इलेक्ट्रिक वाहनों के युग को मिलेगी नई रफ्तार: ‘PM E-DRIVE’ योजना से ईवी सेक्टर में आएगी क्रांति, प्रदूषण घटेगा और रोज़गार बढ़ेंगे

राघवेंद्र प्रताप सिंह
नई दिल्ली: जलवायु परिवर्तन की वैश्विक चुनौतियों से निपटने और देश में एक स्थायी, हरित परिवहन प्रणाली विकसित करने के लिए भारत सरकार ने एक बेहद महत्वाकांक्षी कदम उठाया है। इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की स्वीकार्यता को जन-जन तक पहुंचाने और बढ़ते शहरी प्रदूषण को नियंत्रित करने के स्पष्ट लक्ष्य के साथ, सरकार ने ‘पीएम ई-ड्राइव’ (PM E-DRIVE – PM Electric Drive Revolution in Innovative Vehicle Enhancement) योजना के तेज़ और प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया है। यह योजना भारत के ऑटोमोबाइल सेक्टर में गेम-चेंजर साबित होने वाली है, जो विशेष रूप से दोपहिया, तिपहिया और सार्वजनिक परिवहन के विद्युतीकरण पर केंद्रित है।
हाल के वर्षों में भारत में ईवी की मांग में बढ़ोतरी तो हुई है, लेकिन उच्च प्रारंभिक लागत और चार्जिंग स्टेशनों की कमी (Range Anxiety) के कारण आम नागरिक अभी भी पूरी तरह से इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने से हिचकिचा रहे हैं। ‘पीएम ई-ड्राइव’ योजना इन्हीं दोनों प्रमुख बाधाओं को दूर करने के लिए एक व्यापक रणनीति लेकर आई है। इस योजना के तहत, सरकार ईवी खरीदारों को, विशेषकर इलेक्ट्रिक स्कूटर और ई-रिक्शा खरीदने वालों को, सीधे और पारदर्शी तरीके से भारी सब्सिडी प्रदान करेगी। यह सब्सिडी वाहन की कीमत के समय ही लागू हो जाएगी, जिससे ईवी पारंपरिक पेट्रोल-डीजल वाहनों के मुकाबले काफी किफायती हो जाएंगे।
सब्सिडी के साथ-साथ, ‘पीएम ई-ड्राइव’ का दूसरा सबसे बड़ा फोकस पूरे देश में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का एक सघन और मजबूत जाल बिछाना है। योजना के अंतर्गत, अगले कुछ वर्षों में राजमार्गों, शहरों के प्रमुख चौराहों, पेट्रोल पंपों और आवासीय कॉलोनियों में हज़ारों नए सार्वजनिक फास्ट-चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। इसके लिए सरकार निजी कंपनियों के साथ सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के तहत काम कर रही है। सार्वजनिक परिवहन को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए राज्य परिवहन निगमों को हजारों नई इलेक्ट्रिक बसें खरीदने के लिए भी वित्तीय सहायता दी जाएगी।
आर्थिक दृष्टिकोण से भी ‘पीएम ई-ड्राइव’ एक मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है। सरकार का दृढ़ विश्वास है कि इस योजना से न केवल पेट्रोल और डीज़ल के भारी आयात बिल में कमी आएगी, बल्कि यह ‘मेक इन इंडिया’ को भी नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। भारत में ही ईवी बैटरी (लिथियम-आयन), मोटर और अन्य कलपुर्जों के स्वदेशी निर्माण को बढ़ावा देने के लिए विशेष आर्थिक प्रोत्साहन (PLI Scheme) की रूपरेखा तैयार की गई है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि ‘पीएम ई-ड्राइव’ के सफल क्रियान्वयन से आने वाले वर्षों में मैन्युफैक्चरिंग, बैटरी रीसाइक्लिंग और चार्जिंग स्टेशन प्रबंधन के क्षेत्र में लाखों नए रोज़गार पैदा होंगे, जो भारत की अर्थव्यवस्था को एक नई दिशा देंगे।