सुरक्षित भंडारण और स्वच्छ खाद्य सुरक्षा: उपभोक्ता मामले एवं खाद्य मंत्रालय में राष्ट्रव्यापी श्रमदान से ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान संपन्न

अभिषेक सिंह
नई दिल्ली: भारत के करोड़ों नागरिकों तक सुरक्षित, पौष्टिक और गुणवत्तापूर्ण अन्न पहुंचाने की रीढ़ माने जाने वाले उपभोक्ता कार्य, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के अंतर्गत देश भर में आयोजित ‘स्वच्छता ही सेवा 2026’ (SHS-2026) अभियान का एक विशाल राष्ट्रव्यापी श्रमदान और जन-भागीदारी के साथ सफलतापूर्वक समापन हो गया है। मंत्रालय के तहत कार्यरत भारतीय खाद्य निगम (FCI), केंद्रीय भंडारण निगम (CWC), राष्ट्रीय उपभोक्ता सहकारी संघ (NCCF) और राष्ट्रीय शर्करा संस्थान जैसी सभी प्रमुख संस्थाओं ने इस अभियान में कंधे से कंधा मिलाकर भाग लिया।
खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में स्वच्छता का महत्व केवल दृश्य सुंदरता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह खाद्यान्न की सुरक्षा, बर्बादी की रोकथाम और सार्वजनिक स्वास्थ्य से सीधा जुड़ा हुआ विषय है। मानसून के बाद के इस मौसम में जब गोदामों में नमी और कीटों का खतरा बढ़ जाता है, इस राष्ट्रव्यापी स्वच्छता अभियान ने देश भर के साइलो, गोदामों और रेलहेड टर्मिनलों को संक्रमण मुक्त और सुरक्षित बनाने में एक निर्णायक भूमिका निभाई है।
पखवाड़े भर चले इस सघन अभियान के दौरान देश के सुदूरवर्ती कोनों—कश्मीर से कन्याकुमारी और असम से गुजरात तक—स्थित 2,000 से अधिक FCI और CWC गोदाम परिसरों में विशेष सफाई अभियान चलाया गया। लाखों टन खाद्यान्न के सुरक्षित भंडारण के लिए गोदामों की आंतरिक दीवारों, फर्श और ड्रेनेज सिस्टम की वैज्ञानिक सफाई और कीटाणुशोधन किया गया। कर्मचारियों और श्रमिक बंधुओं ने मिलकर वर्षों से पड़े कबाड़, खराब पड़े लकड़ी के क्रेट्स, और अनुपयोगी मशीनरी को छांटकर अलग किया। इसके साथ ही, सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) से जुड़ी देश की लाखों उचित मूल्य की दुकानों (राशन की दुकानों) पर स्वच्छता शपथ का आयोजन किया गया, जहां राशन कार्ड धारकों को साफ-सुथरे तरीके से अनाज के रखरखाव के प्रति जागरूक किया गया।
मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने जानकारी दी कि इस अभियान के माध्यम से न केवल कार्यस्थलों को स्वच्छ बनाया गया, बल्कि अनुपयोगी फाइलों और स्क्रैप के निपटान से सरकार को लाखों रुपये के गैर-कर राजस्व की प्राप्ति भी हुई है। खाद्य वितरण विभाग ने यह संकल्प लिया है कि स्वच्छता की यह भावना किसी पखवाड़े तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि गोदामों के नियमित वैज्ञानिक रख-रखाव और ‘शून्य खाद्यान्न बर्बादी’ (Zero Food Wastage) के माध्यम से भारत की खाद्य सुरक्षा प्रणाली को दुनिया की सबसे स्वच्छ और पारदर्शी प्रणाली बनाया जाएगा।