भविष्य के राष्ट्रीय राजमार्गों का रोडमैप: MoRTH का दो दिवसीय ‘चिंतन शिविर 2026’ शुरू, आधुनिक और सुरक्षित बुनियादी ढांचे पर मंथन

राघवेंद्र प्रताप सिंह
नई दिल्ली: देश के राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क को आगामी दशकों की चुनौतियों के अनुरूप ढालने और लॉजिस्टिक्स लागत को न्यूनतम स्तर पर लाने के उद्देश्य से सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) द्वारा 5 और 6 अक्टूबर 2026 को दो दिवसीय ‘चिंतन शिविर 2026’ का आयोजन किया जा रहा है। इस उच्च-स्तरीय मंथन का मुख्य लक्ष्य एक ऐसा राष्ट्रीय राजमार्ग बुनियादी ढांचा तैयार करना है जो न केवल गति और कनेक्टिविटी प्रदान करे, बल्कि सुरक्षा, पर्यावरण अनुकूलता और तकनीकी रूप से दुनिया के बेहतरीन मानकों से लैस हो।
इस दो दिवसीय सम्मेलन में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री, मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और राष्ट्रीय राजमार्ग एवं अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड (NHIDCL) के शीर्ष प्रतिनिधि, तकनीकी विशेषज्ञ और निर्माण उद्योग के अग्रणी नीति निर्माता भाग ले रहे हैं। शिविर का एजेंडा मुख्य रूप से चार प्रमुख बिंदुओं पर केंद्रित है: सड़क सुरक्षा में क्रांतिकारी सुधार और दुर्घटनाओं में कमी, आधुनिक निर्माण सामग्री का उपयोग, एक्सप्रेसवे पर ग्रीन-लॉजिस्टिक्स को बढ़ावा और स्मार्ट मोबिलिटी का एकीकरण।
‘चिंतन शिविर’ के पहले दिन भारत में सड़क सुरक्षा को लेकर गहन विमर्श हुआ। मंत्रालय का लक्ष्य वैज्ञानिक ब्लैक-स्पॉट सुधार, उन्नत आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित सीसीटीवी निगरानी के जरिए हाईवे पर होने वाली दुर्घटनाओं को 50 प्रतिशत तक कम करना है। इसके साथ ही, भारत की लॉजिस्टिक्स लागत को सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 8-9 प्रतिशत तक सीमित करने के लिए मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्कों (MMLP) को सीधे एक्सप्रेसवे से जोड़ने की रणनीतियों की समीक्षा की जा रही है।
तकनीकी सत्रों में शून्य-उत्सर्जन निर्माण तकनीकों, बायो-बिटुमेन और प्लास्टिक कचरे के हाईवे निर्माण में पुनः उपयोग पर जोर दिया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, इस चिंतन शिविर से निकलने वाले नीतिगत निष्कर्ष आगामी वर्षों के लिए भारत के राष्ट्रीय राजमार्ग विकास का ‘विजन 2047’ दस्तावेज़ तैयार करने में आधारशिला का काम करेंगे।