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सेमीकंडक्टर और एआई में भारत की लंबी छलांग: स्वदेशी ‘AI विज़न SoC’ चिप के लिए TDB और बिगएंडियन में ₹130 करोड़ का ऐतिहासिक करार

अभिषेक सिंह

नई दिल्ली: भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) महाशक्ति बनाने के संकल्प को एक और ठोस धरातल मिला है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (TDB) ने पूरी तरह से स्वदेशी ‘एआई विज़न सिस्टम-ऑन-चिप’ (AI Vision SoC) विकसित करने के लिए भारतीय डीप-टेक स्टार्टअप ‘बिगएंडियन सेमीकंडक्टर्स प्राइवेट लिमिटेड’ (BigEndian Semiconductors) के साथ ₹130 करोड़ के अनुसंधान, विकास और नवाचार (RDI) समर्थन समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। यह परियोजना ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन’ (ISM) और आत्मनिर्भर भारत के विज़न को ज़मीनी रूप देने की दिशा में एक युगांतरकारी कदम है।

आधुनिक दौर में निगरानी कैमरे, स्मार्ट मोबिलिटी, स्वायत्त वाहन (Autonomous Vehicles), ड्रोन और औद्योगिक स्वचालन जैसे उपकरणों में भारी मात्रा में दृश्य डेटा (Visual Data) उत्पन्न होता है। अब तक भारत इन उपकरणों में इस्तेमाल होने वाली उन्नत चिप्स और प्रोसेसरों के लिए पूरी तरह से विदेशी कंपनियों और आयात पर निर्भर रहा है। इस निर्भरता से न केवल भारी विदेशी मुद्रा खर्च होती है, बल्कि डेटा सुरक्षा और साइबर संप्रभुता को लेकर भी गंभीर चिंताएं बनी रहती हैं।

इस ₹130 करोड़ के रणनीतिक समझौते के तहत विकसित की जाने वाली स्वदेशी ‘AI विज़न SoC’ चिप को अत्याधुनिक आर्किटेक्चर पर तैयार किया जाएगा। यह चिप ‘एज कंप्यूटिंग’ (Edge Computing) क्षमता से लैस होगी, जिसका अर्थ है कि यह अत्यधिक कम बिजली की खपत करते हुए कैमरे या डिवाइस के स्तर पर ही भारी-भरकम वीडियो और विज़ुअल डेटा का रियल-टाइम विश्लेषण कर सकेगी। इससे स्मार्ट शहरों के सर्विलांस, ट्रैफ़िक मैनेजमेंट, रक्षा सुरक्षा उपकरणों और स्वास्थ्य जांच मशीनों को अभूतपूर्व तेज़ी और स्वदेशी सुरक्षा कवच मिलेगा।

प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड के अनुसार, यह समझौता भारत को केवल चिप असेंबली तक सीमित रखने के बजाय कोर चिप डिज़ाइनिंग और बौद्धिक संपदा (IP) निर्माण का केंद्र बनाने की रणनीति का हिस्सा है। बिगएंडियन सेमीकंडक्टर्स के शीर्ष इंजीनियर इस चिप के डिज़ाइन, सत्यापन और प्रोटोटाइप पर काम करेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्वदेशी चिप वैश्विक बाज़ार में क्वालकॉम और मीडियाटेक जैसी दिग्गज कंपनियों के विकल्पों के रूप में उभरेगी और भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण उद्योग को वैश्विक सप्लाई चेन में एक स्वतंत्र और मजबूत पहचान दिलाएगी।