भदोही में एशिया के सबसे बड़े हस्तनिर्मित कालीन मेले ‘इंडिया कारपेट एक्सपो’ का भव्य शुभारंभ

स्वर्ण जयंती संस्करण का उद्घाटन करते हुए मुख्यमंत्री ने कारीगरों के हुनर, नई तकनीक और उन्नत डिज़ाइन पर दिया विशेष बल
अभिषेक सिंह
भदोही
उत्तर प्रदेश का भदोही जनपद, जिसे संपूर्ण भारतवर्ष और वैश्विक स्तर पर ‘कालीन नगरी’ के रूप में एक अत्यंत विशिष्ट और गौरवशाली पहचान प्राप्त है, आज एक बार फिर से अंतरराष्ट्रीय व्यापार और सांस्कृतिक विरासत का प्रमुख केंद्र बन गया है। राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनपद भदोही में आज एशिया के सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय हस्तनिर्मित कालीन व्यापार मेला ‘इंडिया कारपेट एक्सपो’ का विधिवत शुभारंभ किया है। यह आयोजन इस दृष्टि से अत्यंत ऐतिहासिक और अभूतपूर्व है क्योंकि यह इस प्रतिष्ठित व्यापार मेले के स्वर्ण जयंती संस्करण का शुभारंभ है। एशिया के सबसे बड़े हस्तनिर्मित कालीन मेले के रूप में स्थापित यह विशाल आयोजन भारतीय कारीगरों की अद्भुत कला, उनके अथक परिश्रम और उनकी अद्वितीय रचनात्मकता को विश्व पटल पर एक नई और सशक्त पहचान प्रदान करता है।
इस विशाल और भव्य अंतरराष्ट्रीय आयोजन के उद्घाटन के पुनीत अवसर पर मुख्यमंत्री ने केवल पारंपरिक रस्म ही नहीं निभाई, बल्कि उन्होंने कालीन उद्योग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए विस्तृत और सार्थक चर्चा भी की। इस महत्वपूर्ण अवसर पर मुख्यमंत्री ने कालीन उद्योग से जुड़े निर्यातकों, विक्रेताओं एवं प्रमुख उद्यमियों से सीधा संवाद भी किया। इस उच्च-स्तरीय संवाद का मुख्य उद्देश्य उद्योग के समक्ष आने वाली वर्तमान चुनौतियों को गहराई से समझना और भारतीय हस्तनिर्मित कालीनों के निर्यात को विश्व बाजार में और अधिक प्रतिस्पर्धी तथा लाभदायक बनाना था। निर्यातकों और उद्यमियों के साथ किया गया यह वैचारिक आदान-प्रदान इस उद्योग से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े लाखों लोगों के जीवन में आर्थिक समृद्धि लाने की दिशा में एक अत्यंत सकारात्मक और स्वागत योग्य कदम है।
मुख्यमंत्री ने अपने विचार व्यक्त करते हुए भारतीय बुनकरों और कारीगरों के सदियों पुराने अथक परिश्रम और उनकी अनवरत साधना की भूरि-भूरि प्रशंसा की। अपने आधिकारिक संदेश में उन्होंने अत्यंत मार्मिक और प्रगतिशील दृष्टिकोण साझा करते हुए कहा कि जिन हाथों ने सदियों तक कालीन बुना, उनमें नई तकनीक और नई डिजाइन भी होनी चाहिए। यह महत्वपूर्ण वक्तव्य इस बात का पूर्ण और स्पष्ट संकेत है कि राज्य सरकार हमारी प्राचीन और पारंपरिक कला को आधुनिक युग की उन्नत तकनीक के साथ जोड़ने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। बिना तकनीकी उन्नयन और नए डिज़ाइनों के अंतरराष्ट्रीय बाजार में अन्य देशों के साथ प्रतिस्पर्धा करना अत्यंत कठिन है। सरकार का यह स्पष्ट मानना है कि हमारे कारीगरों की पीढ़ियों पुरानी उत्कृष्ट कला को आधुनिक वैश्विक बाजार की मांग के अनुसार ढाला जाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
राज्य सरकार द्वारा इस विशिष्ट क्षेत्र में किए गए निरंतर और ईमानदार प्रयासों के सकारात्मक परिणाम अब स्पष्ट रूप से धरातल पर दृष्टिगोचर होने लगे हैं। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में यह भी स्पष्ट किया कि हमारी सरकार ने कारीगरों के हुनर, कला और उनकी साधना को पहचान दिलाने के लिए सार्थक प्रयास प्रारंभ किए। शासन स्तर पर किए गए इन बहुआयामी प्रयासों का ही यह सुखद और दूरगामी परिणाम है कि इसके बाद भारतीय कालीन उद्योग को एक बड़ा और विस्तृत मार्केट (बाजार) भी मिला और उन्नत डिजाइन भी प्राप्त हुए।
अंत में, मुख्यमंत्री ने इस ऐतिहासिक पड़ाव तक पहुंचने के लिए सभी हितधारकों का हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने ‘इंडिया कारपेट एक्सपो’ की 50 वर्षों की गौरवशाली यात्रा से जुड़े सभी लोगों को अपनी हार्दिक बधाई प्रेषित की। साथ ही, उन्होंने राज्य और देश की अर्थव्यवस्था में अपना बहुमूल्य योगदान देने वाले सभी निर्यातकों, विक्रेताओं, उद्यमियों, कारीगरों एवं हस्तशिल्पियों को भी अपनी हार्दिक शुभकामनाएं दीं। यह स्वर्ण जयंती समारोह निश्चित रूप से भारतीय हस्तनिर्मित कालीन उद्योग के लिए एक नए और स्वर्णिम युग का सूत्रपात करेगा, जिससे वैश्विक स्तर पर भारत की साख और अधिक सुदृढ़ होगी।