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अब पुराने रिकॉर्ड न होने पर भी बन सकेंगे मतदाता, फॉर्म-6 के नए नियम से गोरखपुर के लाखों वोटरों को फायदा

राघवेंद्र प्रताप सिंह

निर्वाचन आयोग ने 2027 विधानसभा चुनाव से पहले फॉर्म-6 के साथ 2003 की मतदाता सूची से जुड़े अतिरिक्त घोषणा पत्र की अनिवार्यता खत्म कर दी है। इस फैसले से विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान में मतदाता सूची से बाहर हुए लाखों लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची को शुद्ध करने और नए मतदाताओं को जोड़ने के लिए एक बेहद अहम फैसला लिया है। आयोग ने फॉर्म-6 के साथ 2003 की मतदाता सूची से जुड़े अतिरिक्त घोषणा पत्र भरने की अनिवार्यता को पूरी तरह से समाप्त कर दिया है। इस बड़े बदलाव का सबसे सीधा और सकारात्मक असर उन लाखों मतदाताओं पर पड़ेगा, जिनके नाम पिछले दिनों चलाए गए विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के दौरान मतदाता सूची से काट दिए गए थे। इन लोगों को दोबारा अपना नाम जुड़वाने के लिए पुराने पारिवारिक मतदाता रिकॉर्ड या जानकारी जुटाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। अब अतिरिक्त बाध्यता हटने से नए युवाओं के साथ-साथ उन पुराने मतदाताओं के लिए भी मतदाता सूची में वापसी का रास्ता आसान हो गया है जो जरूरी अभिलेख उपलब्ध नहीं करा सके थे। हालांकि, आयु, नागरिकता और सामान्य निवास से जुड़े निर्धारित प्रमाण और अन्य कानूनी शर्तें पहले की तरह ही लागू रहेंगी।

गोरखपुर जिले के आंकड़ों पर नजर डालें तो एसआईआर अभियान से पहले यहां 36.66 लाख से अधिक मतदाता पंजीकृत थे। लेकिन इस सघन अभियान के दौरान 6.45 लाख से अधिक नाम सूची से हटा दिए गए। जिला स्तर पर एसआईआर के बाद जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, कुल 6,45,634 नाम कटने के बाद जिले में मतदाताओं की संख्या घटकर 30,20,908 रह गई थी। नाम कटने वालों में एक बहुत बड़ी संख्या ऐसे लोगों की थी, जो वास्तविक मतदाता तो थे, लेकिन 2003 की मतदाता सूची में अपने माता-पिता अथवा दादा-दादी के नाम से संबंधित जरूरी जानकारी या पुख्ता अभिलेख विभाग को उपलब्ध नहीं करा सके। विधानसभा क्षेत्रवार नाम कटने वाले आंकड़ों की बात करें तो चिल्लूपार विधानसभा क्षेत्र में सर्वाधिक 87,732 नाम हटाए गए हैं। इसके बाद बांसगांव में 83,062 और खजनी में 83,014 नाम कटे हैं। वहीं, गोरखपुर ग्रामीण में 70,763, कैंपियरगंज में 68,242, चौरी चौरा में 67,355, पिपराइच में 62,175, गोरखपुर शहर में 62,152 और सहजनवां में 61,130 मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं।

इन चौंकाने वाले आंकड़ों की अपनी एक गहरी राजनीतिक अहमियत भी है। दरअसल, गोरखपुर शहर की सीट को छोड़कर जिले की बाकी सभी आठ विधानसभा सीटों पर एसआईआर में हटे मतदाताओं की संख्या, 2022 के विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज करने वाले भाजपा प्रत्याशियों की जीत के अंतर से भी अधिक रही थी। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हटे गए सभी नाम वास्तविक और पात्र मतदाताओं के ही हैं, क्योंकि इनमें मृतक, स्थानांतरित और दोहरे पंजीकरण वाले नाम भी बड़ी संख्या में शामिल हैं। इसके बावजूद, राजनीतिक दल अब विधानसभा क्षेत्रवार ऐसे नामों का विस्तृत ब्योरा जुटाने में लग गए हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि इनमें वास्तविक मतदाता कितने हैं और कितनों को दोबारा जोड़ने की जरूरत है। अब फॉर्म-6 के नियमों में ढील मिलने से आगामी पुनरीक्षण अभियान में आवेदनों की संख्या तेजी से बढ़ने की उम्मीद है। निर्वाचन आयोग के नागरिक सेवा पोर्टल पर नए मतदाता पंजीकरण की सुविधा उपलब्ध है, ऐसे में आगामी अभियान मतदाता सूची के आकार और उसकी शुद्धता दोनों को गहराई से प्रभावित करेगा।