“पाप से नफरत करो, पापी से नहीं”: गांधी जी के विचार बदल देंगे जिंदगी देखने का नजरिया, 157वीं जयंती पर विशेष

अभिषेक सिंह
भारत के इतिहास में 2 अक्टूबर का दिन एक बेहद खास मुकाम रखता है। सत्य और अहिंसा के बल पर देश को आजादी दिलाने वाले राष्ट्रपिता के सिद्धांत आज की युवा ‘जेन जेड’ पीढ़ी के लिए भी एक सटीक और सच्चा मार्गदर्शन कर रहे हैं।
भारत के समृद्ध इतिहास में 2 अक्टूबर का दिन एक बेहद खास और ऐतिहासिक मुकाम रखता है। इसी दिन साल 1869 में गुजरात के पोरबंदर में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का जन्म हुआ था। इस वर्ष पूरा देश बापू की 157वीं जयंती को एक बड़े राष्ट्रीय पर्व के तौर पर मना रहा है। इस विशेष अवसर पर स्कूल-कॉलेज से लेकर सभी सरकारी दफ्तरों तक में लोग अपने प्रिय ‘बापू’ को याद करते हैं और उनके द्वारा दिखाए गए सत्य व अहिंसा के मार्ग पर चलने का संकल्प लेते हैं। महात्मा गांधी के विचार हमें न सिर्फ जीवन की हर मुश्किल से दृढ़ता से लड़ने की प्रेरणा देते हैं, बल्कि हमारे समाज को एक बेहतर, सहिष्णु और शांतिपूर्ण जगह बनाने में भी हमारा उचित मार्गदर्शन करते हैं। “पाप से नफरत करो, पापी से नहीं” जैसे उनके अनमोल और सशक्त विचार आज भी लोगों की जिंदगी देखने का नजरिया बदलने की पूरी ताकत रखते हैं।
गांधी जी के राजनीतिक और सामाजिक संघर्ष की शुरुआत मुख्य रूप से दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद का कड़ा विरोध करने के साथ हुई थी। वहां शुरू हुआ उनका यह शांतिपूर्ण लेकिन दृढ़ संघर्ष आगे चलकर भारत की आजादी के एक विशाल जन आंदोलन की शक्ल ले बैठा। चंपारण का ऐतिहासिक सत्याग्रह हो, देश को एकजुट करने वाला असहयोग आंदोलन हो, नमक कानून तोड़ने वाला दांडी मार्च हो या फिर अंग्रेजी हुकूमत की जड़ें हिला देने वाला ‘भारत छोड़ो’ का नारा- बापू ने हर कदम पर आगे रहकर देश का कुशल नेतृत्व किया। उनकी सबसे बड़ी खूबी और ताकत यही थी कि उन्होंने दुनिया की सबसे ताकतवर और क्रूर अंग्रेजी हुकूमत को बिना कोई भी हथियार उठाए, सिर्फ सत्य और अहिंसा की अचूक ताकत से घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने पूरी दुनिया को यह दिखा दिया कि बिना हथियार उठाए भी आजादी की बड़ी से बड़ी जंग जीती जा सकती है।
अक्सर यह सवाल उठता है कि आधुनिकता की इस अंधी दौड़ और आज के इस तकनीकी दौर में बापू के सिद्धांत कितने प्रासंगिक हैं? इसका जवाब यह है कि चाहे हमारी पुरानी पीढ़ी हो या आज के दौर की युवा ‘जेन जेड’ पीढ़ी, महात्मा गांधी के विचार हर किसी की जिंदगी में बिल्कुल सटीक बैठते हैं। बापू का अपना व्यक्तिगत जीवन बेहद सादा और दिखावे से कोसों दूर था, लेकिन उनके विचारों और सिद्धांतों- विशेषकर सत्य, स्वदेशी, समानता और इंसानियत ने पूरी दुनिया के विचारकों पर अपनी एक बेहद गहरी छाप छोड़ी है। आज जब दुनिया भर में हिंसा, तनाव और असहिष्णुता का माहौल देखने को मिलता है, तब उनके ये शांतिपूर्ण सिद्धांत जीवन को एक नई और सकारात्मक दिशा देने में अत्यधिक सहायक सिद्ध होते हैं। ‘पाप से नफरत करो, पापी से नहीं’ का उनका यह मूल मंत्र लोगों को सिखाता है कि हमें बुराई को खत्म करना है, न कि बुराई करने वाले इंसान को। बापू का पूरा जीवन और उनका अडिग संघर्ष हमें यह भी स्पष्ट रूप से सिखाता है कि अगर किसी इंसान के अंदर दृढ़ इच्छाशक्ति और सत्य का असीम बल हो, तो वह दुनिया के बड़े से बड़े अन्याय, अत्याचार और शोषण को भी आसानी से हरा सकता है। आज 157वीं जयंती के पावन अवसर पर, उनके इन्हीं उच्च और मानवीय आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करने की सबसे अधिक आवश्यकता है।