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संयुक्त राष्ट्र में तीखी बहस के बीच शंघाई सहयोग संगठन की बैठक के लिए वरिष्ठ भारतीय अधिकारी का इस्लामाबाद दौरा

विवेक ओझा

संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए कड़े बयानों के कुछ ही दिनों बाद, एक वरिष्ठ भारतीय राजनयिक ने आगामी शिखर सम्मेलन की तैयारियों को लेकर पाकिस्तान की राजधानी का दौरा किया है, जो बहुपक्षीय कूटनीति के प्रति भारत की परिपक्वता को दर्शाता है।

वैश्विक मंच पर जारी कूटनीतिक तनाव के बीच भारत और पाकिस्तान के संबंधों में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। संयुक्त राष्ट्र महासभा के हालिया सत्र में दोनों पड़ोसी देशों के बीच हुए कड़े बयानों और एक-दूसरे पर लगाए गए गंभीर आरोपों के महज कुछ ही दिनों बाद, एक वरिष्ठ भारतीय राजनयिक ने पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद का दौरा किया है। यह अहम दौरा शंघाई सहयोग संगठन के आगामी शिखर सम्मेलन की रूपरेखा और तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए आयोजित एक विशेष योजना बैठक के सिलसिले में किया गया है। कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि संयुक्त राष्ट्र में कड़े रुख के बावजूद इस क्षेत्रीय मंच की बैठक में भारत की आधिकारिक भागीदारी यह दर्शाती है कि नई दिल्ली द्विपक्षीय विवादों को बहुपक्षीय सहयोग के आड़े नहीं आने देना चाहती। ज्ञात हो कि पाकिस्तान इस बार शंघाई सहयोग संगठन की अत्यंत महत्वपूर्ण बैठकों की मेजबानी कर रहा है, जिसमें सदस्य देशों के शासनाध्यक्षों का जमावड़ा होना प्रस्तावित है।

इस योजना बैठक में भारतीय अधिकारी की उपस्थिति से यह स्पष्ट हो गया है कि भारत इस महत्वपूर्ण क्षेत्रीय संगठन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को लेकर बेहद गंभीर है। अगर हम हालिया पृष्ठभूमि पर नजर डालें, तो संयुक्त राष्ट्र के मंच पर पाकिस्तान के शीर्ष नेतृत्व ने कश्मीर का मुद्दा उठाकर भारत को घेरने की कोशिश की थी, जिसका भारतीय प्रतिनिधियों ने बेहद कड़ा और मुंहतोड़ जवाब दिया था। भारत ने विश्व पटल पर स्पष्ट कर दिया था कि जो देश आतंकवाद को पनाह देता है, उसे शांति पर बोलने का कोई अधिकार नहीं है। इस कूटनीतिक तल्खी के तुरंत बाद भारतीय दल का इस्लामाबाद जाना अंतरराष्ट्रीय राजनीति के उस जटिल यथार्थ को रेखांकित करता है, जहां राष्ट्रीय हितों और बहुपक्षीय संगठनों के प्रोटोकॉल को द्विपक्षीय कड़वाहट से अलग रखा जाता है।

शंघाई सहयोग संगठन यूरेशियाई क्षेत्र का एक अत्यंत प्रभावशाली गठबंधन है, जिसमें रूस, चीन और मध्य एशियाई देशों के साथ भारत और पाकिस्तान भी शामिल हैं। भारत हमेशा से ही इस संगठन को शांति, व्यापार संपर्क और आतंकवाद के खिलाफ साझा लड़ाई के लिए एक महत्वपूर्ण मंच मानता रहा है। इसी व्यापक दृष्टिकोण के तहत भारत ने इस्लामाबाद में हो रही इस प्रारंभिक बैठक में अपना प्रतिनिधि भेजा है ताकि शिखर सम्मेलन के दौरान उठाए जाने वाले प्रमुख मुद्दों, सुरक्षा प्रबंधों और संयुक्त घोषणापत्र के मसौदे पर चर्चा की जा सके। यह दौरा पूरी तरह से बहुपक्षीय ढांचे के अंतर्गत हो रहा है और इसका रुकी हुई द्विपक्षीय वार्ता को फिर से शुरू करने से कोई सीधा संबंध नहीं है।

कूटनीतिक हलकों में इस बात पर जोर दिया जा रहा है कि भारत सरकार अपने इस रुख पर पूरी तरह से कायम है कि आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते। इस्लामाबाद में मौजूद भारतीय प्रतिनिधिमंडल का पूरा ध्यान केवल संगठन के एजेंडे तक ही सीमित है। इस यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार की द्विपक्षीय वार्ता का कोई कार्यक्रम निर्धारित नहीं किया गया है। यह स्पष्ट करता है कि भारत केवल एक जिम्मेदार सदस्य देश के नाते अपनी अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहा है। पाकिस्तान की ओर से भी इस आयोजन को सफल बनाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की मेजबानी उसके लिए एक बड़ी जिम्मेदारी है।

आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि मुख्य शिखर सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व किस स्तर पर किया जाता है। बहरहाल, वरिष्ठ अधिकारी का यह दौरा यह साबित करता है कि नई दिल्ली अपनी कूटनीतिक प्राथमिकताओं को लेकर स्पष्ट है। वह एक तरफ सीमा पार से प्रायोजित आतंकवाद का वैश्विक स्तर पर विरोध करना जारी रखेगी, और दूसरी तरफ क्षेत्रीय मंचों पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराती रहेगी जो उसके रणनीतिक हितों के लिए आवश्यक हैं।