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पर्यावरण संरक्षण में मील का पत्थर: मुंबई का जवाहर द्वीप बना भारत का पहला पूर्ण रूप से प्लास्टिक-मुक्त ऑयल टर्मिनल

सरिता त्रिपाठी

मुंबई: भारत ने समुद्री पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ बंदरगाहों के निर्माण की दिशा में एक ऐतिहासिक और अभूतपूर्व कदम उठाया है। मुंबई तट के पास स्थित ‘जवाहर द्वीप’ (Jawahar Dweep) ने भारत का पहला पूर्ण रूप से प्लास्टिक-मुक्त ऑयल टर्मिनल बनने का गौरव हासिल किया है। पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय की दूरदर्शी ‘हरित बंदरगाह’ पहल और स्वच्छ भारत अभियान के तहत यह असाधारण उपलब्धि दर्ज की गई है। यह कदम न केवल महाराष्ट्र बल्कि पूरे देश के तटीय प्रबंधन के लिए एक प्रेरणादायक मॉडल के रूप में सामने आया है।

जवाहर द्वीप, जिसे पहले बुचर द्वीप के नाम से भी जाना जाता था, का मुख्य रूप से उपयोग बड़े तेल टैंकरों से कच्चा तेल उतारने और उसे मुंबई पोर्ट ट्रस्ट तथा रिफाइनरियों तक सुरक्षित रूप से पहुंचाने के लिए किया जाता है। समुद्र के ठीक बीच में स्थित होने के कारण, इस टर्मिनल पर किसी भी प्रकार के प्रदूषण का सीधा और गंभीर असर समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ता है। पिछले कई वर्षों से, यहाँ उपयोग होने वाले सिंगल-यूज़ प्लास्टिक, पानी की बोतलें, पैकेजिंग सामग्री और अन्य प्लास्टिक कचरे के कारण समुद्री जीवों, विशेषकर मछलियों, कछुओं और प्रवाल भित्तियों (Coral Reefs) को भारी नुकसान पहुंचने का खतरा बना रहता था। बारिश और तेज़ हवाओं के कारण यह प्लास्टिक कचरा सीधे अरब सागर में मिल जाता था, जिससे माइक्रोप्लास्टिक का प्रदूषण लगातार बढ़ रहा था।

इस गंभीर खतरे को भांपते हुए, पोर्ट प्रशासन और पर्यावरण विशेषज्ञों की एक संयुक्त टीम ने टर्मिनल को पूरी तरह से प्लास्टिक-मुक्त करने की एक विस्तृत और सख्त कार्ययोजना तैयार की। इस योजना के तहत टर्मिनल परिसर के भीतर किसी भी प्रकार के सिंगल-यूज़ प्लास्टिक के उपयोग, बिक्री और यहां तक कि प्रवेश पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है। कर्मचारियों और यहां आने वाले नाविकों के लिए सख्त नियम लागू किए गए हैं। प्लास्टिक की पानी की बोतलों की जगह टर्मिनल के विभिन्न हिस्सों में शुद्ध पेयजल के लिए स्थायी वाटर एटीएम और डिस्पेंसर स्थापित किए गए हैं। इसके अलावा, कैंटीन और कार्यालयों में भी प्लास्टिक के बर्तनों या पैकेजिंग का इस्तेमाल पूरी तरह से बंद कर दिया गया है।

पोर्ट प्रशासन ने इस नियम का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के लिए नियमित निगरानी और जांच दल भी गठित किए हैं। जो भी व्यक्ति या संस्था इन नियमों का उल्लंघन करते हुए पाई जाएगी, उस पर भारी जुर्माना लगाने का प्रावधान किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि सरकार के इस कदम से न केवल समुद्री प्रदूषण में भारी कमी आएगी, बल्कि यह देश के अन्य बंदरगाहों, टर्मिनलों और तटीय औद्योगिक क्षेत्रों के लिए भी एक बेहतरीन मिसाल कायम करेगा। पर्यावरणविदों ने सरकार के इस कदम का खुले दिल से स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि जल्द ही भारत के अन्य प्रमुख बंदरगाह भी इसी तर्ज पर प्लास्टिक-मुक्त होने की घोषणा करेंगे, जिससे भारत एक स्वच्छ और नीली अर्थव्यवस्था (Blue Economy) की ओर तेज़ी से बढ़ सकेगा।