भारत-जापान रक्षा संबंध: ‘यूनिकॉर्न’ नौसैनिक रडार समझौते को जल्द लागू करने पर जापान का जोर

विवेक ओझा
जापानी प्रधानमंत्री की हालिया भारत यात्रा के दौरान हुए तकनीक हस्तांतरण समझौते को तेजी से अमल में लाने के लिए टोक्यो ने नई दिल्ली से अपनी आंतरिक प्रशासनिक प्रक्रियाओं में तेजी लाने का आग्रह किया है, जो दोनों देशों की बढ़ती सामरिक साझेदारी का प्रतीक है।
भारत और जापान के बीच रणनीतिक और रक्षा संबंधों में बढ़ती प्रगाढ़ता के बीच, टोक्यो ने नई दिल्ली से एक अहम रक्षा समझौते पर जल्द से जल्द अमल सुनिश्चित करने का आग्रह किया है। जापान सरकार ने मंगलवार को भारत से अनुरोध किया है कि वह ‘यूनिकॉर्न’ (एकीकृत जटिल रेडियो एंटीना) नौसैनिक रडार प्रणाली के संबंध में अपनी आंतरिक आधिकारिक और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को तेजी से पूरा करे। यह अत्याधुनिक रडार तकनीक दोनों देशों के बीच समुद्री सुरक्षा और रक्षा तकनीकी सहयोग को एक नई दिशा देने वाली है। गौरतलब है कि इस बहुचर्चित उच्च तकनीक के हस्तांतरण को लेकर दोनों देशों के बीच समझौते पर इसी साल जुलाई महीने में जापानी प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची की भारत यात्रा के दौरान हस्ताक्षर किए गए थे। अब जापान चाहता है कि जरूरी कागजी कार्यवाही और अंतिम विभागीय मंजूरी के काम को बिना किसी विलंब के पूरा किया जाए ताकि इस प्रणाली को भारतीय नौसेना के बेड़े में जल्द से जल्द शामिल करने का रास्ता पूरी तरह से साफ हो सके।
यह रक्षा समझौता ऐसे समय में आकार ले रहा है जब वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य में बहुत तेजी से बदलाव देखने को मिल रहा है। पश्चिमी एशिया और पूर्वी यूरोप में चल रहे लंबे संघर्षों के साथ-साथ हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती आक्रामकता, नौसैनिक विस्तार और दबदबे की नीतियों ने क्षेत्रीय स्थिरता के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। इन भू-राजनीतिक उथल-पुथल को देखते हुए जापान अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा नीतियों और रक्षा रणनीति में अभूतपूर्व बदलाव कर रहा है। वह अपनी सैन्य क्षमता को केवल आत्मरक्षा तक सीमित रखने की पारंपरिक शांतिवादी नीति से बहुत आगे बढ़कर अब आधुनिक रक्षा उपकरणों के निर्यात और मित्र देशों के साथ सामरिक साझेदारी को मजबूती देने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। भारत के साथ यूनिकॉर्न रडार प्रणाली साझा करना इसी व्यापक कूटनीतिक और सामरिक नीति का एक अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो हिंद महासागर क्षेत्र में भारतीय नौसेना की निगरानी क्षमता को कई गुना बढ़ा देगा।
यूनिकॉर्न रडार प्रणाली की विशेषताओं की बात करें तो यह पारंपरिक रडार प्रणालियों से काफी अलग और उन्नत मानी जाती है। इसके आकार और बनावट को इस प्रकार विशेष रूप से डिजाइन किया गया है कि यह दुश्मन के रडार की पकड़ में आसानी से नहीं आता, जिससे युद्धपोत की छिपने की क्षमता में भारी इजाफा होता है। एक ही एंटीना के भीतर कई तरह के संचार और निगरानी सेंसरों को समेटने वाली यह नवीनतम तकनीक युद्धपोत के ऊपरी ढांचे को हल्का और युद्ध के दौरान कहीं अधिक प्रभावी बनाती है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय नौसेना के लिए यह जापानी तकनीक एक गेम-चेंजर साबित हो सकती है, क्योंकि यह उसे विशाल समुद्री सीमा में किसी भी संदिग्ध गतिविधि या घुसपैठ की अत्यंत सटीक और तेज जानकारी वास्तविक समय में उपलब्ध कराएगी।
भारत और जापान के बीच केवल तकनीक के स्तर पर ही नहीं, बल्कि सक्रिय सैन्य अभ्यासों के मोर्चे पर भी अभूतपूर्व सहयोग देखने को मिल रहा है। दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच हाल ही में आयोजित द्विपक्षीय समुद्री युद्धाभ्यास ‘वीर गार्जियन दो हजार छब्बीस’ पिछले सप्ताह ही सफलतापूर्वक संपन्न हुआ है। इस सैन्य अभ्यास में दोनों देशों के नौसैनिकों ने अपनी युद्धक तैयारियों और आपसी समन्वय का बेहतरीन प्रदर्शन किया। इसके अलावा, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन बनाए रखने के लिए संकल्पित ‘क्वाड’ समूह के बहुराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यास ‘मालाबार’ का भी इसी साल के अंत से पहले आयोजन होने वाला है। जापान का स्पष्ट मानना है कि इन संयुक्त सैन्य अभ्यासों और मजबूत तकनीकी गठजोड़ के जरिए समान विचारधारा वाले लोकतांत्रिक देश समुद्र में अबाध और सुरक्षित व्यापार सुनिश्चित कर सकते हैं। दोनों देशों के रक्षा मंत्रालयों के बीच इस अहम रडार समझौते के जल्द क्रियान्वयन से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह कड़ा संदेश भी जाएगा कि भारत और जापान किसी भी क्षेत्रीय खतरे या आक्रामकता का मिलकर डटकर सामना करने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं।