लॉस एंजिल्स 2028 के लिए भारतीय महिला मुक्केबाजी का रोडमैप तैयार
एशियाई खेलों में पदकों की सफलता के बाद भारतीय महिला मुक्केबाजी टीम ने अब लॉस एंजिल्स 2028 ओलंपिक के लिए अपनी तैयारियों की दिशा तय कर ली है। टीम के मुख्य कोच सैंटियागो नीवा की प्राथमिकता ज्यादा से ज्यादा मुक्केबाजों को जल्द ओलंपिक कोटा दिलाना है, ताकि खिलाड़ियों को खेलों से पहले लंबी और बेहतर तैयारी का मौका मिल सके। 2026 एशियाई खेलों में भारतीय महिला मुक्केबाजों ने तीन पदक अपने नाम किए, जिनमें दो स्वर्ण पदक शामिल रहे।
शुरुआती क्वालीफिकेशन पर फोकस, नई ओलंपिक साइकिल की तैयारी शुरू
ओलंपिक क्वालीफिकेशन की पहली बड़ी परीक्षा 2027 में कजाकिस्तान में होने वाली विश्व चैंपियनशिप होगी। नीवा की कोशिश है कि भारतीय मुक्केबाज इसी प्रतियोगिता में अधिक से अधिक कोटा हासिल कर लें। उन्होंने भारतीय खेल प्राधिकरण मीडिया से बताया, “पहला क्वालीफायर कजाकिस्तान में, जो विश्व चैंपियनशिप है, जहां आदर्श रूप से हम ज्यादा से ज्यादा कोटा हासिल करना चाहेंगे। एशियाई ओलंपिक क्वालीफायर होगा और 2028 में दो और ओलंपिक क्वालीफायर होंगे।”
नीवा के लिए शुरुआती दौर में क्वालीफिकेशन हासिल करना इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे टीम को लॉस एंजिल्स ओलंपिक के लिए विशेष तैयारी का पर्याप्त समय मिल सकेगा। उन्होंने माना कि क्वालीफिकेशन का रास्ता आसान नहीं होगा, लेकिन टीम का लक्ष्य ज्यादा से ज्यादा मुक्केबाजों को ओलंपिक तक पहुंचाना है।

उन्होंने बताया, “अगर हम आदर्श रूप से अगले साल शुरुआत में क्वालीफाई कर लेते हैं तो हमें अच्छी तैयारी के लिए काफी समय मिल जाएगा। यह एक कठिन क्वालीफिकेशन मार्ग होगा और उम्मीद है कि हम अधिक से अधिक मुक्केबाजों को क्वालीफाई करा सकेंगे, हम ओलंपिक के लिए मजबूत टीम तैयार कर सकें।”
ग्लासगो में हुए राष्ट्रमंडल खेलों में टीम ने छह पदक जीते थे, जिनमें पांच स्वर्ण पदक शामिल थे। इसके बाद आइची-नागोया एशियाई खेलों में तीन पदकों की उपलब्धि ने भारतीय महिला मुक्केबाजी के लिए सफल साल को पूरा किया।
नीवा ने इस प्रदर्शन के पीछे पूरे साल की योजनाबद्ध तैयारी को अहम बताया। टीम ने मजबूत अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के साथ घरेलू प्रशिक्षण शिविरों और उच्च स्तर के अभ्यास मुकाबलों के जरिए खुद को तैयार किया। भारतीय मुक्केबाजी से नीवा का जुड़ाव भी पुराना है। वह 2017 से 2021 तक भारतीय मुक्केबाजी के उच्च प्रदर्शन निदेशक रहे थे और 2025 में राष्ट्रीय महिला टीम के मुख्य कोच के तौर पर भारतीय व्यवस्था में उनकी वापसी हुई।
इस साल की प्रमुख अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं से पहले पटियाला स्थित भारतीय खेल प्राधिकरण के राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र में टीम ने लंबे समय तक तैयारी की। नीवा के मुताबिक, खिलाड़ियों को मिल रहा मजबूत सपोर्ट सिस्टम भी प्रदर्शन में अहम भूमिका निभा रहा है।
उन्होंने बताया कि पटियाला केंद्र में मुक्केबाजों के साथ 40 लोगों का स्टाफ काम करता है। इनमें लगभग 20 कोच और 20 अन्य सहयोगी स्टाफ शामिल हैं। नीवा ने कहा, “हमारे पास मुक्केबाजों के साथ काम करने वाले 40 लोगों का स्टाफ है, जिनमें 20 कोच और 20 अन्य सहयोगी स्टाफ हैं। खेल विज्ञान, मुक्केबाजी हॉल, मुक्केबाजी उपकरण और अन्य क्षेत्रों में सुधार हुए हैं।”
नीवा ने इस व्यवस्था को भारत की बड़ी ताकत बताते हुए कहा कि यह दुनिया के शीर्ष मुक्केबाजी कार्यक्रमों के बराबर है। उन्होंने कहा, “मैं कहूंगा कि ऐसे बहुत ज्यादा देश नहीं हैं, जिनके पास इससे बेहतर सहयोग व्यवस्था है।”
भारतीय टीम ने सिर्फ घरेलू तैयारियों पर निर्भर रहने के बजाय अंतरराष्ट्रीय स्तर के अभ्यास को भी अपनी रणनीति का हिस्सा बनाया। एशियाई खेलों से पहले डोमिनिकन गणराज्य और ईरान की टीमों को पटियाला बुलाया गया, जहां भारतीय मुक्केबाजों को प्रशिक्षण और अभ्यास मुकाबलों का मौका मिला। इसके बाद जापान में अंतिम चरण की तैयारी के दौरान भी टीम को उच्च स्तर के अभ्यास मुकाबले मिले।
नीवा ने कहा, “जापान में हमारी अंतिम तैयारी अच्छी रही, जहां हमें अच्छे अभ्यास मुकाबले भी मिले। हम एशियाई खेलों के लिए बहुत अच्छी तरह तैयार होकर गए थे।”
हालांकि, एशियाई खेलों में मिली सफलता के बाद भी नीवा संतुष्ट होकर रुकना नहीं चाहते। उनके लिए अब असली चुनौती इस प्रदर्शन को ओलंपिक स्तर पर दोहराने की है। भारतीय महिला मुक्केबाजी टीम का लक्ष्य स्पष्ट है—जल्द से जल्द ज्यादा से ज्यादा कोटा हासिल करना, लंबी अवधि की तैयारी करना और लॉस एंजिल्स में मजबूत टीम के साथ उतरना।
नीवा ने कहा, “हालांकि, हम इस प्रदर्शन पर रुक नहीं सकते। हमें लगातार आगे देखना होगा और अंत में हम सभी अगले ओलंपिक में बड़ी सफलता चाहते हैं।”