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उत्तर प्रदेश में आर्थिक सुशासन की नींव बनता अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला

राघवेंद्र प्रताप सिंह

जब भी मेले शब्द का इस्तेमाल होता है तो बचपन की सुनहरी यादें बरबस ही सामने आ जाती हैं। बचपन में हम सभी के लिए मेला केवल हर्ष उल्लास का क्षण नहीं बल्कि हमारी कई उम्मीदों, आकांक्षाओं को संजोने वाला हुआ करता था। हम सब जैसे जैसे बड़े हुए हमारे सामने मेले के नए रूप रंग भी सामने आने लगे लेकिन तब से लेकर अगर कुछ न बदला तो वो था हमारी उम्मीद और आकांक्षाएं। आज उत्तर प्रदेश वासियों की उन्हीं उम्मीदों आकांक्षाओं को अंतिम परिणति तक पहुंचाने का ईमानदार प्रयास करने एक और मेला हुआ और वो मेला है उत्तर प्रदेश अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला। यूपीआईटीएस ( इस मेले ) का चौथा संस्करण समाप्त हो चुका है। पांच दिन चले इस आयोजन में देश-दुनिया के खरीदारों और प्रदेश के उद्यमियों के बीच हजारों कारोबारी बैठकें हुईं। देश का सबसे अधिक आबादी वाला राज्य होने के कारण उत्तर प्रदेश खुद एक बड़ा उपभोक्ता बाजार है। साथ ही यहां उत्पादन का भी बड़ा आधार मौजूद है। ऐसे में अगर राज्य निर्यात आधारित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ता है तो इसका असर राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा। विकसित भारत के लक्ष्य में उत्तर प्रदेश की भूमिका महत्वपूर्ण है। एक समय देश में आर्थिक सुस्ती और औद्योगिक पिछड़ेपन की पहचान माने जाने वाले उत्तर प्रदेश ने पिछले कुछ सालों में विकास की एक नई और अभूतपूर्व कहानी लिखी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी दूरदर्शी सोच, नीतिगत स्पष्टता और कुशल नियोजन से राज्य की विशाल औद्योगिक क्षमता को एक तप की तरह धरातल पर उतारा है। इस आर्थिक क्रांति के केंद्र में रहा है प्रदेश का सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र, जिसे ‘एक जिला एक उत्पाद’ (ओडीओपी) योजना के जरिए न केवल नया जीवन मिला, बल्कि ‘उत्तर प्रदेश अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला’ (यूपीआईटीएस) जैसे वैश्विक मंच के माध्यम से विश्व व्यापार के पटल पर प्रमुख ‘ग्लोबल एक्सपोर्ट हब’ के रूप में स्थापित भी किया गया।

यह व्यापार मेला प्रदेश और देश की सामाजिक आर्थिक सांस्कृतिक प्रगति को एक नया मंच देने वाला आयोजन था। इसमें राज्य में निवेश के अवसर बढ़ाने, रोजगार सृजन, स्थानीय अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहन, धारणीय विकास, परंपरा, हुनर के संरक्षण, खाद्य संस्कृति के संरक्षण को एक नई ऊर्जा मिली। मेले के दौरान लगभग 6,500 करोड़ रुपये मूल्य के 4,400 समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए (जो पिछले वर्ष की तुलना में 142.54% अधिक है)। कारोबारी पूछताछ और बैठकों के आधार पर करीब 15,500 करोड़ रुपये के संभावित व्यापार का अनुमान लगाया गया है। इस आयोजन में कुल 41,500 बी2बी (बिजनेस-टू-बिजनेस) बैठकें हुईं। इस वर्ष छह देश—रूस, ऑस्ट्रिया, जापान, सिंगापुर, बेलारूस और वियतनाम भागीदार देश के रूप में शामिल हुए। पहली बार 75 जिलों के पारंपरिक और खास व्यंजनों को बढ़ावा देने के लिए ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन कुज़ीन’ (ODOC) की विशेष पहल और वेबसाइट लॉन्च की गई, जिसे विदेशी खरीदारों ने भी खूब पसंद किया। 5 दिवसीय इस मेले में कुल 5,98,693 (लगभग 5.98 लाख) आगंतुकों और व्यापारिक खरीदारों ने शिरकत की। यूपीआईटीएस अब केवल उत्पादों की प्रदर्शनी नहीं रहा, बल्कि उत्तर प्रदेश की बदलती आर्थिक पहचान और वैश्विक बाजार से जुड़ने की कोशिश का बड़ा मंच बन गया है।

आज उत्तर प्रदेश अपने विजनरी मुख्यमंत्री के आर्थिक सुशासन के विजन से आगे बढ़ रहा है और अपनी क्षमताओं और संभावनाओं को लगातार खोज भी रहा है और उन्हें साकार भी कर रहा है। चीजें साकार कैसे हो रही हैं, कैसे आकार ले रही हैं, उसके लिए उत्तर प्रदेश की इकोनॉमिक मोबिलिटी को देखना बनता है। उत्तर प्रदेश ने तमाम क्षेत्रों में अपनी बेजोड़ विनिर्माण क्षमता, सेवा प्रदाता की क्षमता का प्रदर्शन किया है और इसीलिए आज दुनिया भर के निवेशक ये मानने लगे हैं कि उत्तर प्रदेश एक ग्रोथ इंजन के रूप में उभर चुका है।

एमएसएमई विभाग के विशेष सचिव की विशेष आयोजन में रही अहम भूमिका:

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कर्मठ और परिणाम उन्मुख ब्यूरोक्रेट्स में से एक शिशिर सिंह जो की एमएसएमई विभाग के विशेष सचिव हैं, ने इस व्यापार मेले के सफल आयोजन में दिन रात एक कर दिया और अपने विभाग की यूपी की अर्थव्यवस्था में भूमिका के महत्व को समझते हुए इस कार्यक्रम को एक इवेंट मात्र नहीं रहने दिया। इस सफलता के पीछे आयोजन की वह रणनीति भी महत्वपूर्ण रही, जिसमें प्रदेश के छोटे कारोबारियों और एमएसएमई को सीधे देश-दुनिया के खरीदारों से जोड़ने पर जोर रहा। विशेष सचिव शिशिर की भूमिका इसी कड़ी में महत्वपूर्ण रही। कोशिश यह रही कि ट्रेड शो केवल उत्पादों की प्रदर्शनी न बने, बल्कि कारोबारी संपर्क और बाजार उपलब्ध कराने का मंच बने। ट्रेड शो में अलग-अलग जिलों से आई महिला उद्यमियों ने अपने स्टॉल संभाले, उत्पादों की जानकारी दी और खरीदारों से सीधे कारोबार की बातचीत की। विशेष सचिव शिशिर उनके उत्साह वर्धन के लिए हर जगह खड़े दिखाई दिए। स्थानीय महिला उद्यमिता का अंतरराष्ट्रीय बाजार से जुड़ना आयोजन की उल्लेखनीय उपलब्धियों में रहा।

व्यापार मेले की आत्मा के रूप में दिखा‘एक ज़िला, एक उत्पाद’ :

इस मेले की आत्मा ‘एक ज़िला, एक उत्पाद’ (ओडीओपी) की अवधारणा है, जो योगी सरकार की सबसे मौलिक आर्थिक पहलों में गिनी जाती है। इसके पीछे सीधी-सी, लेकिन गहरी समझ है: हर ज़िले के पास कोई न कोई विशिष्ट हुनर है और उसे पहचान, ब्रांड व बाज़ार मिलना चाहिए। भदोही की कालीन हो या मुरादाबाद का पीतल, वाराणसी का रेशम हो या लखनऊ की चिकनकारी, इन परंपराओं को पीढ़ियों ने संवारा और आगे बढ़ाया है, लेकिन बाज़ार तक सीधी पहुंच के अभाव में इनका पूरा मूल्य इन्हें गढ़ने वाले कारीगर तक नहीं पहुंच पाता था। ओडीओपी की इस पहल ने प्रदेश के हर ज़िले की स्थानीय विशेषता को राज्य की साझा पूंजी में बदल दिया। इस बार भी यह पहल मेले का सबसे आकर्षक केंद्र बनकर उभरी। इसी कड़ी में नए जुड़े ‘ओडीओसी’ की अनदेखी नहीं की जा सकती। ओडीओपी की तरह यह भी यूपी के आर्थिक भविष्य का हिस्सा है और चूंकि इस ट्रेड शो में सभी 75 जिलों से ओडीओसी की छतरी तले उद्यमियों की पहुंच हुई है, यह इस बात का प्रमाण है कि राज्य का आर्थिक भूगोल नए सिरे से लिखा जा रहा है। ट्रेड शो के दौरान ओडीओसी ने वॉलमार्ट वृद्धि, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पैकेजिंग और बिड़ला एयरकॉन जैसे दिग्गज संस्थानों के साथ एमओयू (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके अतिरिक्त, CFTRI (सेंट्रल फूड टेक्नोलॉजिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट) और FSSAI भी इस मुहिम में आधिकारिक साझेदार के रूप में शामिल हुए हैं।

ओडीओसी के तहत हुए ये समझौते केवल उत्पाद प्रदर्शन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह खाद्य उत्पादों की पूरी वैल्यू चेन को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम हैं। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पैकेजिंग की मदद से स्थानीय उत्पादों की शेल्फ-लाइफ बढ़ाई जाएगी और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप पैकेजिंग तैयार होगी।CFTRI तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान करेगा, जबकि FSSAI की भागीदारी से खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता मानकों को मजबूती मिलेगी। वॉलमार्ट वृद्धि के साथ हुए एमओयू से छोटे और स्थानीय उत्पादकों को वॉलमार्ट के विशाल ग्लोबल रिटेल नेटवर्क तक सीधी पहुंच मिलेगी।

ओडीओसी पवेलियन में पूरे उत्तर प्रदेश के खानपान को 6 मुख्य सांस्कृतिक खंडों में बांटकर प्रदर्शित किया गया था—‘ब्रज की मिठास’, ‘अवध का जायका’, ‘रुहेली रसधार’, ‘बुंदेली बहार’, ‘पश्चिमी परिमल’ और ‘पुरबिया स्वाद’। इस पहल का सीधा फायदा जमीनी स्तर के पारंपरिक खाद्य उद्यमियों को मिला है। मेला अवधि के दौरान ‘गोंडा कचौड़ी जंक्शन’ को 150 से अधिक बी2बी पूछताछ और हजारों की प्रत्यक्ष बिक्री मिली, वहीं आजमगढ़ की ‘लौंगलता’, रामपुर के ‘हब्शी हलवा’, उन्नाव के सक्षम एंटरप्राइजेज और अयोध्या के ‘मौर्य मिष्ठान भंडार’ जैसे उत्पादों को वैश्विक खरीदारों से जबरदस्त प्रतिसाद मिला।

हाथरस की हींग और रबड़ी का जायका बने व्यापार मेले की शान:

ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में आयोजित यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो के तीसरे संस्करण में हाथरस की हींग और रबड़ी का जायका देश-विदेश से आए आगंतुकों को खूब भाया। पांच दिनों तक चले इस मेले में छह हजार से अधिक मेहमानों ने इन दोनों उत्पादों का जायका लिया। मेले में जिले से रबड़ी, हींग व अन्य स्थानीय उत्पादों के कुल सात स्टॉल लगाए गए थे। 10 हजार से अधिक लोगों ने हाथरस की असली खुशबूदार हींग, हींग बटी, हींग पेड़ा और हींगोली की जमकर खरीदारी की। मेले से लौटे कारोबारियों के चेहरे अच्छे कारोबार से खिले हुए हैं। मेले में हींग के पांच और रबड़ी का एकमात्र स्टॉल लगाया गया था।

पूरे आयोजन के दौरान इन स्टॉलों पर खरीदारी और स्वाद चखने के लिए खरीदारों की कतारें लगी रहीं। दिल्ली-एनसीआर, महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश से आए व्यापारियों के साथ-साथ कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने आगामी त्योहारों पर थोक आपूर्ति के लिए हाथरस के उद्यमियों से संपर्क साधा है। कई कॉरपोरेट कंपनियों ने इस दिवाली पर उपहार के रूप में हाथरस की रबड़ी और पारंपरिक मिठाइयों की बल्क में खरीद करने की सहमति दी है।

एक दिन में 1.10 लाख रुपये की रबड़ी बिकी
उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो का एक जनपद एक व्यंजन (ओडीओसी) पवेलियन पहली बार में ही सुपरहिट साबित हुआ। ग्रेटर नोएडा के एक्सपो मार्ट में पांच दिनों तक चले व्यापार मेले में आने वाले करीब 6 लाख आगंतुकों ने उत्तर प्रदेश के पारंपरिक व्यंजनों का जमकर लुत्फ उठाया। हाथरस नयागंज के हन्नो लाला रबड़ी वाले रोजाना 200 से 300 किग्रा रबड़ी बेचते है लेकिन ट्रेड शो में पहले ही दिन 110 किग्रा रबड़ी बिक गई। जिसकी कीमत 1.10 लाख रुपये थी।
अकेले हमारे स्टॉल से करीब पांच हजार से अधिक लोगों ने हींग, हींग बटी, हींग पेड़ा और हींगोली की खरीदारी की। प्रदेश सरकार के मंत्री भूपेंद्र चौधरी व नंद गोपाल गुप्ता नंदी और सुप्रसिद्ध शेफ हरपाल सिंह सुखी सहित कई प्रमुख हस्तियों ने हमारे स्टॉल पर पहुंचकर हींग खरीदी। आने वाले समय में बड़े थोक ऑर्डर मिलने की पूरी उम्मीद है।

जैवविविधता को सम्मान और धारणीय विकास को गति:

उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो के पांचों दिन वन विभाग का आउटलेट युवाओं के आकर्षण का केंद्र बना रहा। अंतिम दिन भी यहां पहुंचे युवा उत्तर प्रदेश की वन्यजीव और वनस्पति संपदा को करीब से जानने में जुटे रहे। हाथी, हिरण और सांपों की विभिन्न प्रजातियों से लेकर सागौन, शीशम, बबूल, खैर और अर्जुन जैसे पेड़ों की जानकारी ने युवाओं को यह सोचने पर मजबूर किया कि जिस प्रदेश को वे अब तक उद्योग, निवेश और एक्सप्रेसवे के लिए जानते थे, उसकी प्रकृति भी उतनी ही समृद्ध है।

मेरठ की छात्रा सुनैना ने कहा कि ट्रेड शो में वन विभाग के आउटलेट पर आकर उसे पहली बार प्रदेश की वन संपदा के बारे में इतनी जानकारी मिली। सोनभद्र, ललितपुर, लखीमपुर और बहराइच में संचालित 22 वन धन केंद्रों के बारे में जानना उसके लिए बिल्कुल नया अनुभव था। उसने कहा, हमें अपने ही प्रदेश के बारे में बहुत सी ऐसी बातें यहां आकर पता चलीं, जिनकी पहले जानकारी नहीं थी।

पांच दिन तक चले प्रदर्शन में मेरठ, लखनऊ और प्रयागराज क्षेत्र की वन संपदा को भी अलग-अलग तरीके से सामने रखा गया। युवाओं को बताया गया कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ क्षेत्र में बबूल, सागौन, खैर और अर्जुन जैसी प्रजातियां प्रमुखता से मिलती हैं, जबकि प्रदेश के दूसरे हिस्सों में वनस्पतियों की अलग विविधता देखने को मिलती है। इससे युवाओं को प्रदेश के भौगोलिक क्षेत्रों के साथ वनस्पति विविधता को समझने का अवसर मिला।

वन्यजीवों की जानकारी के साथ जंगलों में आग लगने के कारण और मानवीय लापरवाही से होने वाले नुकसान को भी समझाया गया। छोटी-सी गलती से जंगल और वन्यजीवों को होने वाले नुकसान के प्रति युवाओं को जागरूक किया गया। वन महोत्सव और पौधारोपण के जरिए हरियाली बढ़ाने के प्रयासों की जानकारी भी दी गई।

आउटलेट पर गंगा एक्सप्रेसवे के दोनों ओर पौधरोपण और हरित क्षेत्र विकसित करने की योजना की जानकारी भी युवाओं को दी गई। इसके साथ वन संरक्षण, वन महोत्सव और आरा मशीनों की संख्या में कमी जैसे प्रयासों को भी प्रदर्शित किया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार में प्रदेश के औद्योगिक विकास के साथ पर्यावरण और वन संरक्षण को भी प्राथमिकता देने का संदेश ट्रेड शो में दिखाई दिया।

कारोबारी बैठकों से लेकर MoU तक में बढ़ोतरी :

फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशंस (एफआईईओ) के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस बार कुल 41,500 बी2बी एवं व्यावसायिक बैठकें दर्ज की गईं। इनमें से 13,500 बैठकें रिवर्स बायर्स-सेलर्स मीट (आरबीएसएम) क्षेत्र में हुईं, जबकि मुख्य प्रदर्शनी क्षेत्र में करीब 28,000 कारोबारी संवाद दर्ज किए गए।

इन बैठकों के जरिए देश-विदेश के खरीदारों ने राज्य के उद्यमियों और निर्माताओं के साथ सीधे दीर्घकालिक व्यापारिक साझेदारियों की रूपरेखा तैयार की। पांच दिनों में ट्रेड शो में कुल 5,98,693 दर्शकों और व्यावसायिक खरीदारों की आमद दर्ज की गई, जिसमें 1,74,990 घरेलू बिजनेस बायर्स और 4,23,703 आम दर्शक शामिल रहे।

पिछले वर्ष की तुलना में हर प्रमुख कारोबारी पैमाने पर भारी उछाल देखने को मिला। वर्ष 2025 में दर्ज 31,650 बी2बी बैठकों की तुलना में इस बार 31.12 प्रतिशत की वृद्धि के साथ यह संख्या 41,500 पर पहुंच गई। विदेशी खरीदारों के साथ आरबीएसएम क्षेत्र की बैठकों में 123.1 प्रतिशत की जोरदार छलांग दर्ज की गई, जो 6,050 से बढ़कर 13,500 हो गईं।

वहीं मुख्य प्रदर्शनी क्षेत्र की बैठकों में 9.38 प्रतिशत की बढ़त रही। हस्ताक्षरित एमओयू की संख्या 3,900 से 12.82 प्रतिशत बढ़कर 4,400 तक पहुंची। सबसे उल्लेखनीय बढ़त एमओयू के अनुमानित मूल्य में दर्ज की गई, जो 2,680 करोड़ से 142.54 प्रतिशत उछलकर 6,500 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। बिजनेस इन्क्वायरी में भी 24 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ संभावित कारोबार 12,500 करोड़ रुपये से बढ़कर 15,500 करोड़ रुपये आंका गया।

स्थानीय स्तर पर उत्पादन और गुणवत्ता में सुधार के बाद, अगला बड़ा कदम इन उत्पादों को वैश्विक खरीदारों के सामने प्रस्तुत करना था। इसी सोच के साथ सीएम योगी ने ‘उत्तर प्रदेश अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला’ की नींव रखी। ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपो मार्ट में आयोजित यह व्यापार मेला महज एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि यूपी के आर्थिक रूपांतरण का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय मंच साबित हुआ है। यूपीआईटीएस ने दुनिया भर के आयातकों, निवेशकों और व्यापारिक प्रतिनिधियों को एक छत के नीचे ला खड़ा किया। इस मेले में विभिन्न देशों के सैकड़ों अंतरराष्ट्रीय खरीदारों का पंजीकरण राज्य के उत्पादों में विश्व के गहरे विश्वास को दर्शाता है। इस साल ऑस्ट्रिया, बेलारूस, जापान, रूस, सिंगापुर और वियतनाम जैसे अग्रणी राष्ट्रों की पार्टनर कंट्री के रूप में सहभागिता राज्य के कूटनीतिक और व्यापारिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाएगी। यह मेला न केवल आम नागरिकों को स्थानीय उत्पादों से जोड़ेगा, बल्कि डेढ़ लाख से अधिक व्यापारिक प्रतिनिधियों की उपस्थिति स्थानीय उद्यमियों को अंतरराष्ट्रीय व्यापार सौदे हासिल करने का सीधा अवसर प्रदान करेगी।