एशियन गेम्स 2026: दक्षिण कोरिया को धूल चटाकर भारतीय महिला तीरंदाजों ने रचा इतिहास, रिकर्व आर्चरी में पहली बार जीता गोल्ड

सरिता त्रिपाठी
भारतीय महिला रिकर्व तीरंदाजी टीम ने एशियन गेम्स 2026 में तीरंदाजी की सबसे बड़ी महाशक्ति दक्षिण कोरिया को रोमांचक फाइनल मुकाबले में हराकर पहली बार स्वर्ण पदक पर अपना कब्जा जमा लिया है। कुमकुम मोहाद और अंकिता भकत का प्रदर्शन इस जीत में निर्णायक रहा।
एशियाई खेलों (एशियन गेम्स 2026) के खेल के मैदान से भारत के लिए एक बेहद गौरवशाली और ऐतिहासिक खबर सामने आई है। भारतीय महिला रिकर्व तीरंदाजी टीम ने अपने अचूक निशानों और बेहतरीन खेल के दम पर एक नया स्वर्णिम इतिहास रच दिया है। भारतीय तीरंदाजों ने फाइनल के बेहद रोमांचक और दबाव भरे मुकाबले में तीरंदाजी की विश्व शक्ति माने जाने वाले दक्षिण कोरिया को करारी शिकस्त देकर ऐतिहासिक गोल्ड मेडल (स्वर्ण पदक) जीत लिया है। एशियाई खेलों के लंबे इतिहास में यह पहला अवसर है जब भारत ने महिला रिकर्व आर्चरी स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने का यह अभूतपूर्व कारनामा किया है। इस बड़ी जीत के साथ ही देश भर के खेल प्रेमियों में जश्न का माहौल है।
इस खिताबी और बहुप्रतीक्षित फाइनल मुकाबले में भारतीय टीम की ओर से कुमकुम मोहाद और अंकिता भकत ने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए शानदार खेल दिखाया। पूरे टूर्नामेंट के दौरान इन दोनों महिला खिलाड़ियों का संयम, लक्ष्य पर ध्यान और तकनीकी कौशल वाकई देखने लायक था। फाइनल मैच की शुरुआत से ही दोनों देशों की टीमों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली। दक्षिण कोरियाई तीरंदाजों ने शुरुआत में दबाव बनाने की कोशिश की, लेकिन भारतीय बेटियों ने मुश्किल क्षणों में भी खुद को शांत रखा और सटीक निशाने लगाए। दक्षिण कोरियाई टीम, जिसका तीरंदाजी के वैश्विक और एशियाई मंच पर हमेशा से एकतरफा दबदबा रहा है, उसे हराना भारतीय टीम के लिए एक बहुत बड़ी मनोवैज्ञानिक और ऐतिहासिक विजय मानी जा रही है।
मैच के दौरान एक समय ऐसा भी आया जब दोनों टीमों के बीच अंकों का फासला बेहद कम हो गया था और मुकाबला किसी भी करवट बैठ सकता था। लेकिन भारतीय महिला रिकर्व टीम ने अपनी वर्षों की कड़ी मेहनत, सघन प्रशिक्षण और मजबूत मानसिक संतुलन का पूरा उपयोग करते हुए अंतिम सेटों में अपने खेल के स्तर को और ऊंचा कर दिया। दक्षिण कोरियाई तीरंदाजों ने वापसी करने की भरपूर कोशिश की, लेकिन कुमकुम मोहाद और अंकिता भकत के अचूक निशानों के आगे उनकी एक न चली[cite: 24, 25]। इन दोनों खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन ने यह साबित कर दिया है कि भारतीय तीरंदाज अब दुनिया की किसी भी शीर्ष टीम को हराने का माद्दा रखते हैं।
खेल विशेषज्ञों का मानना है कि दक्षिण कोरिया जैसी मजबूत टीम को उसी के सबसे पसंदीदा और पारंपरिक खेल में हराना भारतीय खेल इतिहास के सबसे सुनहरे पलों में से एक है। इस ऐतिहासिक स्वर्ण पदक से देश में तीरंदाजी के प्रति युवाओं का आकर्षण और भी तेजी से बढ़ेगा। इसके अलावा, एशियन गेम्स 2026 में भारत के कुल पदकों की संख्या में भी इस बड़ी जीत से भारी इजाफा हुआ है। कुमकुम मोहाद, अंकिता भकत और पूरी टीम का यह शानदार प्रदर्शन निश्चित रूप से आने वाले लंबे समय तक तीरंदाजी के मैदान में एक मिसाल के तौर पर याद रखा जाएगा और भविष्य के खिलाड़ियों को प्रेरित करेगा।