स्वास्थ्य और स्वच्छता का अद्भुत समन्वय: अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान में ‘स्वच्छता ही सेवा’ संपन्न, ‘विशेष अभियान 6.0’ का शंखनाद

राघवेंद्र प्रताप सिंह
नई दिल्ली: भारत की पारंपरिक चिकित्सा पद्धति और आधुनिक स्वच्छता मानकों के बीच एक सशक्त सेतु का निर्माण करते हुए आयुष मंत्रालय के अधीन देश के शीर्ष संस्थान, अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA), नई दिल्ली में पखवाड़े भर चले ‘स्वच्छता ही सेवा 2026’ अभियान का गरिमामय समापन हुआ। इसके साथ ही, संस्थान ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली को चुस्त-दुरुस्त करने, लंबित मामलों को शून्य पर लाने और कार्यस्थलों को पर्यावरण-अनुकूल बनाने के उद्देश्य से पूरे अक्टूबर माह तक चलने वाले ‘विशेष अभियान 6.0’ की औपचारिक शुरुआत कर दी है।
आयुर्वेद के मौलिक दर्शन में ‘शौच’ (आंतरिक और बाह्य स्वच्छता) को संपूर्ण आरोग्य और रोगमुक्ति की पहली सीढ़ी माना गया है। चरक संहिता और सुश्रुत संहिता जैसे प्राचीन ग्रंथों में व्यक्ति के निजी स्वास्थ्य के साथ-साथ उसके परिवेश, जलस्रोतों और वायु की शुद्धता पर अत्यधिक बल दिया गया है। इसी शाश्वत सिद्धांत को आधार बनाकर AIIA परिसर में ‘स्वभाव स्वच्छता, संस्कार स्वच्छता’ थीम के तहत सघन अभियान चलाया गया। संस्थान के डॉक्टरों, संकाय सदस्यों, शोधकर्ताओं, नर्सिंग स्टाफ और मेडिकल छात्रों ने स्वयं झाड़ू थामकर न केवल अस्पताल परिसर बल्कि आसपास के जन-क्षेत्रों में भी व्यापक श्रमदान किया।
समापन समारोह के दौरान पखवाड़े भर की उपलब्धियों का ब्यौरा साझा किया गया। इस दौरान संस्थान के विशाल हर्बल गार्डन (धन्वंतरि वन), जहां सैकड़ों दुर्लभ औषधीय पौधे उगाए जाते हैं, की विशेष रूप से वैज्ञानिक छंटाई और सफाई की गई। संस्थान ने मेडिकल वेस्ट और गीले बायो-वेस्ट के शत-प्रतिशत सुरक्षित निस्तारण के लिए आधुनिक कम्पोस्टिंग तकनीक का प्रदर्शन किया, जिससे निकलने वाली जैविक खाद का उपयोग अब औषधीय पौधों के पोषण में किया जा रहा है। अस्पताल आने वाले मरीजों और उनके तीमारदारों के लिए स्वास्थ्य और स्वच्छता पर विशेष परामर्श सत्र और नुक्कड़ नाटकों का आयोजन किया गया।
अब संस्थान का पूरा ध्यान 31 अक्टूबर तक चलने वाले ‘विशेष अभियान 6.0’ पर केंद्रित हो गया है। केंद्र सरकार के प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग के निर्देशों के अनुरूप संचालित इस अभियान के तहत AIIA अपने अभिलेख कक्षों (Record Rooms) से पुरानी और अनुपयोगी फाइलों को वीव-आउट (Weed Out) करेगा, अप्रयुक्त इलेक्ट्रॉनिक और कार्यालयी स्क्रैप का सुरक्षित निपटान करेगा और डिजिटल कार्यसंस्कृति (e-Office) को शत-प्रतिशत लागू करेगा। इससे न केवल कार्यालयों में कीमती जगह खाली होगी, बल्कि प्रशासनिक फाइलों के निस्तारण में लगने वाला समय भी घटकर आधा रह जाएगा।