगनी चाहिए, केवल बुर्के को ही विशेष रूप से क्यों निशाना बनाया जा रहा है। उनका दावा है कि प्रोफेसर ने उन्हें बुर्के की जगह केवल मेडिकल कोट पहनने का निर्देश दिया था।

इस पूरे विवाद के तूल पकड़ने के बाद अस्पताल प्रशासन और स्थानीय पुलिस तुरंत सक्रिय हो गई है। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने प्रदर्शनकारी छात्राओं से बातचीत कर स्थिति को शांत करने का प्रयास किया और आश्वासन दिया कि नियमों की समीक्षा करने के बाद यदि आवश्यक हुआ तो इस मामले में औपचारिक प्राथमिकी भी दर्ज की जाएगी। वहीं, मेडिकल कॉलेज के चिकित्सा अधीक्षक ने छात्राओं की लिखित शिकायत मिलने के बाद इस गंभीर मामले की जांच के लिए आठ सदस्यों वाली एक विशेष समिति का गठन कर दिया है, जिसे दो दिनों के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का सख्त निर्देश दिया गया है। दूसरी ओर, इस मुद्दे ने राजनीतिक स्तर पर भी ध्यान आकर्षित किया है। डोडा के स्थानीय विधायक ने इस मामले को लेकर सीधे राज्य की स्वास्थ्य मंत्री से बातचीत की है और प्रशासन से अविलंब कार्रवाई करने की मांग की है। फिलहाल, अस्पताल परिसर में स्थिति को नियंत्रण में रखा गया है और सभी की निगाहें अब जांच समिति की आगामी रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं।