Trending

दिल्ली में छात्रों के PG की होगी ऑनलाइन मैपिंग, 3 दिन में 100 जगहों का निरीक्षण, CCTV पर भी बड़ा प्रस्ताव

नई दिल्ली ( द इंडियन व्यू टीम ) :

दिल्ली पीजी एकॉमडेशन रूल्स 2026 के तहत दिल्ली में पेइंग गेस्ट (PG) आवासों में रहने वाले छात्रों की सुरक्षा और सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए सरकार ने कदम तेज कर दिए हैं। अब राजधानी में छात्रों के पीजी आवासों की जानकारी जुटाने के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल तैयार किया जा रहा है। इसके जरिए यह पता लगाया जाएगा कि छात्र कहां रह रहे हैं और उन्हें किस तरह की सुविधाएं मिल रही हैं। इसके साथ ही दिल्ली में चिन्हित 100 पीजी आवासों का अगले तीन दिनों में निरीक्षण किया जाएगा।

यह पहल सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना के बाद छात्र आवासों की सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता के बीच की जा रही है। सरकार का लक्ष्य पीजी व्यवस्था के लिए स्पष्ट नियम बनाना और छात्रों को सुरक्षित व किफायती आवास उपलब्ध कराना है।

दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) और दिल्ली नगर निगम (MCD) की संयुक्त टीमें अगले तीन दिनों में 100 चिन्हित मामलों की जांच करेंगी। इस दौरान भवनों में सुरक्षा मानकों और मौजूदा नियमों के पालन की स्थिति देखी जाएगी। यह कदम पीजी आवासों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की व्यापक योजना का हिस्सा है।

दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद की अध्यक्षता में छात्र आवास एवं सुरक्षा से जुड़ी उच्चाधिकार प्राप्त समिति की बैठक में ये फैसले लिए गए। शुरुआती चरण में पोर्टल पर कमरों की संख्या और उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं जैसी जानकारी दर्ज की जाएगी। दिल्ली विश्वविद्यालय और नगर निगम पोर्टल का शुरुआती परीक्षण करेंगे। इसके बाद छात्रों के पंजीकरण के लिए अभियान चलाने की योजना है। सरकार का उद्देश्य पीजी आवास व्यवस्था की निगरानी को बेहतर बनाना और छात्रों को सुरक्षित रहने की सुविधा उपलब्ध कराना है।

सरकार ने डीडीए, एमसीडी, दिल्ली सरकार और दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिनिधियों वाली एक उप-समिति बनाई है। यह समिति प्रमुख शैक्षणिक केंद्रों के आसपास और ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी में कानूनी रूप से पीजी संचालन की संभावनाओं का अध्ययन करेगी। मास्टर प्लान और संबंधित कानूनों के प्रावधानों की भी समीक्षा की जाएगी।

प्रस्तावित नियमों में पीजी आवासों के प्रवेश और निकास द्वारों के साथ साझा जगहों पर सीसीटीवी कैमरे लगाना अनिवार्य करने पर विचार किया जा रहा है। कैमरों की रिकॉर्डिंग का 40 से 45 दिनों तक बैकअप रखने का भी प्रस्ताव है। हालांकि, छात्रों की निजता को ध्यान में रखते हुए उनके निजी कमरों और व्यक्तिगत स्थानों पर निगरानी नहीं की जाएगी।